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गुरु द्रोण की धरती से दिया गया कन्या सृजन का मूल आधार का संदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 04 Feb 2017 12:18 AM IST
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hindu mela
- फोटो : अमर उजाला
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हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला के माध्यम से शुक्रवार को गुरु द्रोण की धरती गुरुग्राम से यह संदेश दिया गया कि कन्या ही सृजन का मूल आधार है। उससे ही जन्म है, परिवार है और संस्कार है। इसलिए कन्या पूज्यनीय है, वंदनीय है।
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कन्या के महत्व को भूले हुए इस समाज को एक बार फिर से महिला और इसकी महत्ता के बारे में बताते लिए शहर के सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली ग्राउंड में कन्या वंदन का आयोजन किया गया। हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला के दूसरे दिन हजारों कन्याओं की वंदना का कार्यक्रम अभिभूत करने वाला रहा।
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मेला परिसर में सुबह 9:00 बजे से ही विभिन्न स्कूलों की छात्राओं और प्रदेश भर से बालिकाओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। देखते ही देखते लेजर वैली ग्राउंड में कन्या वंदना के लिए निर्धारित पंडाल में बालिकाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति हो गई। उनके साथ उनके अभिभावक भी आए।
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कन्या पूजन के दौरान साध्वी श्वेता भारती, आनंदमूर्ति गुरु मां सहित अन्य व्यक्तियों की मौजूदगी में यह पूजन हुआ। हर कन्या का विधिवत पूजन व सत्कार किया गया। पारंपरिक भारतीय परिधानों में सुसज्जित कन्याओं के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा व वात्सल्य की भावना देखते ही बन रही थी।
साध्वी श्वेता भारती ने कहा कि कन्या का इस समाज और पृथ्वी पर विशिष्ट स्थान है। वह विभिन्न स्वरूपों में सृजन, प्रेम, त्याग, बलिदान व समर्पण को प्रदर्शित करती हैं। कभी मां, कभी बहन तो कभी अर्धांगिनी के रूप में वह अपनी भूमिका का निर्वहन बड़ी ही सजगता और तन्मयता से करती हैं। कन्या पूजन के मौके पर आनंदमूर्ति गुरु मां ने कहा कि जिस समाज में कन्याओं का, नारी का अपमान व अवहेलना होती है वह समाज कलंकित हो जाता है। वहां धर्म, सत्य, न्याय व समानता का कोई स्थान नहीं बचता।
यही कारण है कि हिंदू संस्कृति और सभ्यता में नारी को बराबर का ही नहीं श्रेष्ठता का दर्जा दिया गया है। आज महिलाओं के खिलाफ जब कहीं से भी अत्याचार होता है तो पवित्र आत्माओं का हृदय पिघलने लगता है।
इन्होंने बढ़ाया नारियों का मान
हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला के दौरान यह दिखाया गया कि समाज में नारी की भूमिका कितनी अहम है। उसी के बलबूते पर ही समाज खड़ा है। नारी ही समाज की धुरी है। माता सीता, अपाला, घोषा, जीजा बाई, रानी लक्ष्मीबाई जैसी नारियों ने युग परिवर्तन का काम किया है। इन्होंने नारी को सशक्त रूप में समाज में स्थापित करने का काम किया है। इन्हीं नारियों ने महाराणा प्रताप, शिवाजी, भगत सिंह व नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान योद्धाओं व विवेकानंद जैसे मनीषी को जन्म दिया है।