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Delhi NCR News: एआई के दौर में शोध को आसान बनाने पर आईआईटी दिल्ली में मंथन
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-300 से अधिक विशेषज्ञ जुटे, शोध को सुलभ बनाने और विश्वसनीयता बनाए रखने पर दिया जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक शोध प्रबंधों पर 29वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (ईटीडी 2026) का आयोजन हुआ। एआई के दौर में शोध प्रबंध विषय पर हुई संगोष्ठी में भारत समेत सात देशों के 300 से अधिक शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। आईआईटी दिल्ली के केंद्रीय पुस्तकालय ने अमेरिका की नेटवर्क्ड डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ थीसिस एंड डिसर्टेशन के सहयोग से आयोजन किया। उद्घाटन सत्र में नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास ने कहा कि कई महत्वपूर्ण शोध लोगों तक नहीं पहुंच पाते, क्योंकि उन्हें खोजना और दूसरे शोध से जोड़ना मुश्किल होता है। उन्होंने शोध की पहुंच बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया। संगोष्ठी में शोध सामग्री खोजने, सुरक्षित रखने, विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराने, कॉपीराइट और अकादमिक ईमानदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। शोध सामग्री के संरक्षण और भारतीय भाषाओं में अनुवाद से जुड़ी कार्यशालाएं भी हुईं। आयोजन में 49 शोध पत्रों और 13 पोस्टर सारांशों को शामिल करते हुए 754 पृष्ठों की कार्यवाही प्रकाशित की गई। सभी शोध पत्रों पर समीक्षा के बाद अमेरिकी शोध पत्रिका में प्रकाशन के लिए विचार होगा। भारत में पहली बार संगोष्ठी के लिए विशेष मोबाइल एप भी पेश किया गया। समापन समारोह में उत्कृष्ट शोध पत्रों, प्रस्तुतियों, पोस्टरों और नए विचारों के लिए पुरस्कार दिए गए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक शोध प्रबंधों पर 29वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (ईटीडी 2026) का आयोजन हुआ। एआई के दौर में शोध प्रबंध विषय पर हुई संगोष्ठी में भारत समेत सात देशों के 300 से अधिक शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। आईआईटी दिल्ली के केंद्रीय पुस्तकालय ने अमेरिका की नेटवर्क्ड डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ थीसिस एंड डिसर्टेशन के सहयोग से आयोजन किया। उद्घाटन सत्र में नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास ने कहा कि कई महत्वपूर्ण शोध लोगों तक नहीं पहुंच पाते, क्योंकि उन्हें खोजना और दूसरे शोध से जोड़ना मुश्किल होता है। उन्होंने शोध की पहुंच बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया। संगोष्ठी में शोध सामग्री खोजने, सुरक्षित रखने, विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराने, कॉपीराइट और अकादमिक ईमानदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। शोध सामग्री के संरक्षण और भारतीय भाषाओं में अनुवाद से जुड़ी कार्यशालाएं भी हुईं। आयोजन में 49 शोध पत्रों और 13 पोस्टर सारांशों को शामिल करते हुए 754 पृष्ठों की कार्यवाही प्रकाशित की गई। सभी शोध पत्रों पर समीक्षा के बाद अमेरिकी शोध पत्रिका में प्रकाशन के लिए विचार होगा। भारत में पहली बार संगोष्ठी के लिए विशेष मोबाइल एप भी पेश किया गया। समापन समारोह में उत्कृष्ट शोध पत्रों, प्रस्तुतियों, पोस्टरों और नए विचारों के लिए पुरस्कार दिए गए।