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नियमों पर खरा नहीं उतरा मदर डेयरी और अमूल दूध, नमूने फेल

Fri, 26 Feb 2016 08:09 PM IST
Updated Fri, 26 Feb 2016 08:09 PM IST
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Mother Dairy and Amul milk has failed on rules

जिले में अलग-अलग स्थानों से लिए गए मदर डेयरी के टोंड व फुल क्रीम दूध के 14 और अमूल दूध के तीन नमूने फेल पाए गए हैं। इन सभी में पौष्टिक तत्व की मात्रा मानकों से कम पाई गई।

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वहीं,अमूल के एक नमूने में डिटरजेंट की पुष्टि हुई है। अप्रैल 2013 से दिसंबर 2015 तक की यह रिपोर्ट विधानसभा में सदस्य अनुग्रह नारायण सिंह की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में तैयार की गई है।

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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि निरीक्षण विभाग गौतमबुद्ध नगर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसएन सिंह ने बताया कि 1 अप्रैल 2013 से 31 दिसंबर 2015 तक जिले में मदर डेयरी के बूथों और 54 स्थानों पर निरीक्षण किया गया और शिकायत के आधार पर 12 स्थानों पर छापे मारे गए।

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असुरक्षित नमूने में डिटरजेंट की पुष्टि हुई थी

Mother Dairy and Amul milk has failed on rules

41 नमूने लिए गए, जिनमें से लखनऊ की लैब से मिली रिपोर्ट में 14 नमूने फेल थे। इनमें वसा और जरूरी तत्व निर्धारित मानकों से कम थे। इन सभी में एडीएम कोर्ट में वाद दायर किया गया है।


वहीं, अमूल दूध के लिए 17 निरीक्षण और 4 स्थानों पर छापे मारे गए। 8 नमूने लिए गए, जिनमें से दो नमूनों में पौष्टिक तत्व मानकों से कम थे और एक नमूना असुरक्षित पाया गया।

असुरक्षित नमूने में डिटरजेंट की पुष्टि हुई थी। यह मामला जिला कोर्ट में दर्ज कराया गया। 1 अप्रैल 2013 से 31 दिसंबर 2015 की रिपोर्ट में 2015 में मैगी के 13 नमूने लिए गए, जिनमें से 12 नमूने फेल पाए गए थे।

आठ के खिलाफ न्यायालय में मामला दर्ज कराया गया है

Mother Dairy and Amul milk has failed on rules

आठ के खिलाफ न्यायालय में मामला दर्ज कराया गया है। बाकी केखिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। विधानसभा सदस्य अनुग्रह नारायण सिंह ने पूछा था कि प्रदेश में मदर डेयरी, अमूल डेयरी और नेस्ले मैगी के उत्पादों की जांच विगत दो वर्ष में शासन द्वारा कराई गई थी।


यदि हां तो क्या सरकार बताएगी कि नमूनों की जांच में कोई कमियां पाई गईं, यदि हां तो क्या-क्या और कहां-कहां व उस पर क्या कार्रवाई की गई। यदि नहीं तो क्यों?

खाद्य सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक जिले में समय-समय पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेने का अभियान चलाया जाता है। कहीं, यदि खाद्य पदार्थ खराब पाए जाते हैं तो उसे वहीं फिंकवा दिया जाता है। नमूने लेकर लखनऊ की लैब में जांच के लिए भेजे जाते हैं। नमूना फेल होने पर कोर्ट में मामला दर्ज कराया जाता है।

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