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Noida News: एमबीबीएस में दाखिला का झांसा देकर ठगी करने वाले दो जालसाज गिरफ्तार
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एमबीबीएस में दाखिला का झांसा देकर करोड़ों की ठगी में दो गिरफ्तार
- अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, सरगना फरार, नीट में कम रैंक लाने वालों से करते थे ठगी
नंबर
10 छात्र-छात्राओं ने अब तक की शिकायत
4 साल से कर रहे थे ठगी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नीट पास विद्यार्थियों से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का नोएडा पुलिस ने खुलासा किया है। कोतवाली सेक्टर-126 पुलिस ने गिरोह के दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। दोनों की पहचान मुजफ्फरपुर बिहार निवासी दीपक कुमार और बांदा निवासी राकेश कुमार आहूजा के रूप में हुई है। वहीं गिरोह का सरगना यश चौबे अभी फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। अभी तक 10 छात्र-छात्राओं ने ठगी की शिकायत की है। जांच में पता चला है कि आरोपी करीब चार साल से जालसाजी कर रहे थे।
नोएडा जोन के डीसीपी हरीश चंदर ने बताया कि कुछ दिन पहले लखनऊ की छात्रा से मेडिकल कॉलेज में दाखिले के नाम पर ठगी की गई थी। कोतवाली सेक्टर-126 थाने में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि आरोपियों ने सेक्टर-125 के इको टावर में ट्रूथ एडवाइजर्स करियर कंसल्टेंसी ऑफिस खोला था। यहां नीट में कम रैंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को फोन कर कंसल्टेंसी के लिए बुलाया जाता था। छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में कोटा के आधार दाखिला कराने का झांसा दिया जाता था। कोतवाली सेक्टर-126 पुलिस ने शुक्रवार को दीपक कुमार और राकेश कुमार आहूजा को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से रेंट एग्रीमेंट, आठ आधारकार्ड, नौ नए सिम, चार चेक बुक, एक डेबिट कार्ड, अर्टिगा कार और मोबाइल बरामद हुआ है। दीपक दादरी में जबकि राजेश चोटपुर कालोनी में रह रहा था। गिरोह का फरार सरगना यश चौबे ने अलग-अलग नाम से फर्जी दस्तावेज बना रखे हैं।
कई शहरों में कर चुके हैं ठगी, 60 हजार के किराये पर लिया था दफ्तर
डीसीपी हरीश चंदर ने बताया कि आरोपी कुछ महीने के लिए एक शहर में ऑफिस लेकर ठगी करने के बाद फरार हो जाते हैं। आरोपियों ने 29 अक्टूबर को सेक्टर-125 में 60 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर दफ्तर लिया था। आरोपियों ने दिल्ली के मालवीय नगर, कानपुर, लखनऊ में भी करियर कंसल्टेंसी के नाम पर ठगी की थी। पुलिस अन्य शहरों में भी दफ्तर खोल कर ठगी करने की जांच पुलिस कर रही है।
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फ्लाइट का टिकट कटा कर भेजते थे मेडिकल कॉलेज
आरोपी छात्र-छात्राओं को हवाई जहाज से दाखिले के लिए भेजते थे। छात्र-छात्राओं को उस शहर के फोर स्टार या फाइव स्टार होटल में ठहराते थे। मेडिकल कॉलेज के पास ही छात्रों को सूट-बूट में आदमी मिलता था जो खुद को मेडिकल कॉलेज का डीन या बड़ा अधिकारी बताता था। इसके बाद विश्वास दिलाकर विद्यार्थियों को वापस भेज देते थे। आरोपी छात्र छात्राओं से ठगी करने के लिए नीट परीक्षा का डेटा निकालते थे और उनसे करियर कंसल्टेंसी के नाम पर संपर्क करते थे। साथ ही कई बार सोशल मीडिया पर भी विज्ञापन देते थे।
25 से 35 लाख रुपये लेते थे फीस
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि आरोपियों ने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के रेट तय कर रखे थे। अगर कोई छात्र छात्रा दूसरे राज्य के मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेना चाहते थे तो उनके लिए 20 से 25 लाख रुपये की फीस ली जाती थी। अगर कोई अपने गृह राज्य के मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराना चाहता था तो उसके लिए 30 से 35 लाख रुपये की फीस निर्धारित थी। आरोपी एक विद्यार्थी से एक ही सिम से बात करते थे। अलग-अलग विद्यार्थियों से अलग-अलग नंबरों से बातचीत की जाती थी। रकम हासिल करते ही आरोपी सिम नष्ट कर देते थे।
13 बैंक खातों में जमा 2.80 लाख रुपये फ्रीज
नोएडा जोन के एडीसीपी आशुतोष द्विवेदी का कहना है कि आरोपियों के पास से 13 अलग अलग बैंकों के खाते मिले हैं। जो अलग अलग नाम से फर्जी तरीके से खुलवाए गए थे। इन खातों में अभी 2.80 लाख रुपये मिले हैं। जिसे पुलिस ने फ्रीज करा दिया है। पुलिस आशंका जता रही है कि सभी खातों की जांच के बाद करोड़ों रुपये के ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलेगी। गिरोह के शातिरों ने गुजरात, लखनऊ, कानपुर और राजस्थान के छात्रों के साथ अधिकतर ठगी की है।
15 दिन में हटा देते थे कर्मचारी
पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपी एक दफ्तर में दो से तीन महीने काम करते थे। ऑफिस में काम करने वाले महिला या पुरुष कर्मचारी को 10 से 15 दिन तक के लिए रखते थे। फिर पैसे देकर किसी न किसी बहाने से हटा देते थे। पुलिस का कहना है कि कर्मचारियों को कम दिन इस लिए रखते थे ताकि जालसाजी लीक न हो जाए। नोएडा वाले ऑफिस में दो महीने में आठ कर्मचारियों को इन आरोपियों ने रखा था।
