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प्रॉपर्टी बाजार पर पड़ी नोटबंदी की मार, 9 नवंबर से नहीं बिका एक भी प्लॉट

Thu, 24 Nov 2016 12:22 AM IST
अरविंद सिंह/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
अरविंद सिंह/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Thu, 24 Nov 2016 12:22 AM IST
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no plot sold in greater noida after demonetization
ग्रेटर नोएडा में संपत्ति की खरीद-बिक्री पर नोटबंदी का तगड़ा असर दिख रहा है। इस फैसले के बाद से अब तक न तो एक भी प्लॉट की खरीद-बिक्री  हुई है और न ही बिल्डर प्रोजेक्ट को कंपलीशन सर्टिफिकेट मिला है।
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रजिस्ट्री विभाग के अनुसार 8 नवंबर को फैसले के बाद से एक भी ऐसी संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं हुई, जिसकी खरीद-बिक्री की तिथि 8 नवंबर के बाद की हो। इस समय जिन संपत्तियों की रजिस्ट्री हो रही है उनकी खरीद-बिक्री की तिथि 8 नवंबर के पहले की है।
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सब रजिस्ट्रार तेज सिंह यादव भी कहते हैं कि नोटबंदी का तगड़ा असर संपत्तियों की खरीद पर दिख रहा है। पहले से रजिस्ट्री काफी कम हो रही है, सिर्फ पुरानी संपत्तियां ही दर्ज हो रही हैं। एक भी दस्तावेज पर नोटबंदी के बाद खरीदने की तिथि नहीं दिख रही। दूसरा उदाहरण बिल्डर प्रोजेक्ट को कंपलीशन सर्टिफिकेट न जारी होने का है।
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक, 4 नवंबर को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के एक बिल्डर को आखिरी कंपलीशन जारी हुआ है। उसके बाद से किसी भी प्रोजेक्ट को सर्टिफिकेट नहीं मिला है जबकि अक्तूबर में 10 बिल्डर प्रोजेक्ट को कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया था।

इसकी बड़ी वजह बिल्डरों से पैसा जमा न हो पाना है। नकदी की कमी से बिल्डर भी परेशान हैं। इसका असर उन फ्लैट खरीदारों पर पड़ सकता है जिन्हें जल्द पजेशन का इंतजार है। उन्हें फ्लैट मिलने में अधिक समय लग सकता है।

आवासीय संपत्तियों पर नोट बंदी का असर तो जरूर पड़ रहा है। आने वाले समय में ये असर और अधिक दिखेगा, लेकिन इसका फायदा कृषि भूमि को ज्यादा होगा। कृषि जमीनों के दाम बढ़ सकते हैं, क्योंकि उनके सर्किल कम हैं। - वीडी शर्मा, रजिस्ट्री विभाग के सेवानिवृत्त डीआईजी

पुराने नोट से रजिस्ट्री शुल्क बंद

no plot sold in greater noida after demonetization

पुराने नोट लेकर रजिस्ट्री करने की छूट बुधवार से ही खत्म हो गई है। 24 नवंबर को सार्वजनिक अवकाश के चलते शुक्रवार को जब रजिस्ट्री दफ्तर खुलेगा तो नए नोट से ही रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी।

ग्रेटर नोएडा के सब रजिस्ट्रार तेज सिंह यादव भी मानते हैं कि पुराने नोट से फीस न लेने से रजिस्ट्री की संख्या घटेगी। मालूम हो कि संपत्ति दर्ज कराने के लिए 20 हजार रुपये बतौर रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है।

यह संपत्ति की कुल कीमत पर पांच फीसदी की दर से लगने वाले स्टांप के अलावा है। नोटबंदी के बाद 20 हजार रुपये के नए नोट न होने से संपत्तियों की रजिस्ट्री बहुत कम हो गई थी। इस पर प्रदेश सरकार ने पुराने नोट से फीस जमा करने की छूट दे दी थी। 

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