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दिल्ली: केवी में कक्षा एक में दाखिले के लिए आयु सीमा छह वर्ष करने को चुनौती याचिका खारिज, पढ़ें पूरा मामला

Mon, 11 Apr 2022 10:24 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 11 Apr 2022 10:24 PM IST
सार

याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा था कि उम्र की आवश्यकता में बदलाव संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21-ए के साथ-साथ दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 और बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार के प्रावधानों के तहत याचिकाकर्ता को दिए गए शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।

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kendriya vidyalaya admission Petition dismissed challenging age limit to six years for admission
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय विद्यालय में आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षा एक में प्रवेश को लेकर न्यूनतम आयु छह साल के मानदंड को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। केंद्र सरकार व केवी ने याचिका पर आपत्ति जताई थी। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा वर्तमान में दाखिला प्रक्रिया शुरू है और केवी ने पंजीकरण के लिए समय सीमा भी बढ़ा दी थी। वर्तमान में दाखिला प्रक्रिया में हस्तक्षेप उचित नहीं है। ऐसे में वे याचिका खारिज करती है। दायर याचिकाओं में केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) द्वारा न्यूनतम आयु को पांच साल से छह साल अचानक परिवर्तन करने को अनुचित और मनमाना बताते हुए चुनौती दी थी। 

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वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा दलील दी कि केंद्रीय विद्यालय (केवी) में दाखिला के लिए याचिकाकर्ता का कोई निहित अधिकार नहीं हैं और याचिकाकर्ता अगले साल प्रवेश के लिए पात्र हो जाएंगे। इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी थी कि निर्णय अचानक नहीं लिया गया था क्योंकि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के संदर्भ में है जो 2020 में आई थी और नीति चुनौती के अधीन नहीं है।
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उन्होंने अदालत से दाखिलों पर रोक न लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि अदालत के आदेश का अखिल भारतीय प्रभाव होगा और यह पांच से सात वर्ष की आयु के छात्रों के बीच विविधता पैदा करेगा। एएसजी ने अदालत को यह भी बताया कि 21 राज्यों ने कक्षा एक के लिए सिक्स-प्लस व्यवस्था को लागू किया है और चूंकि केवी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है, जिन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है। इसलिए प्रवेश आयु के संबंध में एकरूपता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।


 
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याचिकाकर्ता पांच साल की बच्ची की ओर से पेश वकील अशोक अग्रवाल ने सोमवार को दलील दी कि नीति में बदलाव के जरिए अधिकारी उसे शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं कर सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के आयु मानदंड में परिवर्तन उन छात्रों के हित के लिए हानिकारक है, जिन्हें प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार है। अग्रवाल ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को पहले प्री-प्राइमरी स्तर पर लागू किया जाना है और इसे सीधे कक्षा एक में प्रवेश करने वाले छात्रों पर नहीं लागू किया जा सकता है।


 
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