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- अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, सरगना फरार, नीट में कम रैंक लाने वालों से करते थे ठगी
नंबर
10 छात्र-छात्राओं ने अब तक की शिकायत
4 साल से कर रहे थे ठगी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नीट पास विद्यार्थियों से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का नोएडा पुलिस ने खुलासा किया है। कोतवाली सेक्टर-126 पुलिस ने गिरोह के दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है। दोनों की पहचान मुजफ्फरपुर बिहार निवासी दीपक कुमार और बांदा निवासी राकेश कुमार आहूजा के रूप में हुई है। वहीं गिरोह का सरगना यश चौबे अभी फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। अभी तक 10 छात्र-छात्राओं ने ठगी की शिकायत की है। जांच में पता चला है कि आरोपी करीब चार साल से जालसाजी कर रहे थे।
नोएडा जोन के डीसीपी हरीश चंदर ने बताया कि कुछ दिन पहले लखनऊ की छात्रा से मेडिकल कॉलेज में दाखिले के नाम पर ठगी की गई थी। कोतवाली सेक्टर-126 थाने में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि आरोपियों ने सेक्टर-125 के इको टावर में ट्रूथ एडवाइजर्स करियर कंसल्टेंसी ऑफिस खोला था। यहां नीट में कम रैंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को फोन कर कंसल्टेंसी के लिए बुलाया जाता था। छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में कोटा के आधार दाखिला कराने का झांसा दिया जाता था। कोतवाली सेक्टर-126 पुलिस ने शुक्रवार को दीपक कुमार और राकेश कुमार आहूजा को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से रेंट एग्रीमेंट, आठ आधारकार्ड, नौ नए सिम, चार चेक बुक, एक डेबिट कार्ड, अर्टिगा कार और मोबाइल बरामद हुआ है। दीपक दादरी में जबकि राजेश चोटपुर कालोनी में रह रहा था। गिरोह का फरार सरगना यश चौबे ने अलग-अलग नाम से फर्जी दस्तावेज बना रखे हैं।
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कई शहरों में कर चुके हैं ठगी, 60 हजार के किराये पर लिया था दफ्तर
डीसीपी हरीश चंदर ने बताया कि आरोपी कुछ महीने के लिए एक शहर में ऑफिस लेकर ठगी करने के बाद फरार हो जाते हैं। आरोपियों ने 29 अक्टूबर को सेक्टर-125 में 60 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर दफ्तर लिया था। आरोपियों ने दिल्ली के मालवीय नगर, कानपुर, लखनऊ में भी करियर कंसल्टेंसी के नाम पर ठगी की थी। पुलिस अन्य शहरों में भी दफ्तर खोल कर ठगी करने की जांच पुलिस कर रही है।
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फ्लाइट का टिकट कटा कर भेजते थे मेडिकल कॉलेज
आरोपी छात्र-छात्राओं को हवाई जहाज से दाखिले के लिए भेजते थे। छात्र-छात्राओं को उस शहर के फोर स्टार या फाइव स्टार होटल में ठहराते थे। मेडिकल कॉलेज के पास ही छात्रों को सूट-बूट में आदमी मिलता था जो खुद को मेडिकल कॉलेज का डीन या बड़ा अधिकारी बताता था। इसके बाद विश्वास दिलाकर विद्यार्थियों को वापस भेज देते थे। आरोपी छात्र छात्राओं से ठगी करने के लिए नीट परीक्षा का डेटा निकालते थे और उनसे करियर कंसल्टेंसी के नाम पर संपर्क करते थे। साथ ही कई बार सोशल मीडिया पर भी विज्ञापन देते थे।
25 से 35 लाख रुपये लेते थे फीस
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि आरोपियों ने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के रेट तय कर रखे थे। अगर कोई छात्र छात्रा दूसरे राज्य के मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेना चाहते थे तो उनके लिए 20 से 25 लाख रुपये की फीस ली जाती थी। अगर कोई अपने गृह राज्य के मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराना चाहता था तो उसके लिए 30 से 35 लाख रुपये की फीस निर्धारित थी। आरोपी एक विद्यार्थी से एक ही सिम से बात करते थे। अलग-अलग विद्यार्थियों से अलग-अलग नंबरों से बातचीत की जाती थी। रकम हासिल करते ही आरोपी सिम नष्ट कर देते थे।
13 बैंक खातों में जमा 2.80 लाख रुपये फ्रीज
नोएडा जोन के एडीसीपी आशुतोष द्विवेदी का कहना है कि आरोपियों के पास से 13 अलग अलग बैंकों के खाते मिले हैं। जो अलग अलग नाम से फर्जी तरीके से खुलवाए गए थे। इन खातों में अभी 2.80 लाख रुपये मिले हैं। जिसे पुलिस ने फ्रीज करा दिया है। पुलिस आशंका जता रही है कि सभी खातों की जांच के बाद करोड़ों रुपये के ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलेगी। गिरोह के शातिरों ने गुजरात, लखनऊ, कानपुर और राजस्थान के छात्रों के साथ अधिकतर ठगी की है।
15 दिन में हटा देते थे कर्मचारी
पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपी एक दफ्तर में दो से तीन महीने काम करते थे। ऑफिस में काम करने वाले महिला या पुरुष कर्मचारी को 10 से 15 दिन तक के लिए रखते थे। फिर पैसे देकर किसी न किसी बहाने से हटा देते थे। पुलिस का कहना है कि कर्मचारियों को कम दिन इस लिए रखते थे ताकि जालसाजी लीक न हो जाए। नोएडा वाले ऑफिस में दो महीने में आठ कर्मचारियों को इन आरोपियों ने रखा था।