{"_id":"5b19349e4f1c1b13358b5696","slug":"new-startup-will-stop-pollution-in-delhi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"वायु प्रदूषण नियंत्रण में हैं नए स्टार्टअप के अवसर, 5 साल में खत्म हो सकती है जनरेटर की जरूरत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वायु प्रदूषण नियंत्रण में हैं नए स्टार्टअप के अवसर, 5 साल में खत्म हो सकती है जनरेटर की जरूरत
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 07 Jun 2018 07:05 PM IST
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the massive earth summit
देश और दुनिया में प्रदूषण की बहुस्तरीय समस्या ने विकास के तौर-तरीकों पर चिंता के साथ नए उद्यमों के लिए बड़ा अवसर पैदा किया है। ऊर्जा उत्पादन की मौजूदा रफ्तार अगले जहां 4 से 5 वर्ष में जनरेटर की जरूरत ही खत्म कर सकती है। वहीं उद्योग जगत और उससे जुड़े विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि नई तकनीक और बड़े निवेश से न सिर्फ प्रदूषण की समस्या को कम किया जा सकता है बल्कि इससे देश का औद्योगिक पहिया भी तेजी से घूम सकता है। मेक इन इंडिया और सरकार की ओर से स्वच्छ भारत जैसी चलाई गई नीतियों को भी अहम करार दिया गया है।
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बुधवार को होटल ताज डिप्लोमेटिक में ॐद मैसिव अर्थ सम्मिट-2018ॐ के दौरान वायु-जल प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, सौर और परमाणु ऊर्जा के विविध आयामों और भविष्य को लेकर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने कहा कि हमें उपभोग की अति से बचना होगा। आज नौजवान उद्यमियों के जरिये रचनात्मक और नवोन्मेषी पहल किये जाने की जरूरत है।
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खासतौर से प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं रहना चाहिये। सब कुछ सरकार नहों कर सकती है। यह हम सबकी जिम्मेदारी है। सरकार के जरिये प्रदूषण रोकथाम के लिए लागू किये गए सभी नियंत्रण और जागरूकता कार्यक्रम बेहद जरूरी है। सह-अस्तित्व के जरिये ही बदलाव सम्भव है। स्वच्छ गंगा मिशन, ठोस कचरा, प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूकता को लेकर सरकार के अभियान एक अच्छी पहल है। उन्होंने कहा कि यह सोचने वाली बात है कि प्रदूषण मिटाने को अधिकांश पहल निधियों पर ही निर्भर क्यों रहती हैं।
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startup will stop pollution
- फोटो : amar ujala
मैसिव फंड के प्रबंध साझीदार शैलेश विक्रम सिंह ने कहा कि जिस तरह ई-कॉमर्स क्षेत्र में निवेश हुआ है उससे भी 10 गुना ज्यादा निवेश जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्र में होने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ प्रदूषण की समस्या के कारणों को कम किया जा सकेगा बल्कि अर्थव्यवस्था भी सुधरेगी। केंद्र सरकार में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के.विजयन राघवन न कहा कि यह सबसे बेहतर समय है जब बहु- दिशा में समाधान के बारे में सोचा जाए। हम कैसे प्रदूषण की चुनौती को स्वीकार करेंगे यह सोचने लायक है।
प्रदूषण मिटाने के लिए सीएनजी इस्तेमाल की गई। आज सीएनजी वाहन भी समस्या का ही हिस्सा हैं। वर्ष 2000 में दिल्ली में जहां 30 लाख वाहन थे इस वक़्त 90 लाख के पार इनकी संख्या हो चुकी है। आबादी का भी बोझ दिल्ली झेल रही है। सरकार इन समस्याओं से निपटने को कदम उठा रही है। वायु प्रदूषण में एक बड़ा कारण निर्माण कार्य के दौरान उड़ने वाली धूल है। ऐसे में ध्यान से देखें तो धूल प्रदूषण का नियंत्रण भी एक नया उद्यम ही है। क्या निर्माण स्थलों को ज़ीरो डस्ट एरिया बनाने का स्टार्टअप नहीं किया जा सकता है?
सौर ऊर्जा को बेहतर बनाने के लिए आईआईटी मद्रास और टेक महिंद्रा काम कर रही है। यह बात ध्यान रखनी होगी कि लोग ही इस समस्या की कुंजी हैं। इसी तरह कचरा भी ऊर्जा पैदा करने का एक अच्छा स्रोत है, हमें इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। दिल्ली के वायु प्रदूषण पर शोध करने वाले आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मुकेश शर्मा ने कहा कि हम प्रदूषण के स्रोत को अच्छी तरह समझते हैं। हालांकि हम अभी यह जोड़ने में विफल हैं कि प्रदूषण स्रोत का प्रभाव कितना है। हम सही रास्ते पर हैं। एक बात और ध्यान देने लायक है कि प्रदूषण के आंकड़े पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।
प्रदूषण मिटाने के लिए सीएनजी इस्तेमाल की गई। आज सीएनजी वाहन भी समस्या का ही हिस्सा हैं। वर्ष 2000 में दिल्ली में जहां 30 लाख वाहन थे इस वक़्त 90 लाख के पार इनकी संख्या हो चुकी है। आबादी का भी बोझ दिल्ली झेल रही है। सरकार इन समस्याओं से निपटने को कदम उठा रही है। वायु प्रदूषण में एक बड़ा कारण निर्माण कार्य के दौरान उड़ने वाली धूल है। ऐसे में ध्यान से देखें तो धूल प्रदूषण का नियंत्रण भी एक नया उद्यम ही है। क्या निर्माण स्थलों को ज़ीरो डस्ट एरिया बनाने का स्टार्टअप नहीं किया जा सकता है?
