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ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर अटक रहे नौसिखिया ड्राइवर, छोटी से चूक होने पर लोग हो रहे हैं फेल
Tue, 19 Mar 2019 01:07 PM IST
शाहरुख खान
अरुण कुमार, अमर उजाला, दिल्ली
अरुण कुमार, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 19 Mar 2019 01:07 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
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ड्राइविंग लाइसेंस योग्यता परखने के लिए बनाए गए ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर वाहन चलाना दिल्ली वासियों के लिए कड़ी परीक्षा साबित हो रहा है।
राजधानी में हाल ही में चार ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर (एडीटीसी) शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन यहां पर लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंच रहे अधिकतर लोग नौसिखिए बताए जा रहे हैं, जिस कारण अधिकतर लोग ड्राइविंग टेस्ट में फेल हो रहे हैं।
परिवहन विभाग के सूत्रों के मुताबिक गत 6 मार्च को मयूर विहार फेज-1 समेत विश्वास नगर, सराय काले खां और शकूर बस्ती में एडीटीसी शुरू किए गए, लेकिन यहां पर लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंच रहे अधिकतर लोग ट्रैक पर वाहन चलाने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं।
परीक्षा में अधिक लोगों के फेल होने के चलते परिवहन विभाग के प्रति लोगों में नाराजग भी है, लेकिन परिवहन विभाग का कहना है कि अब सुरक्षित और संयमित ड्राइविंग के आधार पर लाइसेंस बनाए जाएंगे, जिससे सड़क हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या भी कम होगी।
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अधिकारिक सूत्रों की मानें तो ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आने वाले लोगों में 20 से 30 प्रतिशत ही एडीटीसी का सामना कर पा रहे हैं। वर्तमान में लाडो सराय, राजा गार्डन, हरि नगर, बुराड़ी, लोनी, रोहिणी, झड़ौदा कलां और द्वारका में भी केंद्र बनाए जा रहे हैं और अगले 2-3 महीनों में इन्हें भी शुरू कर दिया जाएगा।
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राजधानी में हाल ही में चार ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर (एडीटीसी) शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन यहां पर लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंच रहे अधिकतर लोग नौसिखिए बताए जा रहे हैं, जिस कारण अधिकतर लोग ड्राइविंग टेस्ट में फेल हो रहे हैं।
परिवहन विभाग के सूत्रों के मुताबिक गत 6 मार्च को मयूर विहार फेज-1 समेत विश्वास नगर, सराय काले खां और शकूर बस्ती में एडीटीसी शुरू किए गए, लेकिन यहां पर लाइसेंस बनवाने के लिए पहुंच रहे अधिकतर लोग ट्रैक पर वाहन चलाने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं।
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परीक्षा में अधिक लोगों के फेल होने के चलते परिवहन विभाग के प्रति लोगों में नाराजग भी है, लेकिन परिवहन विभाग का कहना है कि अब सुरक्षित और संयमित ड्राइविंग के आधार पर लाइसेंस बनाए जाएंगे, जिससे सड़क हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या भी कम होगी।
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अधिकारिक सूत्रों की मानें तो ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आने वाले लोगों में 20 से 30 प्रतिशत ही एडीटीसी का सामना कर पा रहे हैं। वर्तमान में लाडो सराय, राजा गार्डन, हरि नगर, बुराड़ी, लोनी, रोहिणी, झड़ौदा कलां और द्वारका में भी केंद्र बनाए जा रहे हैं और अगले 2-3 महीनों में इन्हें भी शुरू कर दिया जाएगा।
इनके तैयार होने पर दिल्ली में इन केंद्रों की संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी। इन केंद्रों में लगे हाई डेफिनेशन कैमरे ड्राइविंग में होने वाली छोटी से चूक होते ही लोगों के फेल होने की पुष्टि कर देता है, जिसके बाद लाइसेंस बनवाने वाले शख्स को लाईसेंस के लिए अयोग्य घोषित किया जा रहा है।
चढ़ाई पर वाहन चलाने में अटक रहे दिल्ली वाले
ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट केंद्र (एडीटीसी) पर रिवर्स में चार पहिया वाहनों की समानांतर पार्किंग, चढ़ाई पर वाहन चलाना, फॉरवर्ड -8 यानी सामने की ओर वाहन को आठ की शेप में चलाना। रिवर्स में एस की शेप बनाना और एच-ट्रैक पर वाहन चलाना आदि लोगों के लिए चुनौती साबित हो रहा है, जबकि इसके साथ ही पहले बार इन केंद्रों पर ओवरटेकिंग कौशल का परीक्षण करने के लिए भी ट्रैक बनाए गए हैं।
दुपहिया वाहन चालकों की परीक्षा भी है टेढ़ी
वहीं दुपहिया वाहन चालकों को लाइसेंस बनवाने के लिए टेढ़े ट्रैक पर बाइक चलानी होगी। इसके साथ ही ड्राइंविग के दौरान पैंतरेबाजी का भी परीक्षण लिया जा रहा है।
चढ़ाई पर वाहन चलाने में अटक रहे दिल्ली वाले
ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट केंद्र (एडीटीसी) पर रिवर्स में चार पहिया वाहनों की समानांतर पार्किंग, चढ़ाई पर वाहन चलाना, फॉरवर्ड -8 यानी सामने की ओर वाहन को आठ की शेप में चलाना। रिवर्स में एस की शेप बनाना और एच-ट्रैक पर वाहन चलाना आदि लोगों के लिए चुनौती साबित हो रहा है, जबकि इसके साथ ही पहले बार इन केंद्रों पर ओवरटेकिंग कौशल का परीक्षण करने के लिए भी ट्रैक बनाए गए हैं।
दुपहिया वाहन चालकों की परीक्षा भी है टेढ़ी
वहीं दुपहिया वाहन चालकों को लाइसेंस बनवाने के लिए टेढ़े ट्रैक पर बाइक चलानी होगी। इसके साथ ही ड्राइंविग के दौरान पैंतरेबाजी का भी परीक्षण लिया जा रहा है।
इतना ही नहीं दुपहिया चालकों को इस बीच आपात ब्रेक और सीधी चढ़ाई समेत अन्य चीजों का परीक्षण किया जा रहा है। यहां पहली बार दोनों रैंप पर इमरजेंसी ब्रेकिंग स्किल्स और ड्राइविंग स्किल्स को राइड करने के लिए भी परीक्षण किया जा रहा है।
परीक्षण पटरियों में प्रत्येक ट्रैक पर एक विशेष निकास मार्ग भी होता है ताकि आवेदक जो मध्य-मार्ग में विफल होते हैं, वे अन्य आवेदकों को परेशान किए बिना आसानी से बाहर निकल सकें।
परीक्षण पटरियों में प्रत्येक ट्रैक पर एक विशेष निकास मार्ग भी होता है ताकि आवेदक जो मध्य-मार्ग में विफल होते हैं, वे अन्य आवेदकों को परेशान किए बिना आसानी से बाहर निकल सकें।