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तीन तलाक अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
Updated Fri, 28 Sep 2018 10:16 PM IST
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तीन तलाक अध्यादेश को चुनौती
देने वाली याचिका खारिज
- हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने तीन तलाक पर जारी अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। याचिका में केंद्र सरकार के 19 सितंबर को जारी अध्यादेश को असंवैधानिक ठहराने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक कह दिया तो वह असंवैधानिक है। इसके बाद ही सरकार ने अध्यादेश जारी किया है। इसलिए याचिका को खारिज किया जाता है।
अध्यादेश को अधिवक्ता शाहिद आजाद ने चुनौती देते हुए याचिका में कहा था कि तलाक को लेकर सरकार का विधेयक लोकसभा से पारित हो गया है, लेकिन वह राज्यसभा से पास नहीं हुआ है। अध्यादेश में कई विरोधाभासी बातें कही गई हैं। यह आपराधिक कानून के अनुसार भी नहीं है। याची ने कहा कि सरकार ने मुस्लिम कानून को समझे बिना यह विधेयक संसद में पेश किया। इस दशा में सरकार को इस मुद्दे पर अध्यादेश लाने की जरूरत नहीं थी। ऐसा करके सरकार ने अधिकार का दुरुपयोग किया है। यह अध्यादेश असंवैधानिक है। इसे निरस्त कर दिया जाए।
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देने वाली याचिका खारिज
- हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने तीन तलाक पर जारी अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। याचिका में केंद्र सरकार के 19 सितंबर को जारी अध्यादेश को असंवैधानिक ठहराने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक कह दिया तो वह असंवैधानिक है। इसके बाद ही सरकार ने अध्यादेश जारी किया है। इसलिए याचिका को खारिज किया जाता है।
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अध्यादेश को अधिवक्ता शाहिद आजाद ने चुनौती देते हुए याचिका में कहा था कि तलाक को लेकर सरकार का विधेयक लोकसभा से पारित हो गया है, लेकिन वह राज्यसभा से पास नहीं हुआ है। अध्यादेश में कई विरोधाभासी बातें कही गई हैं। यह आपराधिक कानून के अनुसार भी नहीं है। याची ने कहा कि सरकार ने मुस्लिम कानून को समझे बिना यह विधेयक संसद में पेश किया। इस दशा में सरकार को इस मुद्दे पर अध्यादेश लाने की जरूरत नहीं थी। ऐसा करके सरकार ने अधिकार का दुरुपयोग किया है। यह अध्यादेश असंवैधानिक है। इसे निरस्त कर दिया जाए।
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