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मनरेगा योजना का बजट तक नहीं खर्च कर पाते हैं सरपंच
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 01 Jul 2016 12:05 AM IST
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मनरेगा मजदूर
- फोटो : Bureau
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मनरेगा योजना के तहत सरकार द्वारा मेवात जिला को अलाट किये जाने वाले बजट को भी मेवात के सरपंच पूरा खर्च नहीं कर पाते हैं। इस बारे में डीसी मेवात सरपंचों की अज्ञानता मानते हैं तो वहीं कई सरपंचो का कहना है कि मेवात में मनरेगा के लिये मजदूर ने मिलने की वजह से सरपंच बजट को पूरा नहीं कर पाते हैं।
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जानकारी के अनुसार केद्रं और राज्य सरकार ने मेवात जिला में मनरेगा के तहत काम कराने के लिये वर्ष 2014-15 में 18 करोड और वर्ष 2015-16 में 19 करोड रूपये कि मंजूरी दी थी। लेकिन वर्ष 2014-15 में 10 करोड और वर्ष 2015-16 में 14 करोड रूपये ही खर्च हो सके थे।
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मनरेगा के नियमों के मुताबिक काम न कर पाने की वजह से अधिक्तर बजट पूरा खर्च की नहीं हो पाता है। मनरेगा योजना के तहत सरकार मजदूरों को 100 दिन की मजदूरी की गारंटी देती है। इस योजना के तहत तालाबों की ादाई, रास्तों में मिटटी डालना, स्कूलों का भरत करना आदी काफी कार्य किये जाते हैं।
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हालांकि सरकार बहुत से किसानों के बाद के खेतों में काम करने के पैसे भी मनरेगा के तहत अदा करती है। लेकिन उन किसानों को ग्राम सभा से मंजूरी करवानी पडती है।
मौजूदा जिला पार्षद जान मोहमद का कहना है कि पिछले तीस साल से गांव अकबरपुर की सरपंची उनके ही परिवार के पास है। गांव के सरपंच पद पर दस साल उसके पिता दरोगा खान रहे उसके दस साल लगातार वह खुद सरपंच रहे और अब दूसरी बार उसकी पत्नी गांव की सरपंच है।
जान मोहमद का कहना है कि वह दूसरी बार जिला परिषद का चुनाव जीत कर आया है। उसका कहना है कि मनरेगा के काम के लिये जितने पैसे चाहे सरकार उसको देगी है।
जब से मनरेगा की योजना बनी है तब से वे इसका फायदा उठाते आ रहे हैं। उन्होने कहा कि असलियत में सरपंच चहाते हैं कि मनरेगा का काम मशीनों से कराया जाये लेकिन मनरेगा का नियम इसकी इजाजत नहीं देता है।
वहीं मेवात में मजदूर मिलते ही नहीं है। जिसकी वजह से जो मनरेगा का बजट होता है वह पूरा खर्च नहीं हो पाता है। सरपंच का कहना है कि सरकार की ये बेहतरीन योजना है। इस योजना के लागू होने के बाद कोई मजदूर भूखा नहीं रह सकता है।