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एयरपोर्ट से लॉजिस्टिक लागत में आएगी कमी, समय की होगी बचत
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लखनऊ/ग्रेटर नोएडा। नोएडा एयरपोर्ट के निर्माण से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। साथ ही, समय की भी बचत होगी। प्रदेश के आर्थिक विकास में एयरपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली के पास होने के साथ गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, मेरठ, अलीगढ़ आदि जनपदों के औद्योगिक विकास, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस आदि के निर्माण से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, उद्यमियों, व्यापारियों व लोगों को विशेष लाभ होगा।
अधिकारियों का कहना है कि देश में पहली बार इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल कार्गो हब की अवधारणा के साथ एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसके निर्माण से प्रदेश देश में बनी विभिन्न औद्योगिक, खाद्यान्न आदि वस्तुओं का निर्यात शीघ्रता से होगा। साथ ही, वस्तुओं के विनिमय आयात निर्यात/लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और समय की बचत होगी। प्रदेश के विभिन्न उत्पादों के निर्यात के लिए कार्गो हब का निर्माण प्रदेश वासियों की आर्थिक प्रगति में बहुत सहायक होगा। एयरपोर्ट के साथ ही एयरो सिटी के निर्माण की योजना भी सरकार ने बनाई है। इस एयरपोर्ट के निर्माण से हास्पिटैलिटी और पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से देश की संस्कृति और आर्थिक प्रगति में मजबूती आएगी।
एयरपोर्ट के विकास कार्यों पर किया जा रहा मंथन
प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) की 12वीं बोर्ड बैठक मंगलवार को लोक भवन में हुई। इसमें नियाल ने एयरपोर्ट की प्रगति रिपोर्ट पेश की। नियाल के सीईओ डॉ. अरुण वीर सिंह ने बोर्ड के समक्ष एजेंडा प्रस्तुत किया। प्रस्तुतीकरण में उन्होंने बताया कि यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने डेवलपमेंट प्लान प्रस्तुत किया है, जिसका मंथन किया जा रहा है। कंपनी की ओर से एयरपोर्ट साइट पर बाउंड्री वाल और समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण के लिए नागर विमानन मंत्रालय की ओर से साइट व पर्यावरण क्लीयरेंस और गृह मंत्रालय व रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है।
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निर्माण की अवधि तीन वर्ष यानी 1095 दिन तय की गई है, जो 29 सितंबर 2024 है। बैठक में अपर मुख्य सचिव, नागरिक उड्डयन एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास अरविंद कुमार, सीईओ ग्रेटर नोएडा, सीईओ नोएडा ने वीडियो कांफ्रेंस से हिस्सा लिया। साथ ही, निदेशक नागरिक उड्डयन, सचिव वित्त, संयुक्त सचिव औद्योगिक विकास और नियाल के नोडल ऑफिसर शैलेंद्र भाटिया बैठक में मौजूद रहे।
दूसरे चरण में अधिग्रहण होने वाले गांवों के ग्रामीणों ने रखी मांगें
नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण में छह गांवों की 1365 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। इसके लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है। इसके अलावा ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के एवज में पहले से तय शर्तों के अलावा तीन नई मांगें भी पूरी करनी होंगी। इसमें टाउनशिप के अलावा पशुओं के लिए अलग से व्यवस्था और कामर्शियल प्रॉपर्टी जैसे छोटी दुकानों आदि के लिए जमीन दी जाए। जमीन अधिग्रहण से पहले जेवर के 6 गांवों के प्रभावित किसान परिवारों का सामाजिक समाघात निर्धारण (एसआईए) पर लोक सुनवाई का काम पूरा कर लिया गया है।
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अधिकारियों का कहना है कि देश में पहली बार इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल कार्गो हब की अवधारणा के साथ एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसके निर्माण से प्रदेश देश में बनी विभिन्न औद्योगिक, खाद्यान्न आदि वस्तुओं का निर्यात शीघ्रता से होगा। साथ ही, वस्तुओं के विनिमय आयात निर्यात/लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और समय की बचत होगी। प्रदेश के विभिन्न उत्पादों के निर्यात के लिए कार्गो हब का निर्माण प्रदेश वासियों की आर्थिक प्रगति में बहुत सहायक होगा। एयरपोर्ट के साथ ही एयरो सिटी के निर्माण की योजना भी सरकार ने बनाई है। इस एयरपोर्ट के निर्माण से हास्पिटैलिटी और पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से देश की संस्कृति और आर्थिक प्रगति में मजबूती आएगी।
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एयरपोर्ट के विकास कार्यों पर किया जा रहा मंथन
प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) की 12वीं बोर्ड बैठक मंगलवार को लोक भवन में हुई। इसमें नियाल ने एयरपोर्ट की प्रगति रिपोर्ट पेश की। नियाल के सीईओ डॉ. अरुण वीर सिंह ने बोर्ड के समक्ष एजेंडा प्रस्तुत किया। प्रस्तुतीकरण में उन्होंने बताया कि यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने डेवलपमेंट प्लान प्रस्तुत किया है, जिसका मंथन किया जा रहा है। कंपनी की ओर से एयरपोर्ट साइट पर बाउंड्री वाल और समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण के लिए नागर विमानन मंत्रालय की ओर से साइट व पर्यावरण क्लीयरेंस और गृह मंत्रालय व रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है।
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निर्माण की अवधि तीन वर्ष यानी 1095 दिन तय की गई है, जो 29 सितंबर 2024 है। बैठक में अपर मुख्य सचिव, नागरिक उड्डयन एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास अरविंद कुमार, सीईओ ग्रेटर नोएडा, सीईओ नोएडा ने वीडियो कांफ्रेंस से हिस्सा लिया। साथ ही, निदेशक नागरिक उड्डयन, सचिव वित्त, संयुक्त सचिव औद्योगिक विकास और नियाल के नोडल ऑफिसर शैलेंद्र भाटिया बैठक में मौजूद रहे।
दूसरे चरण में अधिग्रहण होने वाले गांवों के ग्रामीणों ने रखी मांगें
नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण में छह गांवों की 1365 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। इसके लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है। इसके अलावा ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के एवज में पहले से तय शर्तों के अलावा तीन नई मांगें भी पूरी करनी होंगी। इसमें टाउनशिप के अलावा पशुओं के लिए अलग से व्यवस्था और कामर्शियल प्रॉपर्टी जैसे छोटी दुकानों आदि के लिए जमीन दी जाए। जमीन अधिग्रहण से पहले जेवर के 6 गांवों के प्रभावित किसान परिवारों का सामाजिक समाघात निर्धारण (एसआईए) पर लोक सुनवाई का काम पूरा कर लिया गया है।