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बड़े वकील-Business
Updated Sat, 23 Sep 2017 09:15 PM IST
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बड़े वकील टैक्सी की तरह हर घंटे के हिसाब
से करते हैं चार्ज: विधि आयोग चेयरमैन
बोले, मुकदमा लड़ना इतना खर्चीला है कि वह भी पैरवी के लिए बड़े वकील नहीं कर सकते
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विधि आयोग के चेयरमैन जस्टिस बीएस चौहान ने कहा है कि भारतीय कानून व्यवस्था इतनी जटिल और खर्चीली है कि गरीब लोगों की न्याय तक पहुंच ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मुकदमा लड़ना इतना खर्चीला है कि वह भी अपनी पैरवी के लिए बड़े वकील नहीं कर सकते। जस्टिस चौहान ने कहा है कि बड़े वकील टैक्सी की तरह घंटे और दिन के हिसाब से मुवक्किलों से फीस वसूलते हैं।
जस्टिस चौहान ने कहा कि जमानत की शर्तों इतनी जटिल होती है कि गरीब व्यक्ति को वकील न मिले तो वह जेल से बाहर ही नहीं आएगा और उसे पूरी सजा जेल में काटनी पड़ती है। वहीं अमीरों को जमानत एडवांस में मिल जाता है। उन्होंने कहा कि सवाल यह उठता है कि आखिर हमारा लीगल सिस्टम और जमानत की शर्तों में इतनी जटिलता क्यों है। जस्टिस चौहान कैदियों केअधिकारों से संबंधित एक सेमिनार में बोल रहे थे।
जस्टिस चौहान ने अमीर और गरीब लोगों की न्याय तक पहुंच में भेदभाव के लिए बड़े वकीलों को जिम्मेदार बताया। बड़े वकील बड़े से बड़े अपराध में बचाव कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं सुप्रीम कोर्ट के जज पद से रिटायर हुआ हूं। अगर मुझे मुकदमा लड़ना हो तो मैं पैरवी के लिए बड़े वकीलों की सेवा नहीं ले सकता। बड़े वकील बहुत महंगे हैं। वे टैक्सियों की तरह हर घंटे और हर दिन केहिसाब से चार्ज करते हैं।
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जस्टिस चौहान ने इस बात की भी वकालत की कि स्थानीय अदालतों में अंग्रेजी की बजाय क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे कि गरीब लोगों अदालती कार्यवाही को समझ सकें। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में बहस करने केपीछे वजह यह भी होती है कि उनके गरीब मुवक्किलों अदालती कार्यवाही को न समझ सकें।
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बड़े वकील टैक्सी की तरह हर घंटे के हिसाब
से करते हैं चार्ज: विधि आयोग चेयरमैन
बोले, मुकदमा लड़ना इतना खर्चीला है कि वह भी पैरवी के लिए बड़े वकील नहीं कर सकते
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विधि आयोग के चेयरमैन जस्टिस बीएस चौहान ने कहा है कि भारतीय कानून व्यवस्था इतनी जटिल और खर्चीली है कि गरीब लोगों की न्याय तक पहुंच ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मुकदमा लड़ना इतना खर्चीला है कि वह भी अपनी पैरवी के लिए बड़े वकील नहीं कर सकते। जस्टिस चौहान ने कहा है कि बड़े वकील टैक्सी की तरह घंटे और दिन के हिसाब से मुवक्किलों से फीस वसूलते हैं।
जस्टिस चौहान ने कहा कि जमानत की शर्तों इतनी जटिल होती है कि गरीब व्यक्ति को वकील न मिले तो वह जेल से बाहर ही नहीं आएगा और उसे पूरी सजा जेल में काटनी पड़ती है। वहीं अमीरों को जमानत एडवांस में मिल जाता है। उन्होंने कहा कि सवाल यह उठता है कि आखिर हमारा लीगल सिस्टम और जमानत की शर्तों में इतनी जटिलता क्यों है। जस्टिस चौहान कैदियों केअधिकारों से संबंधित एक सेमिनार में बोल रहे थे।
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जस्टिस चौहान ने अमीर और गरीब लोगों की न्याय तक पहुंच में भेदभाव के लिए बड़े वकीलों को जिम्मेदार बताया। बड़े वकील बड़े से बड़े अपराध में बचाव कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं सुप्रीम कोर्ट के जज पद से रिटायर हुआ हूं। अगर मुझे मुकदमा लड़ना हो तो मैं पैरवी के लिए बड़े वकीलों की सेवा नहीं ले सकता। बड़े वकील बहुत महंगे हैं। वे टैक्सियों की तरह हर घंटे और हर दिन केहिसाब से चार्ज करते हैं।
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जस्टिस चौहान ने इस बात की भी वकालत की कि स्थानीय अदालतों में अंग्रेजी की बजाय क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे कि गरीब लोगों अदालती कार्यवाही को समझ सकें। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में बहस करने केपीछे वजह यह भी होती है कि उनके गरीब मुवक्किलों अदालती कार्यवाही को न समझ सकें।