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सिसोदिया ने छात्रों को बांटे टैबलेट, सरकारी स्कूल के 15 हजार विद्यार्थियों को होंगे वितरित

Fri, 03 Jan 2020 08:33 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 03 Jan 2020 08:33 PM IST
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Manish Sisodia distributed tablets to delhi govt students
मनीष सिसोदिया ने छात्रों को बांटे टैबलेट - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली सरकार ने दसवीं कक्षा में 80 फीसदी व उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को टैबलेट देने की शुरुआत शुक्रवार से कर दी। स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (कालकाजी) के विद्यार्थियों को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह टैबलेट वितरित किये। 

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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने छात्रों, शिक्षकों व स्कूल प्रमुखों को संबोधित करते हुए कहा कि टैबलेट एक तरह से पोर्टेबल लाइब्रेरी है। इससे विद्यार्थी शिक्षकों से जुड़ सकेंगे। साथ ही उन्हें पढ़ाई में मदद मिलेगी। दिल्ली सरकार ने बजट में छात्रों को टैबलेट देने की घोषणा की थी।  
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दिल्ली सरकार लगातार स्कूलों को उत्कृष्ट बनाने का प्रयास कर रही है। इसी दिशा में यह टैबलेट वितरित किए गए हैं। छात्रों को टैबलेट देने के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिन विद्यार्थियों ने परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, उन्हें टैबलेट दे रहे हैं। यह टैबलेट वितरण का शुरुआती चरण है। इसके बाद दिल्ली सरकार के सभी स्कूलों के छात्रों को टैबलेट दिये जायेंगे। 
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उन्होंने विद्यार्थियों को टैबलेट का उपयोग करने को लेकर आगाह भी किया। उन्होंने कहा कि यह आपके हाथों में है कि आप इस टैबलेट का उपयोग कैसे करना चाहेंगे। बच्चों को कहा गया कि माता-पिता इस बात की शिकायत ना करें कि उनके बच्चे टैबलेट के आदी हो गए हैं।

केजरीवाल की गलत शिक्षा नीति से दांव पर लगा छात्रों का भविष्यः भाजपा

भाजपा ने दिल्ली सरकार के शिक्षा में सुधार के दावे को हवा-हवाई बताया है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में छात्रों को नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा में अपेक्षाकृत कमजोर छात्रों को फेल किया जा रहा है और इस प्रकार केवल मजबूत छात्रों को अगली कक्षा में ले जाकर बच्चों का पास प्रतिशत ज्यादा दिखाने की कोशिश हो रही है। पार्टी का यह जवाब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कमजोर छात्रों को मुफ्त कोचिंग की सुविधा देने का एलान किया था।  

भाजपा से जुड़े शोध संस्थान पीपीआरसी के निदेशक सुमीत भसीन ने अमर उजाला से कहा कि आरटीआई से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि नवीं और ग्यारहवीं कक्षा में बच्चों को रोका जा रहा है। यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार के साथ अन्याय है। 

उन्होंने कहा कि इस तिकड़म के बाद भी दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे इतने भी अंक नहीं ला पा रहे हैं कि उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रवेश मिल सके।  

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