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Noida News: तेंदुए की खाल की तस्करी का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
Fri, 19 Sep 2025 11:50 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Fri, 19 Sep 2025 11:50 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की चंडीगढ़ क्षेत्रीय इकाई और लुधियाना जोनल यूनिट ने अवैध वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने तेंदुए की खाल की तस्करी का पर्दाफाश किया। खुफिया जानकारी के आधार पर डीआरआई अधिकारियों की टीम ने चंडीगढ़ में छापा मारा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर और उदयपुर से आए दो तस्कर हिमाचल प्रदेश से लाई गई तेंदुए की खाल को चंडीगढ़ में बेचने की कोशिश कर रहे थे। डीआरआई टीम ने खरीदार बनकर तस्करों से सौदेबाजी का नाटक किया। जैसे ही तस्करों ने खाल दिखाई, तो अधिकारियों ने तुरंत दोनों को धर दबोचा और प्रतिबंधित वन्यजीव उत्पाद को जब्त कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि यह खाल हिमाचल प्रदेश से लाई गई थी। इसे आगे तस्करी व अवैध बिक्री के लिए इस्तेमाल किया जाना था। दोनों आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया। आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। गौरतलब है कि तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध है, जो इसे सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। इसकी खाल या अंगों का व्यापार करना गंभीर दंडनीय अपराध है।
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लुधियाना। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की चंडीगढ़ क्षेत्रीय इकाई और लुधियाना जोनल यूनिट ने अवैध वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने तेंदुए की खाल की तस्करी का पर्दाफाश किया। खुफिया जानकारी के आधार पर डीआरआई अधिकारियों की टीम ने चंडीगढ़ में छापा मारा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर और उदयपुर से आए दो तस्कर हिमाचल प्रदेश से लाई गई तेंदुए की खाल को चंडीगढ़ में बेचने की कोशिश कर रहे थे। डीआरआई टीम ने खरीदार बनकर तस्करों से सौदेबाजी का नाटक किया। जैसे ही तस्करों ने खाल दिखाई, तो अधिकारियों ने तुरंत दोनों को धर दबोचा और प्रतिबंधित वन्यजीव उत्पाद को जब्त कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि यह खाल हिमाचल प्रदेश से लाई गई थी। इसे आगे तस्करी व अवैध बिक्री के लिए इस्तेमाल किया जाना था। दोनों आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया। आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। गौरतलब है कि तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध है, जो इसे सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। इसकी खाल या अंगों का व्यापार करना गंभीर दंडनीय अपराध है।
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