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Noida News: पर्थला फ्लाईओवर के नीचे एफएनजी पर अंडरपास की डीपीआर तैयार
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91 करोड़ रुपये लागत का अनुमान, आईआईटी करेगा परीक्षण
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पर्थला फ्लाईओवर के नीचे एफएनजी पर अंडरपास बनाने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो गई है। इसके निर्माण पर 91 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अब नोएडा प्राधिकरण लागत और डिजाइन के परीक्षण के लिए डीपीआर आईआईटी को भेजेगा। इसके बाद निर्माण एजेंसी के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। अंडरपास फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-121 और सेक्टर-122-123 के बीच बनेगा। यह छह लेन का और 710 मीटर लंबा होगा। इसके निर्माण से फ्लाईओवर के नीचे गोलचक्कर पर लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
पर्थला गोलचक्कर पर अंडरपास बनाने की तैयारी प्राधिकरण कई वर्षों से कर रहा है। यहां विकास मार्ग से ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ओर जाने वाले वाहनों और एफएनजी के यातायात के कारण लंबा जाम लगता है। अगस्त में प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश ने परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद डीपीआर तैयार करने का जिम्मा सलाहकार एजेंसी को सौंपा गया था। प्राधिकरण निर्माण एजेंसी को अंडरपास बनाने के लिए 18 महीने का समय देगा।
फ्लाईओवर के नीचे अंडरपास निर्माण के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर विशेष ध्यान देना होगा। प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके अरोड़ा ने बताया कि अंडरपास की डीपीआर तैयार हो गई है। इसे परीक्षण के लिए आईआईटी को भेजा जाएगा। अंडरपास का निर्माण डायाफ्राम वॉल तकनीक से होगा। इस तकनीक में खोदाई कर मिट्टी निकालने से फ्लाईओवर की मजबूती पर असर नहीं पड़ेगा।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पर्थला फ्लाईओवर के नीचे एफएनजी पर अंडरपास बनाने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो गई है। इसके निर्माण पर 91 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अब नोएडा प्राधिकरण लागत और डिजाइन के परीक्षण के लिए डीपीआर आईआईटी को भेजेगा। इसके बाद निर्माण एजेंसी के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। अंडरपास फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-121 और सेक्टर-122-123 के बीच बनेगा। यह छह लेन का और 710 मीटर लंबा होगा। इसके निर्माण से फ्लाईओवर के नीचे गोलचक्कर पर लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
पर्थला गोलचक्कर पर अंडरपास बनाने की तैयारी प्राधिकरण कई वर्षों से कर रहा है। यहां विकास मार्ग से ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ओर जाने वाले वाहनों और एफएनजी के यातायात के कारण लंबा जाम लगता है। अगस्त में प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश ने परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद डीपीआर तैयार करने का जिम्मा सलाहकार एजेंसी को सौंपा गया था। प्राधिकरण निर्माण एजेंसी को अंडरपास बनाने के लिए 18 महीने का समय देगा।
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फ्लाईओवर के नीचे अंडरपास निर्माण के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर विशेष ध्यान देना होगा। प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके अरोड़ा ने बताया कि अंडरपास की डीपीआर तैयार हो गई है। इसे परीक्षण के लिए आईआईटी को भेजा जाएगा। अंडरपास का निर्माण डायाफ्राम वॉल तकनीक से होगा। इस तकनीक में खोदाई कर मिट्टी निकालने से फ्लाईओवर की मजबूती पर असर नहीं पड़ेगा।
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