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Noida News: एसएससी परीक्षा में प्रॉक्सी सर्वर लगाकर नकल कराने का आरोपी गिरफ्तार
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- ग्रेनो के नॉलेज पार्क स्थित परीक्षा केंद्र पर पकड़े गए गिरोह से जुड़ा है आरोपी
92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन समेत अन्य उपरकण बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की ओर से आयोजित सीपीएफ, एसएसएफ में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और असम राइफल्स में राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह के एक और आरोपी को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) नोएडा ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान अलवर निवासी लोकेश के रूप में हुई है। आरोपी परीक्षा में इस्तेमाल होने वाली मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन तैयार कर देश के कई राज्यों में सप्लाई करता था। एसटीएफ ने उसके घर से 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन सहित बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नेटवर्किंग सामग्री और अन्य सामान बरामद किया है।
एसटीएफ नोएडा के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र ने बताया कि बृहस्पतिवार को अलवर से गिरफ्तार आरोपी 22 मई 2026 को नॉलेज पार्क क्षेत्र स्थित बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर पकड़े गए हाईटेक नकल गिरोह का से जुड़ा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। अहम है कि एसटीएफ ने 22 मई को नॉलेज पार्क क्षेत्र में स्थित परीक्षा केंद्र पर एसएससी की ऑनलाइन परीक्षा के दौरान प्रॉक्सी सर्वर लगाकर और सर्वर हैक कर अभ्यर्थियों से नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस समय गिरोह के सरगना एवं सेंटर संचालक प्रदीप चौहान, हैकर अमित राणा समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से लगभग 50 लाख रुपये नकद, प्रॉक्सी सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए थे।
इस मामले में थाना नॉलेज पार्क में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं, आईटी एक्ट और भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना एसटीएफ गौतमबुद्धनगर द्वारा की जा रही है।
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पूछताछ में सामने आया लोकेश का नाम
गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि परीक्षा में इस्तेमाल की गई मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन अलवर निवासी लोकेश ने उपलब्ध कराई थी। एसटीएफ की फील्ड यूनिट लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी की निशानदेही पर उसके घर की तलाशी के दौरान उपकरण बरामद किए गए।
यह उपकरण हुए बरामद
एसटीएफ ने आरोपी के घर से 63 तैयार मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन, 20 अधूरी टीएफटी स्क्रीन और नौ खुली स्क्रीन यानी कुल 92 टीएफटी स्क्रीन बरामद की हैं। इसके अलावा 45 वीजीए कार्ड, 20 वीजीए टू एचडीएमआई कार्ड, 15 टाइप-सी केबल, 14 रास्पबेरी-पाई डिवाइस, 12 मेमोरी कार्ड, 10 यूएसबी टू यूएसबी केबल, पांच वीजीए स्विच, सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया गया। इन उपकरणों का उपयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने के लिए किया जाता था।
2017 से सीख लिया था मॉडिफाइड स्क्रीन बनाना
पुलिस पूछताछ में बीए पास आरोपी ने बताया कि वर्ष 2013 में अलवर से कंप्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग का छह माह का कोर्स किया था। इसके बाद उसने मानसी इन्फोटेक के नाम से दुकान शुरू की। वर्ष 2017 के दौरान वह कई लैब में सीसीटीवी और नेटवर्किंग का काम करता था। इसी दौरान हरियाणा के एक व्यक्ति ने उसे मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन का नमूना दिया और इसे तैयार करना सिखाया। इसके बाद उसने इस तकनीक में महारत हासिल कर सप्लाई करने लगा।
एक स्क्रीन तैयार करने में 40 हजार का खर्च
आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया कि मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन तैयार करने में लगभग 40 हजार रुपये का खर्च आता है। इसके लिए वह अलग-अलग लोगों के खातों में पैसे मंगवाता था। तैयार स्क्रीन की सप्लाई के बदले वह प्रति टीएफटी करीब पांच हजार रुपये अलग से लेता था। एसटीएफ अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने राज्यों में ऐसी स्क्रीन भेजी हैं और उसके नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
ऐसे होती थी हाईटेक नकल
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि बाहर से देखने पर यह मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन सामान्य कंप्यूटर स्क्रीन जैसी दिखाई देती थी, जिससे किसी को शक नहीं होता था। परीक्षा केंद्रों पर मिलीभगत से इन्हें सामान्य स्क्रीन की जगह लगाया जाता था। परीक्षा शुरू होते ही स्क्रीन पर दिखाई देने वाला पूरा कंटेंट वाई-फाई डोंगल और विशेष नेटवर्किंग सिस्टम की मदद से परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद दूसरे सिस्टम पर लाइव स्ट्रीम कर दिया जाता था। बाहर बैठा सॉल्वर प्रश्नपत्र हल करता था और उसके उत्तर वापस अभ्यर्थी तक पहुंचा दिए जाते थे। इस पूरी प्रक्रिया में राउटर, रास्पबेरी-पाई, वाई-फाई डोंगल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था। पूरी व्यवस्था इतनी गोपनीय होती थी कि परीक्षा केंद्र पर मौजूद सामान्य कर्मचारी या अभ्यर्थी इसकी भनक तक नहीं लगा पाते थे।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क खंगाल रही एसटीएफ:
एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर अन्य सहयोगियों और ऐसे परीक्षा केंद्रों की जानकारी जुटाई जा रही है। जहां इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन-किन प्रतियोगी परीक्षाओं में इस गिरोह ने सेंध लगाने का प्रयास किया।
