उफनेगी हिंडन तो किनारों पर बरपेगा कहर
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करीब दो दशक पहले तक नोएडा में हिंडन के डूब क्षेत्र पर किसी तरह का अतिक्रमण नहीं था। नदी का किनारा खेती व सब्जियों के लिए प्रयोग में लाया जाता था। जैसे-जैसे समय बीता, अवैध कॉलोनी बसाने वालों ने जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया।
फिर कालोनियां काटी जाने लगीं और लोगों ने खेती की जमीन पर अवैध तरीके से 50 से 100 वर्ग गज की जमीन पर मकान खड़े कर दिए। आलम यह है कि हिंडन पूरी तरह से सिकुड़ गई और किनारों पर मकानों का जाल फैलता चला गया।
मौसम विज्ञानियों की मानें तो इस वर्ष औसत से 6 फीसदी ज्यादा बारिश का अनुमान है। अगर पूर्वानुमान सही हो गया तो हिंडन में आने वाले उफान से किनारों पर कहर मच सकता है जिससे लाखों लोगों के प्रभावित होने का भी खतरा है।
कई गांव बसे हैं हिंडन के किनारे
नोएडा के छिजारसी, बहलोलपुर, गढ़ी चौखंडी, सोरखा, पर्थलाखंजरपुर आदि गांव हिंडन के किनारे ही बसे हैं। बाढ़ की हालत में लोगों को बचाने के लिए बांध बनाया गया है। बांध के दूसरे पार की जमीन प्राधिकरण ने अधिसूचित कर ली, लेकिन नदी और बांध के बीच का डूब क्षेत्र छोड़ दिया।
106 फीसदी बारिश का है अनुमान
इस पर ही मौका देखकर कॉलोनाइजरों ने कॉलोनी काटकर सस्ते दाम पर बेच दी और लोगों ने इस पर मकान भी बना लिए। अगर हिंडन उफनती है तो सबसे पहले इन पर ही खतरा है।
106 फीसदी बारिश का है अनुमान
मौसम विज्ञानियों का पूर्वानुमान है कि इस वर्ष दिल्ली-एनसीआर में 106 फीसदी बारिश होगी। पिछली बार मानसून में 14 फीसदी कम बारिश हुई थी। 890 मिलीमीटर बारिश को औसत मानक के रूप में तय किया गया है। पिछली बार दिल्ली-एनसीआर में 764 मिलीमीटर बारिश हुई थी। यहां मानसून के आने की संभावित तिथि 29 जून की है।
धारा से 300 मीटर तक होता है डूब क्षेत्र
नदी की बीच धारा के दोनों तरफ 300-300 मीटर की चौड़ाई में डूब क्षेत्र घोषित होता है। इस क्षेत्र में किसी तरह का निर्माण नहीं हो सकता, सिर्फ खेती की जा सकती है। छिजारसी पुल से आखिरी छोर तिलवाड़ा तक हिंडन की लंबाई करीब 28 किलोमीटर है।
इस लिहाज से हिंडन के दोनों तरफ सैकड़ों एकड़ जमीन नदी के डूब क्षेत्र के दायरे में आती हैं। नोएडा की सीमा में डूब क्षेत्र में अब खेती लायक बहुत कम जमीन बची है।
बांध खिसकाने का प्लान फिलहाल ठंडे बस्ते में
बांध खिसकाने का प्लान फिलहाल ठंडे बस्ते में
डूब क्षेत्र की जमीन को लेने के लिए प्राधिकरण कई माह से प्रयासरत है। यही नहीं बांध को भी नदी की ओर खिसकाने की योजना थी, ताकि बची हुई जमीन पर रीवर ग्रीन फ्रंट कॉरिडोर विकसित करने की योजना परवान चढ़ सके।
लेकिन फिलहाल यह योजना ठंडे बस्ते में है। इस बाबत प्राधिकरण के एसीईओ राजेश प्रकाश का कहना है कि डूब क्षेत्र में ग्रीन कॉरिडोर की योजना प्रस्तावित है। इसमें कई प्रकार की प्लानिंग की जरूरत है। आगे होने वाले विचार-विमर्श के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है।
नदियों की जमीन पर अतिक्रमण कर लिया गया है, इसलिए इसकी धारा प्रभावित हुई है। अगर अच्छी बारिश होती है तो नदी अपना रास्ता जरूर बनाएगी। फिलहाल, हिंडन पर अवैध कब्जे से इसकी धारा सिकुड़ गई है। प्रदूषण का स्तर भी बेहद खतरनाक स्तर पर है। इसे पुनर्जीवित करने के लिए किसी ने कुछ भी नहीं किया।- राजेंद्र सिंह, जल पुरुष
सिंचाई विभाग ने पहले से ही कई स्पॉट्स चिह्नित कर रखे हैं। जिला प्रशासन के पास भी इसके अलावा कई वैकल्पिक योजनाएं हैं, ताकि बाढ़ जैसे हालात में नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को बचाया जा सके और उन्हें किसी तरह की हानि न हो।- एनपी सिंह, जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर