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पत्नी की हत्या के आरोप में पति को आजीवन कारावास
Updated Wed, 17 Oct 2018 04:52 AM IST
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पत्नी की हत्या के आरोप में पति को आजीवन कारावास
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । अदालत ने पत्नी की हत्या के मामले में पति को आजीवन कारावास और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरिंदर कुमार शर्मा ने कहा कि घटना की परिस्थितियों के मद्देनजर बिहार निवासी आरोपी राकेश कुमार श्रीवास्तव ने ही अपनी पत्नी निहारिका की हत्या की है। इससे पहले अभियोजन पक्ष के वकील गौरव पांडेय और संजय कुमार सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट से साफ हुआ कि निहारिका की मौत अप्राकृतिक तरीके से हुई। जब महिला की मौत हुई उस वक्त उसका पति भी घर पर मौजूद था। इस बीच निहारिका के पिता ने बयान दिया कि निहारिका की शादी 2008 में राकेश से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के कुछ दिन बाद ही उसके पति ने उसपर दहेज लाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था। उसने प्लॉट खरीदने के लिए 5-6 लाख रुपए की मांग की थी और मांग पूरी न होने पर निहारिका को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि निहारिका की मौत के बारे भी उसके पति ने ही फोन करके सूचना दी थी, जिसके बाद उसे बेहोश हालत में नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इस मामले में कोर्ट ने स्पष्ट न होने की स्थित में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए और 304बी के आरोपों को रद्द कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । अदालत ने पत्नी की हत्या के मामले में पति को आजीवन कारावास और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरिंदर कुमार शर्मा ने कहा कि घटना की परिस्थितियों के मद्देनजर बिहार निवासी आरोपी राकेश कुमार श्रीवास्तव ने ही अपनी पत्नी निहारिका की हत्या की है। इससे पहले अभियोजन पक्ष के वकील गौरव पांडेय और संजय कुमार सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट से साफ हुआ कि निहारिका की मौत अप्राकृतिक तरीके से हुई। जब महिला की मौत हुई उस वक्त उसका पति भी घर पर मौजूद था। इस बीच निहारिका के पिता ने बयान दिया कि निहारिका की शादी 2008 में राकेश से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के कुछ दिन बाद ही उसके पति ने उसपर दहेज लाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था। उसने प्लॉट खरीदने के लिए 5-6 लाख रुपए की मांग की थी और मांग पूरी न होने पर निहारिका को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि निहारिका की मौत के बारे भी उसके पति ने ही फोन करके सूचना दी थी, जिसके बाद उसे बेहोश हालत में नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इस मामले में कोर्ट ने स्पष्ट न होने की स्थित में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए और 304बी के आरोपों को रद्द कर दिया।