सिर से जुड़े दो भाइयों जग्गा-बलिया का वर्ष 2017 में हुआ था ऑपरेशन, आज एम्स से होगी विदाई
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जग्गा और बलिया, दो जुड़वां भाई, जो एक सिर के साथ पैदा हुए थे। इन दोनों भाइयों के बारे में आप अच्छे से जानते होंगे। करीब दो साल और दो माह एम्स में रहने के बाद ये अब घर वापसी करने वाले हैं। शुक्रवार को इनकी विदाई में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बड़ा समारोह भी करने जा रहा है।
14 जुलाई 2017 को ओड़िशा सरकार की मदद से दिल्ली एम्स आए इन दोनों भाइयों को अलग-अलग करने का फैसला लेने में डॉक्टरों को छह माह का वक्त लग गया था। कई विभागों की टीमों के आपसी चर्चा और अंतरराष्टरीय विशेषज्ञों से केस पर अध्ययन के बाद 24 अक्तूबर 2017 को दोनों भाइयों का ऑपरेशन शुरू हुआ।
एम्स के डॉक्टर, नर्स, रेजीडेंट पैरामेडिकल स्टाफ करीब 100 सदस्यों की टीम 25 घंटे तक ऑपरेशन थियेटर में रही। दो ऑपरेशन को एकसाथ रखते हुए जग्गा और बलिया का ऑपरेशन शुरू हुआ था। इससे पहले डॉक्टरों ने इन भाइयों के सिर का 3डी मॉडल अमेरिका से मंगा लिया था। इसका फायदा ये हुआ कि डॉक्टरों को पहले से ही जग्गा और बलिया के सिर और धमनियों के जुड़ाव के बारे में पता चल गया था। साथ ही कितना हिस्सा काटना है? ये भी पता चल गया था।
अंग्रेजी भी सीख रहे दोनों
ऑपरेशन से पहले और बाद के 3डी मॉडल अमर उजाला ने 12 फरवरी को न सिर्फ प्रकाशित किए, बल्कि दुनिया भर में इतिहास रचने वाले एम्स ने इस चुनौती को कैसे पूरा किया? इसके बारे में पूरी जानकारी दी गई। तब से लेकर अब तक जग्गा और बलिया अपने माता पिता के साथ प्राइवेट वार्ड में रह रहे हैं।
डॉक्टरों की एक विशेष टीम पिछले दो साल से उनकी निगरानी कर रही है। एम्स में जग्गा और बलिया का दो बार जन्मदिन मनाया जा चुका है। उनका पूरा कमरा खिलौने इत्यादि से भरा हुआ है। एम्स ने पहली बार इस केस से जुड़ी पूरी टीम को प्रबंधन ने सम्मानित भी किया था।
हिंदी-अंग्रेजी भी सीखने लगे हैं जग्गा-बलिया
एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि ऐसा पहली बार है जब करीब 800 दिन रहने के बाद मरीज को घर भेजा जा रहा है। जग्गा और बलिया के प्रति पूरे स्टाफ का खास लगाव है। डॉक्टर भी उनके साथ खेलना पंसद करते हैं। ये दोनों भाई हिंदी अंग्रेजी भी सीखने लगे हैं। ए से लेकर जेड और अ से लेकर ज्ञ तक इन्हें अक्षर याद हो रहे हैं। ओड़िशा निवासी होने के कारण इनके माता पिता हिंदी और अंग्रेजी भाषा नहीं जानते हैं।
कपड़ों से लेकर खिलौने तक एम्स ने दिए
जग्गा और बलिया को ऑपरेशन के बाद विशेष निगरानी में रखा गया। इस दौरान काफी उतार चढ़ाव भी इन बच्चों ने महसूस किए, लेकिन एम्स ने बच्चों को कपड़ों से लेकर खिलौने इत्यादि तक मुहैया करा इनके आसपास बेहतर वातावरण बनाए रखा ताकि ये किसी भी तरह के मानसिक दवाब में न आएं।
जग्गा है शरारती, बलिया से करता है मस्ती
एम्स की एक नर्स ने बताया कि जग्गा बहुत शरारती है। वह दिन भर मस्ती करता रहता है। हालांकि बलिया अभी कमजोर है। बलिया का स्वभाव काफी सरल जैसा है। वह मुस्कराता रहता है और जग्गा दिन भर कमरे में मस्ती करता है। दोनो भाई अपने माता पिता से ज्यादा नर्स और डॉक्टरों के साथ रहना पसंद करते हैं। लंबा समय साथ होने के कारण इनसे लगाव होना भी स्वाभाविक है।
बलिया को देते थे डोज, जग्गा खिंचता था अपने अंदर
डॉक्टरों के मुताबिक, ऑपरेशन टेबल पर जब जग्गा और बलिया को अलग किया जा रहा था उस वक्त सबसे बड़ी चुनौती पूरी टीम को इन भाईयों की शारीरिक संरचना के रूप में मिली। बलिया को जो भी डोज दे रहे थे वह उसके शरीर में नहीं, बल्कि जग्गा के शरीर में जा रही थी। इस तरह से जग्गा को दोहरी खुराक मिल रही थी और बलिया के शरीर में कुछ भी नहीं जा रहा था। काफी मशक्कत के बाद जब इनके बीच धमनियों के जुड़ाव का पता चला तो फिर से ऑपरेशन की योजना में बदलाव किए गए और कुछ धमनियों को अतिरिक्त भी लगाया गया।