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Trade Fair 2023: कश्मीरी शॉल दे रही पर्यावरण का संदेश, लुभा रहे फैब्रिक से बने आभूषण, जानें और क्या-क्या खास

Fri, 24 Nov 2023 08:11 AM IST
आकाश दुबे आशीष सिंह,  अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष सिंह,  अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 24 Nov 2023 08:11 AM IST
सार

मेले में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, बिहार, झारखंड और कई अन्य प्रदेशों से आई महिलाओं ने अपनी कला का जादू बिखेरा है। महिला उद्यमियों का कहना है कि यह मेला उनके सपनों को उड़ान और उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का एक बड़ा मंच है।

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International Trade Fairs Women entrepreneurs are flying with their dreams in trade fair
अंतराष्ट्रीय व्यापार मेला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यदि आप प्रगति मैदान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में घूमने का मन बना रहे हैं तो आप हॉल नंबर एक से पांच का रुख कर सकते हैं। यहां अलग-अलग राज्यों से आईं महिला उद्यमियों के उत्पाद आपका मन मोह लेगा। मेले में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, बिहार, झारखंड और कई अन्य प्रदेशों से आई महिलाओं ने अपनी कला का जादू बिखेरा है। उसमें पर्यावरण का संदेश देती कश्मीर शॉल हो या केरल की महिलाओं द्वारा नारियल के छिलकों से बने रसोई के बर्तन। महिला उद्यमियों का कहना है कि यह मेला उनके सपनों को उड़ान और उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का एक बड़ा मंच है। हर वर्ष उन्हें मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है।

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सबको लुभा रहे फैब्रिक से बने आभूषण
झारखंड पवेलियन में जमशेदपुर से आई काजल नंदी इसी की एक मिसाल हैं। वह फैब्रिक से सुंदर आभूषण बना रही हैं। उनके आभूषणों में आदिवासी संस्कृति, प्रकृति का संरक्षण व महिलाओं के उत्थान की कहानी बयान कर रहे हैं। मेले में पहली बार आई काजल ने बताया कि पहले घर वाले साथ नहीं दे रहे थे, लेकिन व्यवसाय जैसे बढ़ता गया, तो सब साथ देने लगे हैं। वह अपने परिवार की पहली लड़की हैं, जिन्होंने उद्यमी बनने का सपना देखा और उसे अब खुलकर जी रही हैं।

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झारखंड राज्य दिवस मनाया
मेले में झारखंड राज्य दिवस मनाया गया। इसमें झारखंड की लोक संस्कृति को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर, सूड़ा के सीईओ अमित कुमार, उद्योग विभाग के सचिव जितेन्द्र कुमार सिंह मौजूद रहे। मिथिलेश ने कहा कि मेले में राज्य अपने विकास को प्रदर्शित कर रहा है। प्रदेश अपनी खनिज संपदा और कला संस्कृति के लिए अलग पहचान रखता है।

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कश्मीरी शॉल दे रही पर्यावरण का संदेश
जम्मू और कश्मीर की व्यवसायी महिलाएं भी अपनी हथकरघा कलाकृति को वैश्विक मंच पर ला रही हैं। जम्मू-कश्मीर पवेलियन में श्रीनगर, जम्मू, गुलमर्ग व अन्य इलाकों से आईं महिलाएं अपने हाथों की महीन हस्तशिल्प से बने उत्पादों को बेच रही हैं। ऐसे ही जम्मू से आई इल्मा काजमी हाथों से बुने गए विशेष शॉल, जैकेट, कोट व अन्य उत्पाद यहां लाई हैं। वह कहती हैं कि उनका मकसद महज शॉल, जैकेट या कोट बनाना नहीं है, वो तो प्रकृति और पर्यावरण को लेकर लोगों को जागरूक करना चाहती हैं। अपनी कला से वह काफी खुश भी हैं। उन्होंने कहा कि हर भारतवासी को प्रकृति से प्रेम करना चाहिए। वह अपनी कला से इसको की आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। वह शॉल में इस तरह की धागा पिरो रही हैं, जिसमें पेड़ों को बचाने का संदेश, तो कोई पानी की अहमियत को समझा रहा है। उनके उत्पाद अमेरिका, न्यूजीलैंड, कनाडा समेत कई देशों में पसंद किए गए हैं। 

नारियल के छिलकों से बने बर्तन आकर्षण का केंद्र
केरल पवेलियन का कुटुम्ब स्टॉल दर्शकों को खूब लुभा रहा है। खास बात यह है कि महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा इसका संचालन किया जा रहा है। इसमें मसाले, नारियल तेल, कॉफी, पहाड़ियों से आई चाय, अचार से लेकर नारियल के छिलकों से बने रसोई के बर्तन, आयुर्वेदिक तेल जैसे कई उत्पाद हैं। स्टॉल की संचालिका मोहंती ने बताया कि उनके साथ 300 महिलाएं कार्य करती हैं। इनमें केवल वहीं महिलाएं शामिल हैं जो किसी रूप से प्रताड़ित होकर घर से बाहर रह रही हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने जीवन में काफी संघर्ष किया, जिसके बाद इस उद्योग को शुरू किया। वह कहती हैं कि कई बार उनके घर में खाना तक नहीं होता था, मुश्किल समय में उन्होंने स्थानीय चीजें बेचनी शुरू की।

मेले में हरियाणा की झूमर और बंदरवाल के मुरीद हो रहे लोग
प्रगति मैदान दिल्ली में चल रहे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले के हरियाणा मंडप में उसकी पुरातन संस्कृति की परिचायक झूमर, फूलझड़ी, बंदरवाल के दर्शक मुरीद हो रह हैं। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं सोनीपत के गांव अटायल निवासी कौशल्या देवी के स्टाॅल पर हरियाणवीं पुरातन संस्कृति को देखने व उससे संबंधित जानकारी हासिल करती नजर आती हैं। कौशल्या देवी ने बताया कि उनकी पांचवीं पीढ़ी हरियाणवीं धरोहर को बचाने के लिए काम कर रही है। पुरानी संस्कृति और विरासत से जुड़ी सभी वस्तुएं यहां है। घर पर जब भी समय मिलता है तो झूमर, फूलझड़ी बना लेती है। हरियाणा मंडप में कौशल्या देवी की स्टॉल पर सेल्फी लेने का क्रेज अधिक देखने को मिल रहा है । यहां झूमर के सामने कौशल्या देवी के साथ युवतियां फोटो करवा रही हैं।

पचास हजार दर्शक पहुंचे, सप्ताहांत में आ सकते हैं 1 लाख
पार मेले के सप्ताहांत पर भीड़ उमड़ सकती है। अभी प्रति दिन 45 से 50 हजार दर्शक रोजाना पहुंच रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी 50 हजार से अधिक दर्शक पहुंचे। शनिवार से मेले में एक लाख तक लोगों के आने की उम्मीद है। मेला प्रशासन का कहना है कि इस बार लगातार तीन अवकाश पड़ रहे हैं और यह मेले के अंतिम तीन दिन होंगे। ऐसे में हम मानकर चल रहे हैं कि दर्शकों की संख्या रोजाना एक लाख तक पहुंच सकती है। भीड़ को देखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। हॉल में प्रबंधन को बेहतर बनाए रखने के लिए स्लॉट की व्यवस्था की जा सकती है। इन सभी के लिए शनिवार की सुबह से ही स्टॉल के अंदर की भीड़ की मॉनिटरिंग की जाएगी। इस बार पिछले मेले के मुकाबले हर दिन 10 फीसदी तक दर्शक की संख्या ज्यादा है। 

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