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Noida News: विधानसभा की ई-लाइब्रेरी में अमूल्य अभिलेखों को मिलेगा संरक्षण
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विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में ई-लाइब्रेरी तैयार करने के लिए हुई बैठक
देश के प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने पुस्तकालय के डिजिटलीकरण पर दिए सुझाव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विधानसभा के पारंपरिक पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी में बदलकर अमूल्य अभिलेखीय सामग्रियों को संरक्षित करने की तैयारी चल रही है। इससे विधायी मामलों से जुड़ी जानकारियां न केवल विधायक, बल्कि आम लोग भी एक क्लिक मात्र से आसानी से खोज पाएंगे। इस कदम से विधानसभा की कार्यक्षमता, पारदर्शिता व सतत विकास में भी मदद मिलेगी। संसद सचिवालय इस डिजिटल बदलाव में दिल्ली विधानसभा का सहयोग करेगा।
विधानसभा सचिवालय में इसके लिए बृहस्पतिवार को बैठक हुई। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट के अलावा लोकसभा सचिवालय के निदेशक एच सैक्होलियन सिमटे, नीति आयोग पुस्तकालय के निदेशक डॉ. कुमार संजय, जेएनयू के पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. प्रवीण बब्बर, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. ई. राजलक्ष्मी, पीडब्ल्यूडी की कार्यकारी अभियंता प्रीतम सिंह, एसएस भदौरिया, पीडब्ल्यूडी के पर्यवेक्षण अभियंता (विद्युत) केके सिंह शामिल रहे। इन विशेषज्ञों ने पुस्तकालय को डिजिटल बनाने के लिए खास सुझाव दिए।
यह परिवर्तन मजबूत आईटी, आधुनिक उपकरणों और नए सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से किया जाएगा।
सबसे प्रभावी, कुशल और विश्वसनीय तरीके से तैयार होगी ई-लाइब्रेरी
विशेषज्ञों ने ई-लाइब्रेरी निर्माण के लिए सबसे प्रभावी, कुशल और विश्वसनीय तरीके अपनाने की सलाह दी। इसमें मेटाडेटा के उपयोग, पुस्तकालय प्रबंधन की आधुनिक प्रणाली इस्तेमाल करने के सुझाव दिए गए। जेएनयू, संसद पुस्तकालय और एनएसडी के पुस्तकालय अध्यक्ष ने ई-ग्रंथ माला प्लेटफॉर्म के साथ अपने अनुभव साझा किए। संसद पुस्तकालय के निदेशक ने बताया कि उनके पास 1947 से प्रकाशित सभी समाचार पत्र डिजिटल रूप में उपलब्ध हैं। डॉ. प्रवीण बब्बर ने बताया कि जेएनयू पुस्तकालय में 6 लाख से अधिक किताबें और 8 लाख समाचार क्लिपिंग्स पहले ही डिजिटल हैं। डॉ. ई. राजलक्ष्मी ने बताया कि एनएसडी की पूरी नाट्य-सामग्री डिजिटल हो गई है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वे अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से एक मजबूत, समावेशी ई-लाइब्रेरी तैयार कराएंगे, जिससे न केवल विधायकों, बल्कि आम नागरिकों को भी लाभ होगा।
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देश के प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने पुस्तकालय के डिजिटलीकरण पर दिए सुझाव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विधानसभा के पारंपरिक पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी में बदलकर अमूल्य अभिलेखीय सामग्रियों को संरक्षित करने की तैयारी चल रही है। इससे विधायी मामलों से जुड़ी जानकारियां न केवल विधायक, बल्कि आम लोग भी एक क्लिक मात्र से आसानी से खोज पाएंगे। इस कदम से विधानसभा की कार्यक्षमता, पारदर्शिता व सतत विकास में भी मदद मिलेगी। संसद सचिवालय इस डिजिटल बदलाव में दिल्ली विधानसभा का सहयोग करेगा।
विधानसभा सचिवालय में इसके लिए बृहस्पतिवार को बैठक हुई। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट के अलावा लोकसभा सचिवालय के निदेशक एच सैक्होलियन सिमटे, नीति आयोग पुस्तकालय के निदेशक डॉ. कुमार संजय, जेएनयू के पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. प्रवीण बब्बर, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. ई. राजलक्ष्मी, पीडब्ल्यूडी की कार्यकारी अभियंता प्रीतम सिंह, एसएस भदौरिया, पीडब्ल्यूडी के पर्यवेक्षण अभियंता (विद्युत) केके सिंह शामिल रहे। इन विशेषज्ञों ने पुस्तकालय को डिजिटल बनाने के लिए खास सुझाव दिए।
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यह परिवर्तन मजबूत आईटी, आधुनिक उपकरणों और नए सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से किया जाएगा।
सबसे प्रभावी, कुशल और विश्वसनीय तरीके से तैयार होगी ई-लाइब्रेरी
विशेषज्ञों ने ई-लाइब्रेरी निर्माण के लिए सबसे प्रभावी, कुशल और विश्वसनीय तरीके अपनाने की सलाह दी। इसमें मेटाडेटा के उपयोग, पुस्तकालय प्रबंधन की आधुनिक प्रणाली इस्तेमाल करने के सुझाव दिए गए। जेएनयू, संसद पुस्तकालय और एनएसडी के पुस्तकालय अध्यक्ष ने ई-ग्रंथ माला प्लेटफॉर्म के साथ अपने अनुभव साझा किए। संसद पुस्तकालय के निदेशक ने बताया कि उनके पास 1947 से प्रकाशित सभी समाचार पत्र डिजिटल रूप में उपलब्ध हैं। डॉ. प्रवीण बब्बर ने बताया कि जेएनयू पुस्तकालय में 6 लाख से अधिक किताबें और 8 लाख समाचार क्लिपिंग्स पहले ही डिजिटल हैं। डॉ. ई. राजलक्ष्मी ने बताया कि एनएसडी की पूरी नाट्य-सामग्री डिजिटल हो गई है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वे अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से एक मजबूत, समावेशी ई-लाइब्रेरी तैयार कराएंगे, जिससे न केवल विधायकों, बल्कि आम नागरिकों को भी लाभ होगा।
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