{"_id":"5b79994242c792463f793889","slug":"15346957367-ashram-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाल कल्याण समितियों को सक्रिय होना होगा:विजेंद्र गुप्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाल कल्याण समितियों को सक्रिय होना होगा:विजेंद्र गुप्ता
Updated Sun, 19 Aug 2018 09:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाल कल्याण समितियों को सक्रिय होना होगा : गुप्ता
नई दिल्ली। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार से प्रत्येक जिले में बाल कल्याण समिति का गठन करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि प्रत्येक जिले में सरकारी बाल गृह की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे कि असहाय व उपेक्षित बच्चों को संरक्षण मिल सके। बाल कल्याण समितियों को बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सजग रहना होगा। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में सैकड़ों की संख्या में बच्चे विभिन्न राज्यों से आते हैं। यहां की सड़कों, कारखानों, ढाबों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ये बच्चे देखे जा सकते हैं। बाल कल्याण अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम उम्र के सभी उपेक्षित, असहाय, मजबूर बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी वहां की सरकार की होती है। बच्चों को बुनियादी सुविधा देने के साथ उनके मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास का भी विशेष ध्यान रखना होगा, जिससे कि बच्चों के साथ न्याय हो सके। ब्यूरो
विज्ञापन
नई दिल्ली। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार से प्रत्येक जिले में बाल कल्याण समिति का गठन करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि प्रत्येक जिले में सरकारी बाल गृह की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे कि असहाय व उपेक्षित बच्चों को संरक्षण मिल सके। बाल कल्याण समितियों को बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सजग रहना होगा। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में सैकड़ों की संख्या में बच्चे विभिन्न राज्यों से आते हैं। यहां की सड़कों, कारखानों, ढाबों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ये बच्चे देखे जा सकते हैं। बाल कल्याण अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम उम्र के सभी उपेक्षित, असहाय, मजबूर बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी वहां की सरकार की होती है। बच्चों को बुनियादी सुविधा देने के साथ उनके मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास का भी विशेष ध्यान रखना होगा, जिससे कि बच्चों के साथ न्याय हो सके। ब्यूरो