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Noida News: पॉक्सो कोर्ट से आरोपी बरी, पीड़िता और भाई गवाही में मुकरे
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(अदालत से)
-छेड़छाड़ के मामले में 10 साल बाद फैसला, कोर्ट ने कहा
-अभियोजन संदेह से परे आरोप साबित नहीं कर सका
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पॉक्सो एक्ट के मामले में अदालत ने नाबालिग से छेड़छाड़ के आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अभियोजन के अनुसार 13 अक्तूबर 2016 को स्कूल से घर लौट रही करीब 11 साल की बालिका को आरोपी जबरन एक खाली प्लाट में ले गया और उसके साथ अश्लील हरकत की। बालिका के शोर मचाने पर ग्रामीण पहुंचे और आरोपी भाग गया। बालिका के भाई की तहरीर पर थाना रबूपुरा में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विवेचक ने बालिका का बयान दर्ज कराया और आरोपी को गिरफ्तार किया था। पांच जनवरी 2017 को आरोपपत्र दाखिल हुआ था। कोर्ट ने 9 अक्तूबर 2024 को आरोप तय किए, जिन्हें आरोपी ने नकार दिया।
अभियोजन ने सिर्फ दो गवाह पेश किए, पीड़िता के भाई और स्वयं पीड़िता। भाई ने तहरीर में कहा कि उनके सामने छेड़छाड़ की कोई घटना नहीं हुई और पीड़िता ने भी उन्हें ऐसी कोई बात नहीं बताई। पीड़िता ने साफ कहा कि आरोपी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया, न उसके कपड़े उतारे और न खींचे। कोर्ट ने दोनों गवाहों को पक्षद्रोही माना और कहा कि तथ्य के किसी भी गवाह ने अभियोजन की कहानी का ऐसा समर्थन नहीं किया जिससे आरोपी का अपराध साबित हो। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन को अपना मामला स्वतंत्र रूप से संदेह से परे साबित करना होता है। इस कारण आरोपों से बरी किया।
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-छेड़छाड़ के मामले में 10 साल बाद फैसला, कोर्ट ने कहा
-अभियोजन संदेह से परे आरोप साबित नहीं कर सका
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पॉक्सो एक्ट के मामले में अदालत ने नाबालिग से छेड़छाड़ के आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अभियोजन के अनुसार 13 अक्तूबर 2016 को स्कूल से घर लौट रही करीब 11 साल की बालिका को आरोपी जबरन एक खाली प्लाट में ले गया और उसके साथ अश्लील हरकत की। बालिका के शोर मचाने पर ग्रामीण पहुंचे और आरोपी भाग गया। बालिका के भाई की तहरीर पर थाना रबूपुरा में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विवेचक ने बालिका का बयान दर्ज कराया और आरोपी को गिरफ्तार किया था। पांच जनवरी 2017 को आरोपपत्र दाखिल हुआ था। कोर्ट ने 9 अक्तूबर 2024 को आरोप तय किए, जिन्हें आरोपी ने नकार दिया।
अभियोजन ने सिर्फ दो गवाह पेश किए, पीड़िता के भाई और स्वयं पीड़िता। भाई ने तहरीर में कहा कि उनके सामने छेड़छाड़ की कोई घटना नहीं हुई और पीड़िता ने भी उन्हें ऐसी कोई बात नहीं बताई। पीड़िता ने साफ कहा कि आरोपी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया, न उसके कपड़े उतारे और न खींचे। कोर्ट ने दोनों गवाहों को पक्षद्रोही माना और कहा कि तथ्य के किसी भी गवाह ने अभियोजन की कहानी का ऐसा समर्थन नहीं किया जिससे आरोपी का अपराध साबित हो। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन को अपना मामला स्वतंत्र रूप से संदेह से परे साबित करना होता है। इस कारण आरोपों से बरी किया।
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