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सीरो टेस्ट में 21 फीसदी लोगों में मिली कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी
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सीरो टेस्ट में 21 फीसदी लोगों में मिली कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी
ग्रेटर नोएडा (संदीप वर्मा)। जिम्स ने अपने स्तर से 85 लोगों पर सीरो टेस्ट किया। रिपोर्ट में 21 फीसदी से अधिक लोगों में संक्रमण से लड़ने वाली एंटीबॉडी पाई गई। 85 में से 64 लोग जिम्स के डॉक्टर, नर्स समेत अन्य मेडिकल स्टॉफ था। जबकि, 21 लोग बाहर से थे। जिम्स के 64 स्टॉफ में से केवल 10 ही लोगों में एंटी बॉडी पाई गई। संक्रमित होने के बाद इनके शरीर में अपने आप ही कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी बन गई और ये ठीक हो गए। वहीं, 21 बाहरी लोगों में से 8 के शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई गई। जिम्स निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपने स्तर से सीरो टेस्ट किया है। इसमें कोरोना से ठीक हुए 85 लोगों की जांच की गई। उन्होंने 85 में से 18 लोग पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें से 16 में एंटीबॉडी का स्तर 1.5 से अधिक था। वहीं, दो लोगों में स्तर कम था। 1.5 फीसदी से अधिक एंटीबॉडी पाए जाने पर प्लाज्मा भी दान कर सकते हैं।
यह है सीरोलॉजिकल टेस्ट
सीरोलॉजिकल जांच एक तरह का ब्लड टेस्ट है। इससे व्यक्ति के खून में मौजूद एंटीबॉडी की पहचान की जाती है। रक्त में से यदि रेड ब्लड सेल्स को निकाल दिया जाए, तो जो पीला पदार्थ बचता है, उसे सीरम कहते हैं। इस सीरम में मौजूद एंटीबॉडी से विभिन्न बीमारियों की पहचान के लिए अलग-अलग तरह के सीरोलॉजिक टेस्ट किए जाते हैं। सभी तरह के सीरोलॉजिकल टेस्ट में एक बात समान होती है कि यह प्रतिरोधक क्षमता द्वारा बनाए गए प्रोटीन पर निर्भर करते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बाहरी तत्वों द्वारा शरीर पर किए जा रहे आक्रमण को रोक कर आपको बीमार होने से बचाता है।
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ग्रेटर नोएडा (संदीप वर्मा)। जिम्स ने अपने स्तर से 85 लोगों पर सीरो टेस्ट किया। रिपोर्ट में 21 फीसदी से अधिक लोगों में संक्रमण से लड़ने वाली एंटीबॉडी पाई गई। 85 में से 64 लोग जिम्स के डॉक्टर, नर्स समेत अन्य मेडिकल स्टॉफ था। जबकि, 21 लोग बाहर से थे। जिम्स के 64 स्टॉफ में से केवल 10 ही लोगों में एंटी बॉडी पाई गई। संक्रमित होने के बाद इनके शरीर में अपने आप ही कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी बन गई और ये ठीक हो गए। वहीं, 21 बाहरी लोगों में से 8 के शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई गई। जिम्स निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपने स्तर से सीरो टेस्ट किया है। इसमें कोरोना से ठीक हुए 85 लोगों की जांच की गई। उन्होंने 85 में से 18 लोग पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें से 16 में एंटीबॉडी का स्तर 1.5 से अधिक था। वहीं, दो लोगों में स्तर कम था। 1.5 फीसदी से अधिक एंटीबॉडी पाए जाने पर प्लाज्मा भी दान कर सकते हैं।
यह है सीरोलॉजिकल टेस्ट
सीरोलॉजिकल जांच एक तरह का ब्लड टेस्ट है। इससे व्यक्ति के खून में मौजूद एंटीबॉडी की पहचान की जाती है। रक्त में से यदि रेड ब्लड सेल्स को निकाल दिया जाए, तो जो पीला पदार्थ बचता है, उसे सीरम कहते हैं। इस सीरम में मौजूद एंटीबॉडी से विभिन्न बीमारियों की पहचान के लिए अलग-अलग तरह के सीरोलॉजिक टेस्ट किए जाते हैं। सभी तरह के सीरोलॉजिकल टेस्ट में एक बात समान होती है कि यह प्रतिरोधक क्षमता द्वारा बनाए गए प्रोटीन पर निर्भर करते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बाहरी तत्वों द्वारा शरीर पर किए जा रहे आक्रमण को रोक कर आपको बीमार होने से बचाता है।
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