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92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन समेत अन्य उपरकण बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की ओर से आयोजित सीपीएफ, एसएसएफ में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और असम राइफल्स में राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह के एक और आरोपी को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) नोएडा ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान अलवर निवासी लोकेश के रूप में हुई है। आरोपी परीक्षा में इस्तेमाल होने वाली मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन तैयार कर देश के कई राज्यों में सप्लाई करता था। एसटीएफ ने उसके घर से 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन सहित बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नेटवर्किंग सामग्री और अन्य सामान बरामद किया है।
एसटीएफ नोएडा के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र ने बताया कि बृहस्पतिवार को अलवर से गिरफ्तार आरोपी 22 मई 2026 को नॉलेज पार्क क्षेत्र स्थित बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर पकड़े गए हाईटेक नकल गिरोह का से जुड़ा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। अहम है कि एसटीएफ ने 22 मई को नॉलेज पार्क क्षेत्र में स्थित परीक्षा केंद्र पर एसएससी की ऑनलाइन परीक्षा के दौरान प्रॉक्सी सर्वर लगाकर और सर्वर हैक कर अभ्यर्थियों से नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस समय गिरोह के सरगना एवं सेंटर संचालक प्रदीप चौहान, हैकर अमित राणा समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से लगभग 50 लाख रुपये नकद, प्रॉक्सी सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए थे।
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इस मामले में थाना नॉलेज पार्क में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं, आईटी एक्ट और भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना एसटीएफ गौतमबुद्धनगर द्वारा की जा रही है।
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पूछताछ में सामने आया लोकेश का नाम
गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि परीक्षा में इस्तेमाल की गई मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन अलवर निवासी लोकेश ने उपलब्ध कराई थी। एसटीएफ की फील्ड यूनिट लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी की निशानदेही पर उसके घर की तलाशी के दौरान उपकरण बरामद किए गए।
यह उपकरण हुए बरामद
एसटीएफ ने आरोपी के घर से 63 तैयार मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन, 20 अधूरी टीएफटी स्क्रीन और नौ खुली स्क्रीन यानी कुल 92 टीएफटी स्क्रीन बरामद की हैं। इसके अलावा 45 वीजीए कार्ड, 20 वीजीए टू एचडीएमआई कार्ड, 15 टाइप-सी केबल, 14 रास्पबेरी-पाई डिवाइस, 12 मेमोरी कार्ड, 10 यूएसबी टू यूएसबी केबल, पांच वीजीए स्विच, सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया गया। इन उपकरणों का उपयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने के लिए किया जाता था।
2017 से सीख लिया था मॉडिफाइड स्क्रीन बनाना
पुलिस पूछताछ में बीए पास आरोपी ने बताया कि वर्ष 2013 में अलवर से कंप्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग का छह माह का कोर्स किया था। इसके बाद उसने मानसी इन्फोटेक के नाम से दुकान शुरू की। वर्ष 2017 के दौरान वह कई लैब में सीसीटीवी और नेटवर्किंग का काम करता था। इसी दौरान हरियाणा के एक व्यक्ति ने उसे मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन का नमूना दिया और इसे तैयार करना सिखाया। इसके बाद उसने इस तकनीक में महारत हासिल कर सप्लाई करने लगा।
एक स्क्रीन तैयार करने में 40 हजार का खर्च
आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया कि मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन तैयार करने में लगभग 40 हजार रुपये का खर्च आता है। इसके लिए वह अलग-अलग लोगों के खातों में पैसे मंगवाता था। तैयार स्क्रीन की सप्लाई के बदले वह प्रति टीएफटी करीब पांच हजार रुपये अलग से लेता था। एसटीएफ अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने राज्यों में ऐसी स्क्रीन भेजी हैं और उसके नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
ऐसे होती थी हाईटेक नकल
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि बाहर से देखने पर यह मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन सामान्य कंप्यूटर स्क्रीन जैसी दिखाई देती थी, जिससे किसी को शक नहीं होता था। परीक्षा केंद्रों पर मिलीभगत से इन्हें सामान्य स्क्रीन की जगह लगाया जाता था। परीक्षा शुरू होते ही स्क्रीन पर दिखाई देने वाला पूरा कंटेंट वाई-फाई डोंगल और विशेष नेटवर्किंग सिस्टम की मदद से परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद दूसरे सिस्टम पर लाइव स्ट्रीम कर दिया जाता था। बाहर बैठा सॉल्वर प्रश्नपत्र हल करता था और उसके उत्तर वापस अभ्यर्थी तक पहुंचा दिए जाते थे। इस पूरी प्रक्रिया में राउटर, रास्पबेरी-पाई, वाई-फाई डोंगल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था। पूरी व्यवस्था इतनी गोपनीय होती थी कि परीक्षा केंद्र पर मौजूद सामान्य कर्मचारी या अभ्यर्थी इसकी भनक तक नहीं लगा पाते थे।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क खंगाल रही एसटीएफ:
एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर अन्य सहयोगियों और ऐसे परीक्षा केंद्रों की जानकारी जुटाई जा रही है। जहां इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन-किन प्रतियोगी परीक्षाओं में इस गिरोह ने सेंध लगाने का प्रयास किया।