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फर्जी फर्म बनाकर 9.77 लाख की टैक् स चोरी
Updated Fri, 23 Nov 2018 06:15 AM IST
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हेडिंग: फर्जी फर्म बनाकर 9.77 लाख की जीएसटी चोरी
वाणिज्य कर विभाग ने नोएडा की दो फर्मों का किया खुलासा
फर्जी बिलों के आधार पर आईटीसी क्लेम करने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। फर्जी कंपनियों के जरिये जीएसटी की चोरी करने वाला सिंडिकेट अब भी सक्रिय है। नोएडा में ऐसी दो फर्मों का खुलासा वाणिज्य कर विभाग ने किया है। इनमें से एक फर्म ने 54.31 लाख रुपये का कारोबार सिर्फ कागजों में कर डाला। फर्जी बिलों के आधार पर फर्म ने 9.77 लाख रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम कर जीएसटी की चोरी की है। वहीं, दूसरी फर्म का पंजीयन भी फर्जी पाया गया है। विभाग ने दोनों ही कंपनियों का पंजीयन निरस्त करते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
वाणिज्य कर आयुक्त कामिनी रतन चौहान ने मासिक बैठक के दौरान फर्जी कंपनियों पर शिकंजा कसने के सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। नोएडा की विशेष अनुसंधान शाखा के अतिरिक्त आयुक्त धर्मेंद्र सिंह ने गोपनीय सूचना के आधार पर नोएडा की सर्वश्री ऋद्घी ट्रेडिंग सेक्टर-132 व यूनिक इंटरप्राइजेज सेक्टर-127 की जांच का जिम्मा संभाग-बी के संयुक्त आयुक्त एमपी सिंह को सौंपा था। जांच के दौरान पाया गया कि जीएसटी पंजीयन के दौरान जो पता दिया था, उस पते पर कोई फर्म मिली ही नहीं। ऋद्घी ट्रेडिंग के नाम से कागजों में चल रही फर्म ने दिल्ली की फर्मों से 54.31 लाख रुपये के माल की खरीद दिखाई और दिल्ली की ही फर्मों को बिक्री दिखाते हुए 9.77 लाख रुपये आईटीसी क्लेम कर दी। वहीं, यूनिक इंटरप्राइजेज नाम की फर्म के पंजीयन के दौरान लगाए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए।
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दोनों ही फर्म अस्तित्व में नहीं पाई गईं। जांच के दौरान न व्यापार स्थल मिला, न गोदाम मिला और न ही माल का स्टॉक पाया गया। विभाग की तरफ से विधिक कार्रवाई के लिए जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। इस मामले से लखनऊ स्थित मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है।
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- चंद्रशेखर वर्मा, उपायुक्त-एसआईबी संभाग-बी
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1 हजार से ज्यादा कंपनियां रडार पर
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, फर्जी कंपनियों और बिलिंग के आधार पर सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचा रही 1 हजार से ज्यादा कंपनियां रडार पर हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस तरह का सिंडिकेट सक्रिय है। गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ के साथ दिल्ली में भी फर्जी बिलों के जरिये टैक्स चोरी की आशंका है। जांच जारी है, इस तरह के और भी खुलासे आने वाले दिनों में हो सकते हैं।
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वाणिज्य कर विभाग ने नोएडा की दो फर्मों का किया खुलासा
फर्जी बिलों के आधार पर आईटीसी क्लेम करने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। फर्जी कंपनियों के जरिये जीएसटी की चोरी करने वाला सिंडिकेट अब भी सक्रिय है। नोएडा में ऐसी दो फर्मों का खुलासा वाणिज्य कर विभाग ने किया है। इनमें से एक फर्म ने 54.31 लाख रुपये का कारोबार सिर्फ कागजों में कर डाला। फर्जी बिलों के आधार पर फर्म ने 9.77 लाख रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम कर जीएसटी की चोरी की है। वहीं, दूसरी फर्म का पंजीयन भी फर्जी पाया गया है। विभाग ने दोनों ही कंपनियों का पंजीयन निरस्त करते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
वाणिज्य कर आयुक्त कामिनी रतन चौहान ने मासिक बैठक के दौरान फर्जी कंपनियों पर शिकंजा कसने के सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। नोएडा की विशेष अनुसंधान शाखा के अतिरिक्त आयुक्त धर्मेंद्र सिंह ने गोपनीय सूचना के आधार पर नोएडा की सर्वश्री ऋद्घी ट्रेडिंग सेक्टर-132 व यूनिक इंटरप्राइजेज सेक्टर-127 की जांच का जिम्मा संभाग-बी के संयुक्त आयुक्त एमपी सिंह को सौंपा था। जांच के दौरान पाया गया कि जीएसटी पंजीयन के दौरान जो पता दिया था, उस पते पर कोई फर्म मिली ही नहीं। ऋद्घी ट्रेडिंग के नाम से कागजों में चल रही फर्म ने दिल्ली की फर्मों से 54.31 लाख रुपये के माल की खरीद दिखाई और दिल्ली की ही फर्मों को बिक्री दिखाते हुए 9.77 लाख रुपये आईटीसी क्लेम कर दी। वहीं, यूनिक इंटरप्राइजेज नाम की फर्म के पंजीयन के दौरान लगाए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए।
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दोनों ही फर्म अस्तित्व में नहीं पाई गईं। जांच के दौरान न व्यापार स्थल मिला, न गोदाम मिला और न ही माल का स्टॉक पाया गया। विभाग की तरफ से विधिक कार्रवाई के लिए जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। इस मामले से लखनऊ स्थित मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है।
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- चंद्रशेखर वर्मा, उपायुक्त-एसआईबी संभाग-बी
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1 हजार से ज्यादा कंपनियां रडार पर
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, फर्जी कंपनियों और बिलिंग के आधार पर सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचा रही 1 हजार से ज्यादा कंपनियां रडार पर हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस तरह का सिंडिकेट सक्रिय है। गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ के साथ दिल्ली में भी फर्जी बिलों के जरिये टैक्स चोरी की आशंका है। जांच जारी है, इस तरह के और भी खुलासे आने वाले दिनों में हो सकते हैं।