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Noida News: वाहन चोरी के मामले में बीमा कंपनी करेगी क्षतिपूर्ति
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जिला उपभोक्ता आयोग
वाहन चोरी के मामले में बीमा कंपनी करेगी क्षतिपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। वाहन चोरी के मामले में बीमा कंपनी केवल सूचना देने में देरी या आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के आधार पर बीमा क्लेम खारिज नहीं कर सकती। ग्रेटर नोएडा के सुनपुरा निवासी दिनेश कुमार ने अपने बुलेरो लोडिंग वाहन का बीमा आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से 21 सितंबर 2021 को कराया था। बीमा पॉलिसी 20 सितंबर 2022 तक वैध थी। वाहन खराब होने पर उसे ठीक कराने के लिए दिनेश कुमार ने 15 मार्च 2022 को मिस्त्री सुनील की दुकान पर खड़ा किया था। मिस्त्री ने होली के बाद वाहन ठीक करके देने का भरोसा दिया था।
16 मार्च 2022 को सुनील दुकान बंद कर होली के त्योहार पर अपने घर चला गया। 19 मार्च 2022 को दिनेश कुमार को फोन पर सूचना मिली कि उनका वाहन चोरी हो गया है। वह तुरंत मिस्त्री की दुकान पर पहुंचे, लेकिन वहां वाहन नहीं मिला। उन्होंने तत्काल 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मामले में वाहन चोरी की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। तलाश के बावजूद वाहन बरामद नहीं होने पर पुलिस ने न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट (अनट्रेस्ड रिपोर्ट) दाखिल की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
इसके बाद दिनेश कुमार ने बीमा कंपनी से वाहन चोरी का क्लेम मांगा। आरोप है कि बीमा कंपनी की ओर से उनका क्लेम निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल की। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि क्लेम के निर्धारण के लिए कई आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन शिकायतकर्ता ने ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। कंपनी ने यह भी दलील दी कि वाहन चोरी की सूचना देने में देरी हुई, जिसके चलते क्लेम निरस्त किया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि वैध बीमा पॉलिसी के तहत वाहन चोरी के क्लेम को केवल एफआईआर दर्ज कराने में देरी के आधार पर खारिज करना उचित नहीं है। आयोग ने इसे बीमा कंपनी की सेवा में कमी माना।आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह पॉलिसी में घोषित वाहन की बीमित राशि पांच लाख रुपये 30 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को भुगतान करे।
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वाहन चोरी के मामले में बीमा कंपनी करेगी क्षतिपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। वाहन चोरी के मामले में बीमा कंपनी केवल सूचना देने में देरी या आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के आधार पर बीमा क्लेम खारिज नहीं कर सकती। ग्रेटर नोएडा के सुनपुरा निवासी दिनेश कुमार ने अपने बुलेरो लोडिंग वाहन का बीमा आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से 21 सितंबर 2021 को कराया था। बीमा पॉलिसी 20 सितंबर 2022 तक वैध थी। वाहन खराब होने पर उसे ठीक कराने के लिए दिनेश कुमार ने 15 मार्च 2022 को मिस्त्री सुनील की दुकान पर खड़ा किया था। मिस्त्री ने होली के बाद वाहन ठीक करके देने का भरोसा दिया था।
16 मार्च 2022 को सुनील दुकान बंद कर होली के त्योहार पर अपने घर चला गया। 19 मार्च 2022 को दिनेश कुमार को फोन पर सूचना मिली कि उनका वाहन चोरी हो गया है। वह तुरंत मिस्त्री की दुकान पर पहुंचे, लेकिन वहां वाहन नहीं मिला। उन्होंने तत्काल 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मामले में वाहन चोरी की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। तलाश के बावजूद वाहन बरामद नहीं होने पर पुलिस ने न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट (अनट्रेस्ड रिपोर्ट) दाखिल की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
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इसके बाद दिनेश कुमार ने बीमा कंपनी से वाहन चोरी का क्लेम मांगा। आरोप है कि बीमा कंपनी की ओर से उनका क्लेम निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल की। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि क्लेम के निर्धारण के लिए कई आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन शिकायतकर्ता ने ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। कंपनी ने यह भी दलील दी कि वाहन चोरी की सूचना देने में देरी हुई, जिसके चलते क्लेम निरस्त किया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने माना कि वैध बीमा पॉलिसी के तहत वाहन चोरी के क्लेम को केवल एफआईआर दर्ज कराने में देरी के आधार पर खारिज करना उचित नहीं है। आयोग ने इसे बीमा कंपनी की सेवा में कमी माना।आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह पॉलिसी में घोषित वाहन की बीमित राशि पांच लाख रुपये 30 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को भुगतान करे।
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