सौर ऊर्जा को बेहतर बनाने के लिए आईआईटी मद्रास और टेक महिंद्रा काम कर रही है। यह बात ध्यान रखनी होगी कि लोग ही इस समस्या की कुंजी हैं। इसी तरह कचरा भी ऊर्जा पैदा करने का एक अच्छा स्रोत है, हमें इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। दिल्ली के वायु प्रदूषण पर शोध करने वाले आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मुकेश शर्मा ने कहा कि हम प्रदूषण के स्रोत को अच्छी तरह समझते हैं। हालांकि हम अभी यह जोड़ने में विफल हैं कि प्रदूषण स्रोत का प्रभाव कितना है। हम सही रास्ते पर हैं। एक बात और ध्यान देने लायक है कि प्रदूषण के आंकड़े पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।
startup will stop pollution
करीब 2 हजार तरीके के मामले सूक्ष्म प्रदूषण के हैं। कम्बस्टन प्रदूषण का सबसे बड़ा और खतरनाक स्रोत है। पूरे गंगा रिवर बेसिन में कार्बन के काले कण लोगों कसेहत को प्रभावित कर रहे हैं। इसका नियंत्रण बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार की ओर से एलपीजी मुहैया कराया जाना एक बेहद अहम और कारगर कदम है। पॉवर प्लांट को भी उत्सर्जन मानकों के अनुकूल करना होगा।
परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व चैयरमैन अनिल काकोदकर ने कहा कि अगले 10 वर्षों में चीन के पास परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हमसे बड़ी परियोजना है लेकिन मेरा विश्वास है कि भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर है। यदि पहल ककी जाए तो हम चीन को पछाड़ सकते हैं। हमने सौर ऊर्जा के लिए देर से कदम बढ़ाया यह नुकसानदायक रहा। देश में ऊर्जा की जरूरत को बिना परमाणु ऊर्जा के पूरा नहीं किया जा सकता।
सोलर से पैदा होने वाले ऊर्जा का भंडारण करना एक बड़ी चुनौती है। वहीं भंडारण के साथ सौर ऊर्जा की लागत परमाणु ऊर्जा से ज्यादा है। परमाणु ऊर्जा प्लांट के लिए अभी सबसे बड़ी समस्या यूरेनियम का पर्याप्त मात्रा में न होना है। थोरियम को लेकर काम हो रहा है। भारत में परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड वैश्विक स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है। हम जरूरत है कि भारत की परमाणु ऊर्जा को वैश्विक परमाणु आपूर्ति देशों के साथ एकीकृत किया जाय।
सॉफ्टबैंक के चैयरमैन मनोज कोतहली ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियां बड़े बदलाव ला रहीं हैं नवीकरणीय ऊर्जा पर अगले चार वर्ष में उत्पादन 20 से 100 गीगावाट होगा। मौजूदा समय में 88 गीगावाट ऊर्जा जनरेटर से पैदा होती है। 3 से 4 वर्षों में इनकी जरूरत खत्म हो जाएगी। सौर ऊर्जा को भंडारित करने और ग्रिड व वितरण में सुधार करके लक्ष्य हासिल किए जा सकेंगे।
परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व चैयरमैन अनिल काकोदकर ने कहा कि अगले 10 वर्षों में चीन के पास परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हमसे बड़ी परियोजना है लेकिन मेरा विश्वास है कि भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर है। यदि पहल ककी जाए तो हम चीन को पछाड़ सकते हैं। हमने सौर ऊर्जा के लिए देर से कदम बढ़ाया यह नुकसानदायक रहा। देश में ऊर्जा की जरूरत को बिना परमाणु ऊर्जा के पूरा नहीं किया जा सकता।
सोलर से पैदा होने वाले ऊर्जा का भंडारण करना एक बड़ी चुनौती है। वहीं भंडारण के साथ सौर ऊर्जा की लागत परमाणु ऊर्जा से ज्यादा है। परमाणु ऊर्जा प्लांट के लिए अभी सबसे बड़ी समस्या यूरेनियम का पर्याप्त मात्रा में न होना है। थोरियम को लेकर काम हो रहा है। भारत में परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड वैश्विक स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है। हम जरूरत है कि भारत की परमाणु ऊर्जा को वैश्विक परमाणु आपूर्ति देशों के साथ एकीकृत किया जाय।
सॉफ्टबैंक के चैयरमैन मनोज कोतहली ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियां बड़े बदलाव ला रहीं हैं नवीकरणीय ऊर्जा पर अगले चार वर्ष में उत्पादन 20 से 100 गीगावाट होगा। मौजूदा समय में 88 गीगावाट ऊर्जा जनरेटर से पैदा होती है। 3 से 4 वर्षों में इनकी जरूरत खत्म हो जाएगी। सौर ऊर्जा को भंडारित करने और ग्रिड व वितरण में सुधार करके लक्ष्य हासिल किए जा सकेंगे।
