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Delhi NCR News: भाषा राष्ट्र की आत्मा, साहित्य उसकी पहचानः विजेंद्र गुप्ता
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- युवाओं से मातृभाषा में पढ़ने-लिखने की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में रचयिता साहित्य उत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने इस अवसर पर युवाओं से अपनी मातृभाषा में पढ़ने, लिखने और सृजन करने का आह्वान किया। गुप्ता ने कहा कि भाषा राष्ट्र की आत्मा है और किसी देश की पहचान उसकी भाषा, साहित्य तथा सांस्कृतिक विरासत से बनती है।
अध्यक्ष गुप्ता ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण को भारत की सभ्यतागत विरासत के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की चेतना और परंपराओं की अभिव्यक्ति है। कबीर, सूरदास और तुलसीदास जैसे साहित्यकारों ने क्षेत्रीय भाषाओं को समृद्ध कर देश को सांस्कृतिक रूप से जोड़ा। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र और महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। गुप्ता ने बताया कि दिल्ली विधानसभा में हिंदी के प्रयोग का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने भाषाई बाधाएं दूर करने में भारत सरकार के भाषिणी मंच की भूमिका का भी जिक्र किया।
अध्यक्ष ने युवाओं से अपनी मातृभाषा में पढ़ने, लिखने और सृजन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाषाई विविधता देश की ताकत है। दूसरी भाषाएं सीखने के साथ भारतीय भाषाओं को भी उचित सम्मान मिलना चाहिए। यह साहित्य उत्सव 29 और 30 अक्तूबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें भाषा, साहित्य और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में रचयिता साहित्य उत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने इस अवसर पर युवाओं से अपनी मातृभाषा में पढ़ने, लिखने और सृजन करने का आह्वान किया। गुप्ता ने कहा कि भाषा राष्ट्र की आत्मा है और किसी देश की पहचान उसकी भाषा, साहित्य तथा सांस्कृतिक विरासत से बनती है।
अध्यक्ष गुप्ता ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण को भारत की सभ्यतागत विरासत के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की चेतना और परंपराओं की अभिव्यक्ति है। कबीर, सूरदास और तुलसीदास जैसे साहित्यकारों ने क्षेत्रीय भाषाओं को समृद्ध कर देश को सांस्कृतिक रूप से जोड़ा। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र और महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। गुप्ता ने बताया कि दिल्ली विधानसभा में हिंदी के प्रयोग का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने भाषाई बाधाएं दूर करने में भारत सरकार के भाषिणी मंच की भूमिका का भी जिक्र किया।
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अध्यक्ष ने युवाओं से अपनी मातृभाषा में पढ़ने, लिखने और सृजन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाषाई विविधता देश की ताकत है। दूसरी भाषाएं सीखने के साथ भारतीय भाषाओं को भी उचित सम्मान मिलना चाहिए। यह साहित्य उत्सव 29 और 30 अक्तूबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें भाषा, साहित्य और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
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