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चरखा चलाने से व्यक्तित्व का विकास होता है: बीबीआरएफआई
Updated Mon, 19 Nov 2018 12:00 AM IST
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चरखा चलाने से होता व्यक्तित्व का विकास
बीबीआरएफआई ने गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सहयोग से किए शोध में किया दावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। महात्मा गांधी के 150वीं जयंती वर्ष में देश दुनिया के सामने एक अनोखा शोध सामने आया है। इसमें बताया गया है कि चरखा चलाने से व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। उसकी एकाग्रता बढ़ती है। उसके आपसी एवं सामाजिक जीवन बेहतर बनते हैं। इन तमाम निष्कर्षों का दावा ब्रेन बिहैवियर रिसर्च फाउंडेशन ऑफ इंडिया (बीबीआरएफआई) ने गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सहयोग से किए अपने शोध में किया है।
रविवार को नई दिल्ली के राजघाट स्थित सत्याग्रह मंडप में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘ब्रेन बिहैवियर- माइंड मैटर्स’ पत्रिका का लोकार्पण हुआ। बीबीआरएफआई की अध्यक्षा डॉ. मीना मिश्रा ने बताया कि इस शोध का मुख्य उद्देश्य चरखा की प्रासंगिकता को वैज्ञानिक मापदंडों की कसौटी पर कसना है। शोध के परिणाम बहुत ही सार्थक रहे हैं। इससे चरखा की जरूरत को देश-दुनिया और भी वैज्ञानिक तरीके से समझ पाएगी। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2018 से अक्टूबर 2018 के बीच यह शोध किया गया। इसमें प्री और पोस्ट एक्सपेरिमेंटल मैथड का इस्तेमाल किया गया है। सीमित सैंपल के दो रुप हमने अध्ययन के लिए लिया। एक रुप को रोज चरखा चलाना था, दूसरे रुप को कुछ नहीं करना था। अध्ययन शुरू करने से पहले इनके कुछ मनोवैज्ञानिक पैरामीटर जैसे एकाग्र होने की क्षमता, याद्दाश्त, मस्तिष्क की तरंगों का डेटा लिया गया। फिर दोबारा इसी तरह हमने एक महीने तक चरखा चलवाने के पश्चात, इसका असर जानने के लिए पोस्ट टेस्ट करके डेटा एकत्रित किए। इस रुप का भी प्री एंड पोस्ट डेटा लिया, जिससे कुछ नहीं करवाया गया था। दोनों की तुलना कर चरखा चलाने वाले और न चलाने वाले ग्रुप के बीच के फर्क का डेटा इकट्ठा किया गया।
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बीबीआरएफआई ने गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सहयोग से किए शोध में किया दावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। महात्मा गांधी के 150वीं जयंती वर्ष में देश दुनिया के सामने एक अनोखा शोध सामने आया है। इसमें बताया गया है कि चरखा चलाने से व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। उसकी एकाग्रता बढ़ती है। उसके आपसी एवं सामाजिक जीवन बेहतर बनते हैं। इन तमाम निष्कर्षों का दावा ब्रेन बिहैवियर रिसर्च फाउंडेशन ऑफ इंडिया (बीबीआरएफआई) ने गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सहयोग से किए अपने शोध में किया है।
रविवार को नई दिल्ली के राजघाट स्थित सत्याग्रह मंडप में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘ब्रेन बिहैवियर- माइंड मैटर्स’ पत्रिका का लोकार्पण हुआ। बीबीआरएफआई की अध्यक्षा डॉ. मीना मिश्रा ने बताया कि इस शोध का मुख्य उद्देश्य चरखा की प्रासंगिकता को वैज्ञानिक मापदंडों की कसौटी पर कसना है। शोध के परिणाम बहुत ही सार्थक रहे हैं। इससे चरखा की जरूरत को देश-दुनिया और भी वैज्ञानिक तरीके से समझ पाएगी। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2018 से अक्टूबर 2018 के बीच यह शोध किया गया। इसमें प्री और पोस्ट एक्सपेरिमेंटल मैथड का इस्तेमाल किया गया है। सीमित सैंपल के दो रुप हमने अध्ययन के लिए लिया। एक रुप को रोज चरखा चलाना था, दूसरे रुप को कुछ नहीं करना था। अध्ययन शुरू करने से पहले इनके कुछ मनोवैज्ञानिक पैरामीटर जैसे एकाग्र होने की क्षमता, याद्दाश्त, मस्तिष्क की तरंगों का डेटा लिया गया। फिर दोबारा इसी तरह हमने एक महीने तक चरखा चलवाने के पश्चात, इसका असर जानने के लिए पोस्ट टेस्ट करके डेटा एकत्रित किए। इस रुप का भी प्री एंड पोस्ट डेटा लिया, जिससे कुछ नहीं करवाया गया था। दोनों की तुलना कर चरखा चलाने वाले और न चलाने वाले ग्रुप के बीच के फर्क का डेटा इकट्ठा किया गया।
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