startup will stop pollution
सौर ऊर्जा के लिए सबसे बड़ी दरकार जमीन के बेकार टुकड़े की है। 100 गीगावाट सौर ऊर्जा की सफलता के लिए इस तरह कि करीब 6.5 लाख वर्ग मीटर वेस्ट लैंड की जरूरत होगी। वहीं दूसरी सबसे बड़ी चीज सूरज की रोशनी है। अकेले लद्दाख 50 गीगावाट सौर ऊर्जा पैदा करने की क्षमता रखता है। सौर ऊर्जा का भण्डारण भी अगले 4 वर्ष में बेहतर हो जाएगा। सरकार को 99 फीसदी प्री-पेड मोबाइल की तरह बिजली के प्री-पेड किये जाने की सलाह भी दी गयी है।
इन कुछ कदमों की वजह से हम जीवाश्म ईंधन से बिल्कुल मुक्त हो सकते हैं। यदि इस क्षेत्र में अवसर की बात की जाय तो मेक इन इंडिया इसमे बेहद सहायक और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 200 से 300 अरब रुपये का निवेश हो सकता है। सीपीसीबी के निदेशक जेएस कौम्यूत्र ने कहा कि दिल्ली का प्रदूषण पूरी तरह मौसमी कारणों पर निर्भर करता है। वहीं पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से पराली जलाये जाने के कारण भी दिल्ली की हवा खराब होती है।
ऐसे में पराली जलाये जाने पर रोक लगाने से लेकर दिल्ली के भीतर होने वाले स्थानीय प्रदूषण को कम करने को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। इसके प्रभाव भी दिखाई दे रहे। हालांकि 90 लाख वाहनों में सबसे ज्यादा संख्या दो पहिया वाहनों की है। इनके बढ़ने का मतलब है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था कमजोर और मंहगी है। इसे सबसे पहले सुधारने की जरूरत है।
अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के साझीदार निपुण साहनी ने बताया कि सिर्फ पूंजी की बदौलत प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की समस्या से नहीं निपटा जा सकता। न ही हर समस्या में अवसर ढूंढना बेहतर है। हमें नवोन्मेष पर ध्यान देना चाहिए। इंडस्ट्री पर इंडस्ट्री बनाना ठीक नहीं है। जितनी पूंजी स्वस्थ ऊर्जा तकनीक में आई है उतनी आबो-हवा में नहीं है। इंफो एज के संस्थापक और उद्यमी संजीव बिकचंदानी ने कहा कि साफ हवा और पानी के लिए सूक्ष्म स्तर पर काम हो रहा है। लेकिन चुनौती यह है इसे आप किस तरह स्वीकार करेंगे और यह भी देखेंगे कि कहाँ अवसर है।
इन कुछ कदमों की वजह से हम जीवाश्म ईंधन से बिल्कुल मुक्त हो सकते हैं। यदि इस क्षेत्र में अवसर की बात की जाय तो मेक इन इंडिया इसमे बेहद सहायक और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 200 से 300 अरब रुपये का निवेश हो सकता है। सीपीसीबी के निदेशक जेएस कौम्यूत्र ने कहा कि दिल्ली का प्रदूषण पूरी तरह मौसमी कारणों पर निर्भर करता है। वहीं पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से पराली जलाये जाने के कारण भी दिल्ली की हवा खराब होती है।
ऐसे में पराली जलाये जाने पर रोक लगाने से लेकर दिल्ली के भीतर होने वाले स्थानीय प्रदूषण को कम करने को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। इसके प्रभाव भी दिखाई दे रहे। हालांकि 90 लाख वाहनों में सबसे ज्यादा संख्या दो पहिया वाहनों की है। इनके बढ़ने का मतलब है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था कमजोर और मंहगी है। इसे सबसे पहले सुधारने की जरूरत है।
अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के साझीदार निपुण साहनी ने बताया कि सिर्फ पूंजी की बदौलत प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की समस्या से नहीं निपटा जा सकता। न ही हर समस्या में अवसर ढूंढना बेहतर है। हमें नवोन्मेष पर ध्यान देना चाहिए। इंडस्ट्री पर इंडस्ट्री बनाना ठीक नहीं है। जितनी पूंजी स्वस्थ ऊर्जा तकनीक में आई है उतनी आबो-हवा में नहीं है। इंफो एज के संस्थापक और उद्यमी संजीव बिकचंदानी ने कहा कि साफ हवा और पानी के लिए सूक्ष्म स्तर पर काम हो रहा है। लेकिन चुनौती यह है इसे आप किस तरह स्वीकार करेंगे और यह भी देखेंगे कि कहाँ अवसर है।