क्या सदन में सिसोदिया ने की गलत बयानी: कश्मीरी शिक्षकों ने दावे को नकारा, कहा- हमें कोर्ट के कहने पर किया नियमित
सिसोदिया ने सदन में भाजपा को नसीहत दी। कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री से सीखे कैसे मदद की जाती है। विस्थापित परिवार के हर सदस्य को प्रतिमाह 3250 रुपए दिया जा रहा है। विस्थापित शिक्षकों को नियमित किया गया है।
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सरकारी स्कूल शिक्षक एसोसिएशन(विस्थापित) ने दिल्ली सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने कश्मीरी पंडित शिक्षकों को नियमित किया। एसोसिएशन का दावा है कि उन्हें नियमित जॉब कोर्ट के दखल के बाद दी गई है।
सिसोदिया ने सदन में दिया था ये बयान
मालूम हो कि सोमवार को दिल्ली विधानसभा में कश्मीरी पंडितों पर चर्चा में हिस्सा लेने के दौरान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि, भाजपा केवल 'कश्मीर फाइल्स' की बात करती है। हम कश्मीरी पंडितों के दर्द व उनके वेलफेयर की। कश्मीरी पंडितों के नाम पर राजनीति की रोटी सेंकने वाली भाजपा ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर तो बहुत चीखती-चिल्लाती है। लेकिन जब विधानसभा में उनके वेलफेयर की बात आई है तो सदन से उठकर चले गए।
सदन में सिसोदिया ने कहा कि भाजपा के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश होना चाहिए। कश्मीरी पंडितों के बेहतरी के लिए तीन मांग सदन में सिसोदिया ने केंद्र सरकार से की। कहा कि विस्थापितों का पुनर्वास किया जाए। फिल्म से कमाएं 200 करोड़ रुपए वेलफेयर के लिए खर्च किया जाए। फिल्म को यू-ट्यूब पर डाले। 32 साल बाद भी कश्मीरी पंडितों को अपने ही देश में विस्थापित होकर रहना पड़ रहा है।
जबकि हर घोषणा पत्रों में पुनर्वास का जिक्र भाजपा करती है। कश्मीरी पंडितों के नाम पर राजनीति करने का काम भाजपा करती है। उनकी बेहतरी के लिए कुछ नहीं किया। कश्मीर के लोगों के मन में एक ही टीस है कि क्या वह कश्मीर में अपनी जमीन देख सकेंगे। कश्मीर के अपने घर में जाकर उसी स्वतंत्रता के साथ रह सकते है जैसे 1989 से पहले रहते थे। सदन में चर्चा की शुरुआत आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने शुरू किया।
टीचर्स एसोसिएशन ने सिसोदिया के दावे को बताया गलत
हालांकि टीचर्स एसोसिएशन मनीष सिसोदिया के वक्तव्य का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि 2010 में कश्मीरी माइग्रैंट शिक्षकों ने इस मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पांच साल बाद 2015 में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कश्मीरी विस्थापित शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया। इस फैसले को दिल्ली सरकार ने दो जजों वाली पीठ के समक्ष चुनौती दी लेकिन उस पीठ ने भी यही फैसला सुनाया कि कश्मीरी विस्थापित शिक्षकों को नियमित किया जाए।
इस पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी तब सर्वोच्च न्यायालय ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सही माना। तब जाकर दिल्ली सरकार ने 2019 में शिक्षकों को नियमित किया। एसोसिएशन का कहना है कि यह पूरी घटना दिखाती है कि दिल्ली सरकार ने कभी भी कश्मीरी शिक्षकों को नियमित करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
भाजपा दिल्ली के मुख्यमंत्री से सीखे कैसे की जाती है मदद
सिसोदिया ने सदन में भाजपा को नसीहत दी। कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री से सीखे कैसे मदद की जाती है। विस्थापित परिवार के हर सदस्य को प्रतिमाह 3250 रुपए दिया जा रहा है। विस्थापित शिक्षकों को नियमित किया गया है।
सिसोदिया ने एक वाकया बताते हुए कहा कि एक महिला शिक्षक इस बात पर रोने लगी थी कि उन्होंने अपना घर छोड़ा, जमीन छोड़ी, लेकिन उसके बाद भी सौतेला व्यवहार हो रहा है। मुख्यमंत्री को जब विस्थापित शिक्षकों पर हो रहे इस अन्याय का पता चला तो संज्ञान लिया। बिना किसी कागजात के तुरंत 233 शिक्षकों को नियमित किया गया। एक सेवानिवृत शिक्षिका पप्पी कॉल का पेंशन रोक लिया गया था। उपराज्यपाल के अधिन सर्विस डिपार्टमेंट ने कागजात मांग रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शपथपत्र ही कागजात मान लिया जाए और पेंशन जारी किया जाए।
200 करोड़ रुपया वेलफेयर में दिया जाए
सिसोदिया ने कहा कि अच्छी बात है कि कश्मीरी पंडितों के दु:ख को दिखाते हुए फिल्म बनाई गई। इस फिल्म ने कश्मीरी पंडितों के नाम पर 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की। अब समय है कि इस पैसे को उनके वेलफेयर में लगाया जाए, ताकि वर्षों से कश्मीरी पंडितों के जले हुए घर, उजड़े बागानों को ठीक किया जा सके।