जामिया में 13 दिन से भूख हड़ताल: ऑनलाइन क्लास का बहिष्कार, गेटों पर पुलिस से टकराव; छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप
रविवार को जामिया के गेट नंबर चार और सात पर दिनभर तनातनी का माहौल देखने को मिला। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के समर्थन में छात्र पहुंच रहे थे। मगर, जामिया छात्रों के लिए बंद होने के चलते किसी को प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। प्रवेश के लिए छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तकराव देखने को मिला।
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाली को लेकर जारी आंदोलन और सुरक्षा के चलते ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने के फैसले का छात्रों ने बहिष्कार का एलान किया है। इस संबंध में जामिया कुलपति प्रो. मजहर आसिफ को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया गया है। वहीं रविवार को जामिया के सभी गेट पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। परिसर में प्रवेश को लेकर सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच तनातनी देखने को मिली। दोपहर को गेट नंबर सात के बाहर हंगामा भी हुआ। इसके अलावा भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने प्रशासन पर पानी न देने और लाइट बंद करने का आरोप लगाया।
दिल्ली पुलिस गो बैक और मुर्दाबाद के लगे नारे
रविवार को जामिया के गेट नंबर चार और सात पर दिनभर तनातनी का माहौल देखने को मिला। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के समर्थन में छात्र पहुंच रहे थे। मगर, जामिया छात्रों के लिए बंद होने के चलते किसी को प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। प्रवेश के लिए छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तकराव देखने को मिला। छात्रों द्वारा दिल्ली पुलिस गो बैक और मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। गेट नंबर सात पर पहुंचे छात्राओं को पुलिस द्वारा जबरन हटाया गया। इस दौरान एक राजनीतिक दल का कार्यकर्ता भी समर्थकों के साथ पहुंचा। जिसको भी सुरक्षाकर्मियों द्वारा खदेड़ दिया गया। इस बीच पुलिस द्वारा छह-सात छात्रों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई।
हॉस्टल जाने में छात्राओं को हुई मुश्किल
जामिया प्रशासन द्वारा सभी गेट बंद रखने के फैसले के चलते हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को भी आवाजाही में मुश्किल हुई। छात्राओं को प्रवेश पाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। बता दें कि जामिया परिसर के बाहर सभी जगह सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए। जिससे कोई भी अंदर दाखिल न हो सकें। वहीं जामिया के बीएके, जीबी और बीएचएम हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें मौखिक तौर पर हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए जा रहे है कि कैंपस छात्रों के लिए बंद हो चुका है। ऑनलाइन कक्षाएं चलेंगी। इसके चलते घर चले जाएं। कैंटीन, लाइब्रेरी और सभी दरवाजों को बंद कर दिया गया है।
छात्रों ने की लाइब्रेरी और कैंटीन खोलने की मांग
जामिया छात्रों ने जामिया कुलपति और डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर को ईमेल के जरिए पत्र लिखकर ऑनलाइन कक्षाओं के बहिष्कार का एलान किया है। छात्रों ने सेंट्रल लाइब्रेरी, कैंटीन और विश्वविद्यालय के सभी गेट तत्काल खोलने की मांग की है। छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन के इस फैसले से उनके शैक्षणिक और लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करता है। छात्रों का कहना है कि जब देश में कोई आपातकाल या लॉकडाउन नहीं है, तो परिसर की गतिविधियों पर इस तरह की रोक लगाना अनुचित है।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का पानी बंद करने का आरोप
बता दें कि जामिया में 12 अक्तूबर से छात्रों की भूख हड़ताल जारी है। इस बीच 17 अक्तूबर को छात्रों को हटाने पर काफी बवाल हुआ था। 24 अक्तूबर को भी प्रशासन और छात्रों के बीच टकराव देखने को मिला था। भूख हड़ताल पर जासिम अली, एबिन, रिहान हैदर, रिहान पंवार और छात्रा रिदा नौशाद बैठी हुई है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र रेहान हैदर ने आरोप लगाया कि उनको पीने के लिए मिलना वाली पानी बंद कर दिया गया है। यहां तक कि लाइट भी बंद कर दी गई। गेट के बाहर पानी की बोतलें तक अंदर नहीं आने दी जा रही है। रविवार को जामिया कुलपति भी परिसर में आए थे। लेकिन उन्होंने कोई मुलाकात छात्रों से नहीं की।
छात्रों की तबीयत रही बिगड़
रेहान ने बताया कि छात्रों ने बातचीत के लिए दोबारा से एक मसौदा प्रशासन को भेजा है। उम्मीद है कि प्रशासन छात्र संघ चुनाव बहाली सहित दूसरी मांगों पर विचार करेगा। वहीं लंबी भूख हड़ताल का असर छात्रों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। छात्र रेहान हैदर ने कहा कि जासिम का सात किलोग्राम, एबिन का छह किलोग्राम और रेहान पंवार का चार किलोग्राम और मेरा सात किलोग्राम वजन कम हो गया है। वहीं भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने गालिब लॉन की जगह अब राजनीतिक विज्ञान विभाग के गलियारे में डेरा डाल दिया है। हालांकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का टेंट अभी भी लगा हुआ है। शनिवार को देर रात बरसात के चलते कई छात्र गलियारे में भी चले गए थे।