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राजधानी में डीटीसी और क्लस्टर बसों का बढ़ा आतंक
Updated Sun, 19 Aug 2018 09:52 PM IST
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डीटीसी और क्लस्टर बस चालकों की मनमानी जान पर भारी
-ओवरटेक करने के लिए निर्धारित रूट से उतारी जा रही बसें
-तेज रफ्तार बसों से हादसों को दिया जा रहा अंजाम
अरुण कुमार
नई दिल्ली। राजधानी में बसों की किल्लत के चलते यात्री पहले से ही बेहाल हैं। ऐसे हालात में आजकल डीटीसी और क्लस्टर बस चालकों की मनमानी यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। आलम यह है कि खुलेआम बसों को उनके रूट से उतारकर शॉर्टकट लिए जा रहे हैं। बस स्टॉप पर बसों को रोका नहीं जा रहा, खुले पैसों के नाम पर ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। और तो और बसों के किमी पूरे करने के लिए बसों को तेज रफ्तार में दौड़ाकर यात्रियों की जान खतरे में डाली जा रही है।
बस चालकों की मनमानी के खिलाफ यात्री डीटीसी और क्लस्टर बसों के शिकायत संपर्क नंबर पर कॉल भी करते हैं, लेकिन फिर भी उनकी शिकायत नहीं सुनी जाती। इसके साथ ही स्थिति ऐसी बनी हुई है कि डीटीसी और क्लस्टर बस विभाग द्वारा भी मनमानी करने वाले चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
- बुजुर्ग यात्रियों को लगता है डर
60 वर्षीय सरोजिनी दत्ता ने बताया कि वह करोल बाग इलाके में रहती हैं और आने-जाने के लिए बसों पर निर्भर हैं। स्टैंड पर काफी देर खड़े रहना पड़ता है। जब बस आती है तो उन्हें बस में चढ़ाए बिना ही ड्राइवर बस को लेकर निकल जाता है। डीटीसी के हेल्प लाइन नंबर पर भी शिकायत को नहीं सुना गया।
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- घंटों तक नहीं आती बसें
यात्री देवेंद्र शर्मा का आरोप है कि बस रूट संख्या 258 पर पहले से बसों की संख्या कम है। जब बसें आती हैं तो बिना रुके ही निकल जाती हैं। बस कभी-कभी निर्धारित समय से काफी देरी से आती हैं, जिस कारण घंटों बस के इंतजार में गुजर जाते हैं। वहीं, यात्री शान ने बताया कि शनिवार रात करीब साढ़े 8 बजे वह भीकाजी कामा प्लेस बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रहे थे। एक घंटे तक बस का इंतजार के बाद भी कोई बस नहीं मिली। इससे परेशान होकर दिल्ली के मुख्यमंत्री को ट्वीट कर शिकायत की।
- किमी बढ़ाने के लिए करते हैं ओवरटेक
डीटीसी बसों पर अधिकतर चालक अनुबंध के आधार पर काम करते हैं और इन चालकों को 6.96 रुपये प्रति किमी के हिसाब से दिहाड़ी मिलती है। किमी बढ़ाने के लिए चालक बसों को तेजी से दौड़ाते हैं और दूसरी बसों को खतरनाक तरीके से ओवरटेक करते हैं। खतरनाक ड्राइविंग को लेकर क्लस्टर बसों की हालत डीटीसी बसों से भी ज्यादा बुरी है।
- खुले पैसों के नाम पर ज्यादा किराया
बस यात्री करुणा का कहना है कि डीटीसी और क्लस्टर बसों में टिकट के लिए खुले पैसे न होने पर उन्हें दोगुने पैसे भी देने पड़ जाते हैं। ऐसे में बस कंडक्टर उन्हें बाकी पैसे भी नहीं लौटाते। इससे यात्रियों की जेब पर दोगुना भार पड़ता है।
- अक्सर होते हैं हादसे
तेज रफ्तार में डीटीसी और क्लस्टर बसें सड़कों पर आतंक मचा रही हैं, जिसके चलते लोग दूसरे वाहन चालक इन बसों का शिकार हो रहे हैं। रोहिणी के सेक्टर-15 में 12 अगस्त को एक लो फ्लोर नॉन एसी बस ने एक टैक्सी को सामने से बुरी तरह टक्कर मारी, इस हादसे में टैक्सी में सवार यात्री और चालक घायल हो गए। हादसे के एक चश्मदीद अमित तिवारी ने इस हादसे की तस्वीर ट्विटर पर डालकर डीटीसी बस की शिकायत भी की।
- पुलिस ने काटे हैं हजारों बसों के चालान
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, यातायात नियमों का उल्लंघन करने के चलते इस वष जनवरी से 31 जुलाई तक 3852 चालान डीटीसी और 5286 चालान क्लस्टर बसों के काटे हैं। इसके बावजूद राजधानी में बस चालकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है।
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-ओवरटेक करने के लिए निर्धारित रूट से उतारी जा रही बसें
-तेज रफ्तार बसों से हादसों को दिया जा रहा अंजाम
अरुण कुमार
नई दिल्ली। राजधानी में बसों की किल्लत के चलते यात्री पहले से ही बेहाल हैं। ऐसे हालात में आजकल डीटीसी और क्लस्टर बस चालकों की मनमानी यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। आलम यह है कि खुलेआम बसों को उनके रूट से उतारकर शॉर्टकट लिए जा रहे हैं। बस स्टॉप पर बसों को रोका नहीं जा रहा, खुले पैसों के नाम पर ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। और तो और बसों के किमी पूरे करने के लिए बसों को तेज रफ्तार में दौड़ाकर यात्रियों की जान खतरे में डाली जा रही है।
बस चालकों की मनमानी के खिलाफ यात्री डीटीसी और क्लस्टर बसों के शिकायत संपर्क नंबर पर कॉल भी करते हैं, लेकिन फिर भी उनकी शिकायत नहीं सुनी जाती। इसके साथ ही स्थिति ऐसी बनी हुई है कि डीटीसी और क्लस्टर बस विभाग द्वारा भी मनमानी करने वाले चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
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- बुजुर्ग यात्रियों को लगता है डर
60 वर्षीय सरोजिनी दत्ता ने बताया कि वह करोल बाग इलाके में रहती हैं और आने-जाने के लिए बसों पर निर्भर हैं। स्टैंड पर काफी देर खड़े रहना पड़ता है। जब बस आती है तो उन्हें बस में चढ़ाए बिना ही ड्राइवर बस को लेकर निकल जाता है। डीटीसी के हेल्प लाइन नंबर पर भी शिकायत को नहीं सुना गया।
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- घंटों तक नहीं आती बसें
यात्री देवेंद्र शर्मा का आरोप है कि बस रूट संख्या 258 पर पहले से बसों की संख्या कम है। जब बसें आती हैं तो बिना रुके ही निकल जाती हैं। बस कभी-कभी निर्धारित समय से काफी देरी से आती हैं, जिस कारण घंटों बस के इंतजार में गुजर जाते हैं। वहीं, यात्री शान ने बताया कि शनिवार रात करीब साढ़े 8 बजे वह भीकाजी कामा प्लेस बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रहे थे। एक घंटे तक बस का इंतजार के बाद भी कोई बस नहीं मिली। इससे परेशान होकर दिल्ली के मुख्यमंत्री को ट्वीट कर शिकायत की।
- किमी बढ़ाने के लिए करते हैं ओवरटेक
डीटीसी बसों पर अधिकतर चालक अनुबंध के आधार पर काम करते हैं और इन चालकों को 6.96 रुपये प्रति किमी के हिसाब से दिहाड़ी मिलती है। किमी बढ़ाने के लिए चालक बसों को तेजी से दौड़ाते हैं और दूसरी बसों को खतरनाक तरीके से ओवरटेक करते हैं। खतरनाक ड्राइविंग को लेकर क्लस्टर बसों की हालत डीटीसी बसों से भी ज्यादा बुरी है।
- खुले पैसों के नाम पर ज्यादा किराया
बस यात्री करुणा का कहना है कि डीटीसी और क्लस्टर बसों में टिकट के लिए खुले पैसे न होने पर उन्हें दोगुने पैसे भी देने पड़ जाते हैं। ऐसे में बस कंडक्टर उन्हें बाकी पैसे भी नहीं लौटाते। इससे यात्रियों की जेब पर दोगुना भार पड़ता है।
- अक्सर होते हैं हादसे
तेज रफ्तार में डीटीसी और क्लस्टर बसें सड़कों पर आतंक मचा रही हैं, जिसके चलते लोग दूसरे वाहन चालक इन बसों का शिकार हो रहे हैं। रोहिणी के सेक्टर-15 में 12 अगस्त को एक लो फ्लोर नॉन एसी बस ने एक टैक्सी को सामने से बुरी तरह टक्कर मारी, इस हादसे में टैक्सी में सवार यात्री और चालक घायल हो गए। हादसे के एक चश्मदीद अमित तिवारी ने इस हादसे की तस्वीर ट्विटर पर डालकर डीटीसी बस की शिकायत भी की।
- पुलिस ने काटे हैं हजारों बसों के चालान
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, यातायात नियमों का उल्लंघन करने के चलते इस वष जनवरी से 31 जुलाई तक 3852 चालान डीटीसी और 5286 चालान क्लस्टर बसों के काटे हैं। इसके बावजूद राजधानी में बस चालकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है।