फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   jnu student left study and became mukhiya in village

जेएनयू की पढ़ाई छोड़ पहुंचे गांव तो लोगों ने उड़ाया मजाक, सरपंच बन दिया करारा जवाब

Thu, 02 Jun 2016 05:22 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Jun 2016 05:22 PM IST
विज्ञापन
jnu student left study and became mukhiya in village

आमतौर पर अगर आपका कोई जानने वाला जेएनयू में रिसर्च स्कॉलर है तो आप उम्मीद करते हैं कि वो आगे चलकर शिक्षा की दिशा में कुछ बड़ा करने की सोचता होगा लेकिन, 30 वर्षीय अमृत आनंद ऐसा नहीं सोचते। 

विज्ञापन


यही कारण है कि जेएनयू से पढ़ाई करने के दौरान उन्होंने वापस अपने गांव जाने की सोची और उनका सपना था कि वो अपने गांव का मुखिया बनें।

गांव में सरपंच का चुनाव आते ही उन्होंने अपने सपने को साकार करने का फैसला किया और मैदान में उतर पड़े। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अमृत जेएनयू में जर्मन लिटरेचर की पढ़ाई कर रहे थे। 
विज्ञापन


जब वो अपने गांव में वापस गए और चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करने लगे तो उनके दोस्‍त उन पर हंसने लगे। दोस्तों ने उनसे पूछा भी कि आ‌खिर चु‌नाव छोड़कर गांव वापस आने की क्या जरुरत थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

चुनाव में उतरने पर गांववालों ने उड़ाया मजाक

jnu student left study and became mukhiya in village
JNU

यहां तक कि जब वो चुनाव में उतरे तो लोगों ने उन्हें 'दिल्ली का बाबू' कह कर उनका मजाक भी उड़ाया और ये तक कहा कि जैसे आया है वैसे ही चला भी जाएगा।

पसैल पंचायत से चुनाव में उतरे अमृत ने अपने खिलाफ लड़ रहे 23 लोगों को पराजित कर सभी आलोचको का मुंह बंद कर दिया। अमृत के पंचायत क्षेत्र में कुल 17 गांव आते हैं। 

अपनी इस जीत पर अमृत कहते हैं कि अब पढ़ाई छोड़कर दिल्ली वापस जाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। हालांकि वो चाहते हैं कि वो अपना रिसर्च वर्क जरूर पूरा करें।

किसान पिता के बेटे हैं अमृत

jnu student left study and became mukhiya in village

अमृत भले ही गांव के रहने वाले हैं लेकिन उनके घर में पढ़ने लिखने का माहौल पहले से ही है। उनके पिता किसान हैं और 15 बीघे जमीन पर खेती करते हैं। 

उनके छोटे भाई अमेरिका में रिसर्च कर रहे हैं और अमृत भी जेएनयू में रिसर्च करने से पहले दो साल तक एक कंपनी में काम कर चुके हैं।

पंचायत चुनाव में उतरने के फैसले के बारे में अमृत बताते हैं कि जब भी वो गांव आते उन्हें लगता कि गांव की कई ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें गांव का सरपंच अगर चाहे तो ठीक कर सकता है और गांव को कहीं ज्यादा बेहतर बनाया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed