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--और सीएम की बात नहीं टाल पाए नेता
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...और सीएम की बात को नहीं टाल पाए किसान नेता
नोएडा (मनोज कुमार)। चिल्ला बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे भाकियू भानु के नेताओं की यूपी और केंद्र सरकार के नेताओं से पिछले सप्ताह दिल्ली में वार्ता हुई थी। इसमें रास्ता बंद करने से आम लोगों की परेशानी और कृषि कानूनों के फायदे गिनाए, लेकिन किसान नेता मानने को तैयार नहीं थे। वार्ता में मौजूद एक बड़े नेता ने भाकियू भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीधे मुख्यमंत्री से बात कराई तो सीएम की बात को टाल नहीं पाए और चिल्ला बॉर्डर को खोलने की हामी भर ली। इस पर संगठन के कई नेता नाराज हुए, लेकिन वादा निभाने के लिए रास्ता खोला और इसी के साथ 40 साल पुराने संगठन में दरार पड़ गई।
दरअसल, भाकियू भानु की ओर से कृषि कानूनों को वापस लेने समेत 15 सूत्री मांगों को लेकर धरना चल रहा है। किसान आयोग का गठन करने सहित कई मांगों को लेकर किसान संसद घेराव करने जा रहे थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने चिल्ला बॉर्डर पर आगे नहीं बढ़ने दिया। आम लोगों की परेशानी को देखते हुए दिल्ली से नोएडा आने वाली लेन को किसान पहले ही खोल चुके थे। जबकि नोएडा से दिल्ली जाने वाले मार्ग पर धरना दिए हुए थे। बीते सप्ताह पुलिस के माध्यम से रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समेत कई बडे़ नेताओं के साथ भाकियू भानु के बडे़ नेताओं की वार्ता हुई थी। किसानों की कई मांगों को मानने का आश्वासन सरकार की ओर से दिया गया था, लेकिन भाकियू भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृषि कानूनों को वापस लेने पर अडे़ हुए थे। जब बात नहीं बनी तो एक बडे़ नेता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से किसान नेता की बात करा दी थी। सीएम ने कहा किचिल्ला बॉर्डर पर लोग परेशान हो रहे हैं। इसलिए उनके लिए रास्ता खोल दिया जाए। किसान नेता सीएम बात को टाल नहीं पाए और चिल्ला बॅार्डर पर कुछ हिस्सा खोलने का वादा कर दिया। चूंकि संगठन प्रमुख अपनी बात के धनी थे और सीएम से वादा किया था तो रास्ता खोलने के लिए सहयोगियों से बात भी की।
भाकियू भानु से इस्तीफा देने वाले किसान बनाएंगे नया संगठन
चिल्ला बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान संगठन भाकियू भानु के बीच मतभेद बढ़ गए हैं और नाराज किसान अलग से नया संगठन बनाने की तैयारी में जुट गए हैं। किसान नेताओं का आरोप है कि संगठन किसी एक व्यक्ति का नहीं था बल्कि सभी ने एकजुट होकर खड़ा किया था। भाजपा नेताओं से बात होने के बाद भानु के मुख्य नेता ने संगठन के अन्य लोगों की राय नहीं ली और अपने निर्णय के अनुसार ही चिल्ला बॉर्डर को खोल दिया। जब तक चिल्ला बॉर्डर बंद था तभी तक किसानों की ताकत दिख रही थी। एक किसान नेता ने बताया कि अब किसी भी संगठन में शामिल होने की बात नहीं है। बल्कि वह पिछले 15 साल से किसानों की अगुवाई कर रहे हैं और जिले में कई बडे़ आंदोलन किए हैं। इसलिए अब किसी संगठन के साथ जुड़कर नहीं बल्कि अपना ही संगठन खड़ा किया जाएगा।
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फूट पड़ने से बन रहे हैं नए संगठन
चिल्ला बॅार्डर पर धरना दे रहे किसान संगठन में फूट पड़ गई है और दर्जनों पदाधिकारियों ने अपना रास्ता बदल लिया है। यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी आंदोलनों में इस तरह की फूट पड़ती रही है और इसी का कारण है कि आज जिले में 15 से अधिक किसान संगठन हो चुके हैं। इसी तरह एक निर्णय पर किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत से हुए मतभेद के बाद भाकियु भानु गुट का जन्म हुआ था।
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नोएडा (मनोज कुमार)। चिल्ला बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे भाकियू भानु के नेताओं की यूपी और केंद्र सरकार के नेताओं से पिछले सप्ताह दिल्ली में वार्ता हुई थी। इसमें रास्ता बंद करने से आम लोगों की परेशानी और कृषि कानूनों के फायदे गिनाए, लेकिन किसान नेता मानने को तैयार नहीं थे। वार्ता में मौजूद एक बड़े नेता ने भाकियू भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीधे मुख्यमंत्री से बात कराई तो सीएम की बात को टाल नहीं पाए और चिल्ला बॉर्डर को खोलने की हामी भर ली। इस पर संगठन के कई नेता नाराज हुए, लेकिन वादा निभाने के लिए रास्ता खोला और इसी के साथ 40 साल पुराने संगठन में दरार पड़ गई।
दरअसल, भाकियू भानु की ओर से कृषि कानूनों को वापस लेने समेत 15 सूत्री मांगों को लेकर धरना चल रहा है। किसान आयोग का गठन करने सहित कई मांगों को लेकर किसान संसद घेराव करने जा रहे थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने चिल्ला बॉर्डर पर आगे नहीं बढ़ने दिया। आम लोगों की परेशानी को देखते हुए दिल्ली से नोएडा आने वाली लेन को किसान पहले ही खोल चुके थे। जबकि नोएडा से दिल्ली जाने वाले मार्ग पर धरना दिए हुए थे। बीते सप्ताह पुलिस के माध्यम से रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समेत कई बडे़ नेताओं के साथ भाकियू भानु के बडे़ नेताओं की वार्ता हुई थी। किसानों की कई मांगों को मानने का आश्वासन सरकार की ओर से दिया गया था, लेकिन भाकियू भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृषि कानूनों को वापस लेने पर अडे़ हुए थे। जब बात नहीं बनी तो एक बडे़ नेता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से किसान नेता की बात करा दी थी। सीएम ने कहा किचिल्ला बॉर्डर पर लोग परेशान हो रहे हैं। इसलिए उनके लिए रास्ता खोल दिया जाए। किसान नेता सीएम बात को टाल नहीं पाए और चिल्ला बॅार्डर पर कुछ हिस्सा खोलने का वादा कर दिया। चूंकि संगठन प्रमुख अपनी बात के धनी थे और सीएम से वादा किया था तो रास्ता खोलने के लिए सहयोगियों से बात भी की।
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भाकियू भानु से इस्तीफा देने वाले किसान बनाएंगे नया संगठन
चिल्ला बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान संगठन भाकियू भानु के बीच मतभेद बढ़ गए हैं और नाराज किसान अलग से नया संगठन बनाने की तैयारी में जुट गए हैं। किसान नेताओं का आरोप है कि संगठन किसी एक व्यक्ति का नहीं था बल्कि सभी ने एकजुट होकर खड़ा किया था। भाजपा नेताओं से बात होने के बाद भानु के मुख्य नेता ने संगठन के अन्य लोगों की राय नहीं ली और अपने निर्णय के अनुसार ही चिल्ला बॉर्डर को खोल दिया। जब तक चिल्ला बॉर्डर बंद था तभी तक किसानों की ताकत दिख रही थी। एक किसान नेता ने बताया कि अब किसी भी संगठन में शामिल होने की बात नहीं है। बल्कि वह पिछले 15 साल से किसानों की अगुवाई कर रहे हैं और जिले में कई बडे़ आंदोलन किए हैं। इसलिए अब किसी संगठन के साथ जुड़कर नहीं बल्कि अपना ही संगठन खड़ा किया जाएगा।
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फूट पड़ने से बन रहे हैं नए संगठन
चिल्ला बॅार्डर पर धरना दे रहे किसान संगठन में फूट पड़ गई है और दर्जनों पदाधिकारियों ने अपना रास्ता बदल लिया है। यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी आंदोलनों में इस तरह की फूट पड़ती रही है और इसी का कारण है कि आज जिले में 15 से अधिक किसान संगठन हो चुके हैं। इसी तरह एक निर्णय पर किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत से हुए मतभेद के बाद भाकियु भानु गुट का जन्म हुआ था।