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एनसीआर में बढ़े दमा रोगी, प्रदूषण के चलते लोगों को खांसी, जुकाम समेत हो रहीं अन्य बीमारियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 02 Nov 2018 03:06 AM IST
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नोएडा में प्रदूषण
- फोटो : अमर उजाला
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आजकल हर दूसरे या तीसरे शख्स को खांसी, बलगम अधिक आना, गले में सूजन होना, गले में इंफेक्शन समेत सांस की बीमारियां हो रही हैं। एनसीआर में प्रदूषण से उपजे स्मॉग के चलते यह समस्या बढ़ती जा रही है।
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शारदा अस्पताल के आईसीयू इंचार्ज और सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अरुण लखनपाल ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब ढाई सौ से तीन सौ मरीज आ रहे हैं। दमे के मरीज भी दोगुने हो गए हैं। पीपीएम-10 या इससे अधिक बड़े धूल-मिट्टी के कणों को तो हमारी नाक के रोएं, गले की नली में म्यूकस (रसायन), फेफड़ों में मौजूद बीमारी से लड़ने वाले तत्व दूर कर देते हैं। इससे अधिकतर बलगम या जुकाम जैसी समस्या होती है।
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वहीं नजला, साइनोसाइटिस, आंख में एलर्जी, नाक में जलन आदि होते हैं। लेकिन पीपीएम-2.5 या इससे छोटे धूल, धुएं के कण लोगों के फेफड़ों में अंदर तक जाकर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देते हैं। इससे सांस की नली में सूजन आ जाती है। गले में इंफेक्शन होता है और दमा के मरीज के लिए कई बार जानलेवा स्थित आ जाती है।
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पूरे साल रहती है प्रदूषण की दिक्कत
डॉ. अरुण ने बताया कि सर्दियों में हवा न चलने और पर्यावरण में आर्र्दता अधिक होने के चलते प्रदूषण की परत वातावरण में बन जाती है। यह हमें अभी दिखाई देती है, लेकिन वर्ष भर दिल्ली-एनसीआर में हाइड्रोकार्बन, पेट्रोलियम, हैवी मेटल्स के कणों से प्रदूषण में इसी स्थिति से गुजरना पड़ता है।
रंग निकालने वाले पटाखे
पटाखों में रंग के लिए डेरेलियम, कैडियम और लेड पदार्थ का उपयोग किया जाता है। डॉ. अरुण ने बताया कि हवा में उत्सर्जित यह पदार्थ ब्लड कैंसर और ब्लैडर (पेशाब की थैली) कैंसर के भी कारक होते हैं।
कैसे बचें
सर्जिकल मास्क पहनने से कोई फायदा नहीं, घर के बाहर जाएं तो मल्टी लेयर मास्क का उपयोग करें। वहीं एंटी पॉल्यूशन इंडस्ट्रियल मास्क (एफएफपी-1, 2,3) या एन 90 या इससे ऊपर के मास्क बचाव कर सकेंगे।