MCD Mayor Election: मेयर चुनाव पर फिर लगा ग्रहण, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के कारण बाद में घोषित होगी तारीख
MCD Mayor Election: नगर निगम में मेयर पद के चुनाव और निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के लिए बनाई गई पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने पिछली बार आम आदमी पार्टी के दो विधायकों को इस आधार पर मेयर के मतदान में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि उन्हें एक अदालत के द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है...
विस्तार
दिल्ली नगर निगम का चुनाव परिणाम आए दो महीने से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन दिल्ली को अब तक मेयर नहीं मिल पाया है। इसकी तीन कोशिशें पहले ही हंगामे की भेंट चढ़ चुकी हैं। उपराज्यपाल ने 16 फरवरी को मेयर के मतदान की नई तारीख घोषित की थी। लेकिन आम आदमी पार्टी की मेयर उम्मीदवार शैली ओबेरॉय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई शुक्रवार को होने के कारण एक बार फिर मेयर चुनाव टलना तय हो गया है। नई तिथि की घोषणा सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के बाद आ सकती है।
दरअसल, आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में मेयर के चुनाव में एल्डर मैन (नामित सदस्य) के वोट देने या न देने पर विवाद हो गया है। दोनों ही पार्टियां अपने-अपने तर्क दे रही हैं। भाजपा का कहना है कि 2016 में हाईकोर्ट की एक बेंच ने मेयर-डिप्टी मेयर के चुनाव में एल्डर मैन के मतदान को वैध करार दिया था, लिहाजा इस बार भी वह एल्डर मैन से वोट कराने की कोशिश कर रही है।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी 2016 में ही एक दूसरे मामले का उदाहरण देते हुए दावा किया है कि एल्डर मैन को मेयर-डिप्टी मेयर के मतदान में मताधिकार नहीं है। इस मामले पर अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय में ही हो सकता है। यदि सुनवाई में देर हुई तो मेयर पद के चुनाव में और ज्यादा देर भी हो सकती है।
नगर निगम में मेयर पद के चुनाव और निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के लिए बनाई गई पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने पिछली बार आम आदमी पार्टी के दो विधायकों को इस आधार पर मेयर के मतदान में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि उन्हें एक अदालत के द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि इन विधायकों को भी मेयर पद के चुनाव में हिस्सा लेने का अधिकार है। इस मामले पर भी सर्वोच्च न्यायालय का रुख मेयर चुनाव को प्रभावित कर सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय में रखेंगे अपना पक्ष
भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रदेश के महामंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि अब चूंकि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के अधीन आ चुका है, लिहाजा पार्टी इस पर अलग से कोई टिप्पणी करना ठीक नहीं समझती। वे पार्टी का पक्ष सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में सच की जीत होगी।