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दो बच्चों के कानून पर शुरू हुआ विरोध, सांसदों को लिखा पत्र
Updated Wed, 22 Aug 2018 11:00 PM IST
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दो बच्चों के कानून का विरोध, सांसदों को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । कुछ दिन पहले दो बच्चों से संबंधित राष्ट्र नीति को जल्द लागू कराने के लिए देश के 125 सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक याचिका सौंपी थी। इसके बाद इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। सांसदों की इस मांग के खिलाफ देश के विभिन्न संगठनों ने आपत्ति जताई है। देश में परिवार नियोजन को लेकर कार्य कर रहे एनजीओ के संगठन एआरसी का कहना है कि इस तरह का कानून लागू होता है तो ये मौलिक मानवाधिकारों का हनन होगा।
उन्होंने सभी सांसदों को पत्र लिखकर मांग की है कि इस तरह के कानून को लागू करने पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए। पत्र में संगठन ने लिखा है कि दो बच्चों की नीति सबसे कमजोर है। उन्होंने ये भी कहा कि दो बच्चों की नीति के कारण हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में लिंगानुपात की स्थिति बेहद खराब है। वहां पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या काफी घटी है। उनका कहना है कि जनसंख्या वृद्धि एक सामाजिक आर्थिक समस्या है। इसका उपाय भी अलग तरह से निकालना चाहिए न कि दो बच्चे जैसी नीति को लागू करके।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । कुछ दिन पहले दो बच्चों से संबंधित राष्ट्र नीति को जल्द लागू कराने के लिए देश के 125 सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक याचिका सौंपी थी। इसके बाद इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। सांसदों की इस मांग के खिलाफ देश के विभिन्न संगठनों ने आपत्ति जताई है। देश में परिवार नियोजन को लेकर कार्य कर रहे एनजीओ के संगठन एआरसी का कहना है कि इस तरह का कानून लागू होता है तो ये मौलिक मानवाधिकारों का हनन होगा।
उन्होंने सभी सांसदों को पत्र लिखकर मांग की है कि इस तरह के कानून को लागू करने पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए। पत्र में संगठन ने लिखा है कि दो बच्चों की नीति सबसे कमजोर है। उन्होंने ये भी कहा कि दो बच्चों की नीति के कारण हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में लिंगानुपात की स्थिति बेहद खराब है। वहां पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या काफी घटी है। उनका कहना है कि जनसंख्या वृद्धि एक सामाजिक आर्थिक समस्या है। इसका उपाय भी अलग तरह से निकालना चाहिए न कि दो बच्चे जैसी नीति को लागू करके।
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