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Noida News: 85 लाख की साइबर ठगी में आरोपी को नहीं मिली जमानत
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने 85 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपी सूरज की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध तकनीकी साक्ष्य आरोपी की सक्रिय संलिप्तता दर्शाते हैं। ऐसे में अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता।
मामला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार पीड़ित को 7 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026 के बीच खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले साइबर ठगों ने फोन और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया। आरोपियों ने आधार कार्ड के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी देकर पहले 30 लाख और बाद में 55 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए थे। कुल 85 लाख रुपये की ठगी के बाद जब पीड़ित से 1.24 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की गई, तब उसे ठगी का एहसास हुआ और साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था, उसके खाते में ठगी की कोई रकम नहीं आई और उससे कोई बरामदगी भी नहीं हुई। वहीं अभियोजन ने कहा कि आरोपी ने अपने भाई की जानकारी के बिना उसके नाम पर सिम सक्रिय कर उसे ई-सिम में बदलकर विदेश में बैठे साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया। आरोपी के मोबाइल पर संबंधित ओटीपी प्राप्त हुए और उसी मोबाइल से ई-सिम रिचार्ज किया गया था। इसके एवज में आरोपी को यूपीआई और नकद के माध्यम से धनराशि मिलने के भी साक्ष्य जांच में मिले हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को जमानत देने से मना कर दिया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने 85 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपी सूरज की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध तकनीकी साक्ष्य आरोपी की सक्रिय संलिप्तता दर्शाते हैं। ऐसे में अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता।
मामला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार पीड़ित को 7 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026 के बीच खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले साइबर ठगों ने फोन और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाया। आरोपियों ने आधार कार्ड के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी देकर पहले 30 लाख और बाद में 55 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए थे। कुल 85 लाख रुपये की ठगी के बाद जब पीड़ित से 1.24 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की गई, तब उसे ठगी का एहसास हुआ और साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था, उसके खाते में ठगी की कोई रकम नहीं आई और उससे कोई बरामदगी भी नहीं हुई। वहीं अभियोजन ने कहा कि आरोपी ने अपने भाई की जानकारी के बिना उसके नाम पर सिम सक्रिय कर उसे ई-सिम में बदलकर विदेश में बैठे साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया। आरोपी के मोबाइल पर संबंधित ओटीपी प्राप्त हुए और उसी मोबाइल से ई-सिम रिचार्ज किया गया था। इसके एवज में आरोपी को यूपीआई और नकद के माध्यम से धनराशि मिलने के भी साक्ष्य जांच में मिले हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को जमानत देने से मना कर दिया।
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