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Noida News: 19 लाख के चेक बाउंस मामले में आरोपी को किया बरी
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अतिरिक्त अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में आरोपी सुबोध कुमार को बरी कर दिया है। मामले के अनुसार नोएडा सेक्टर 12 निवासी मनोज सिंह चौहान ने आरोपी सुबोध कुमार निवासी खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था।
परिवादी के अनुसार उसने और उसकी मां ब्रजेश कुमारी ने खोड़ा कॉलोनी स्थित 200 वर्ग गज भूखंड सुबोध कुमार व यशवंत सिंह के पक्ष में पंजीकृत बैनामा किया था। इस सौदे के शेष भुगतान के तौर पर सुबोध कुमार ने पंजाब नेशनल बैंक का 19 लाख रुपये का एक चेक दिया था, जो बैंक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण वापस हो गया। चेक भुनाने के लिए कई बार संपर्क करने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया, जिसके बाद कानूनी नोटिस भेजकर परिवाद दायर किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परिवादी न तो मूल विक्रय विलेख अदालत में प्रस्तुत कर सका और न ही यह स्पष्ट कर सका कि कुल सौदा कितनी राशि का था। इसके विपरीत आरोपी द्वारा पेश पंजीकृत बैनामे से यह साबित हुआ कि 41 लाख 69 हजार रुपये के सौदे का पूरा भुगतान पहले ही हो चुका था और कोई राशि शेष नहीं थी। तथ्यों के आधार पर अदालत ने परिवाद को खारिज करते हुए आरोपी सुबोध कुमार को दोषमुक्त करार दिया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अतिरिक्त अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में आरोपी सुबोध कुमार को बरी कर दिया है। मामले के अनुसार नोएडा सेक्टर 12 निवासी मनोज सिंह चौहान ने आरोपी सुबोध कुमार निवासी खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था।
परिवादी के अनुसार उसने और उसकी मां ब्रजेश कुमारी ने खोड़ा कॉलोनी स्थित 200 वर्ग गज भूखंड सुबोध कुमार व यशवंत सिंह के पक्ष में पंजीकृत बैनामा किया था। इस सौदे के शेष भुगतान के तौर पर सुबोध कुमार ने पंजाब नेशनल बैंक का 19 लाख रुपये का एक चेक दिया था, जो बैंक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण वापस हो गया। चेक भुनाने के लिए कई बार संपर्क करने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया, जिसके बाद कानूनी नोटिस भेजकर परिवाद दायर किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परिवादी न तो मूल विक्रय विलेख अदालत में प्रस्तुत कर सका और न ही यह स्पष्ट कर सका कि कुल सौदा कितनी राशि का था। इसके विपरीत आरोपी द्वारा पेश पंजीकृत बैनामे से यह साबित हुआ कि 41 लाख 69 हजार रुपये के सौदे का पूरा भुगतान पहले ही हो चुका था और कोई राशि शेष नहीं थी। तथ्यों के आधार पर अदालत ने परिवाद को खारिज करते हुए आरोपी सुबोध कुमार को दोषमुक्त करार दिया।
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