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Noida Protest: कैसे उठी नोएडा में हिंसक प्रदर्शन की आग, हरियाणा और यूपी के वेतन में क्या है फर्क?

Tue, 14 Apr 2026 04:46 AM IST
Akash Dubey ऋषभ कौशल, अमर उजाला, नोएडा
ऋषभ कौशल, अमर उजाला, नोएडा Published by: Akash Dubey Updated Tue, 14 Apr 2026 04:46 AM IST
सार

हरियाणा में वेतन वृद्धि से प्रेरित होकर श्रमिकों ने वेतन बढ़ाने की मांग पर हिंसक प्रदर्शन किया। बच्चों ने पत्थरबाजी की और सोशल मीडिया ने उन्हें संगठित किया।

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Noida Protest How the fire of violent protest started in city
नोएडा में उग्र प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फेज-2 इलाके में होजरी कॉम्पलेक्स के पास कर्मियों ने हिंसक प्रदर्शन किया। इस हिंसक प्रदर्शन के पहले बृहस्पतिवार को हरियाणा में बढ़े वेतन की बात सोशल मीडिया पर फैलने के बाद नोएडा के श्रमिकों ने वेतन बढ़ाने की मांग की। 

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सेक्टर 84 स्थित ऋचा ग्लोबल और मदरसन कंपनी के कर्मचारियों ने बीते 9 अप्रैल (बृहस्पतिवार) को हरियाणा की तर्ज में बढ़े कामगारों के वेतन के अनुरूप वेतन बढ़ाने की मांग कंपनियों के समक्ष रखी। कर्मियों का कहना है कि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, जिसके बाद उन्होंने हड़ताल कर दी। तब यह हड़ताल सिर्फ कुछ दर्जन कामगारों तक सीमित रही, लेकिन अगले दिन उन्हें देखकर अन्य कंपनियों के लोग कामगार भी अपना वेतन बढ़ाने की मांग लेकर प्रदर्शन में शामिल हो गए। 
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श्रमिकों के अनुसार, हरियाणा में कामगारों के प्रदर्शन के बाद अकुशल श्रमिकों के लिए मानदेय 15 हजार रुपये से अधिक रखा। अर्ध कुशल श्रमिकों के लिए 16 हजार से अधिक, कुशल श्रमिकों के लिए 18 हजार से अधिक और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए 19 हजार से अधिक रखा, लेकिन दूसरी ओर यूपी में अकुशल श्रमिकों के लिए 11 हजार से अधिक और कुशल श्रमिकों के लिए 13 हजार से अधिक रुपये का प्रावधान है। इसी को बढ़ाने के लिए श्रमिकों ने मोर्चा खोला और प्रदर्शन पर उतर आए।
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आखिर कर्मियों संग कैसे शामिल हुए 10-12 साल के बच्चे
सेक्टर-84 में हुए उग्र प्रदर्शन के दौरान 10-12 साल के बच्चों ने भी हाथों में पत्थर उठाए और पुलिस व कंपनियों पर हमला किया। काफी देर तक ऐसे दर्जनों बच्चे हमला करते रहे, लेकिन पुलिस ने बच्चों की उम्र देखकर उन्हें थोड़ा डराने का प्रयास किया, लेकिन उनके हाथ भी बंधे थे। वहीं दूसरी ओर वह बच्चे कंपनियों में तोड़फोड़ करते रहे। 


सोशल मीडिया बना असंगठित कामगारों को संगठित करने का हथियार 
बता दें, सोशल मीडिया में शुरुआत से ही बड़ी संख्या में कामगार और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स तमाम तरह के फोटो, वीडियो और रील पोस्ट कर रहे हैं, जिसमें बार-बार दिखाया जा रहा है कि किस तरह से पुलिस के आगे श्रमिक अड़े हुए हैं। वाहनों में तोड़फोड़ की जा रही है और कंपनियों में भी तोड़फोड़ और आगजनी की जा रही है। इसे देख अन्य श्रमिकों को भी बल मिला और वह असंगठित लोगों संग संगठित होकर प्रदर्शन में शामिल हुए।

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