फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   High Court said that sacred duty to provide financial assistance wife

Delhi High Court: हाईकोर्ट की टिप्पणी, पत्नी को वित्तीय सहायता प्रदान करना पवित्र कर्तव्य

Thu, 21 Jul 2022 05:06 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 21 Jul 2022 05:06 AM IST
सार

अदालत ने पत्नी को गुजाराभत्ता देने से इनकार करने वाले पति की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पत्नी को वित्तीय सहायता प्रदान करना पवित्र कर्तव्य है। 

विज्ञापन
High Court said that sacred duty to provide financial assistance wife
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को वित्तीय सहायता प्रदान करना पवित्र कर्तव्य है। इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है जब तक कि अदालत यह आदेश न दे कि पत्नी कानूनी रूप से अनुमेय आधार पर पति से भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं है। अदालत ने पति द्वारा स्वयं को बेरोजगार बताते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा तय 10 हजार रुपये देने में असमर्थता जताने संबंधी पति की अपील को खारिज करते हुए यह टिप्प्णी की। अदालत ने पाया कि पति ने अदालत से कई तथ्यों को छिपाया है।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार ने अपने फैसले में कहा याचिकाकर्ता का तर्क कि उसके पास आय का कोई स्रोत नहीं है उसका वर्तमान मामले के तथ्यों के तहत अपनी पत्नी को बनाए रखने के दायित्व से मुक्त करने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने कहा अनुभव से भी पता चलता है कि पार्टियों द्वारा वास्तविक आय का सामान्य रूप से खुलासा नहीं किया जाता है। ऐसी परिस्थितियों में, पार्टियों की स्थिति और उनकी जीवन शैली आदि पर विचार करते हुए एक यथार्थवादी निष्कर्ष पर आना हमेशा सुरक्षित होता है। 
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि दस्तावेज यह भी दर्शाते हैं कि उसने म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया है और उससे नियमित लाभांश प्राप्त हो रहा है। उपरोक्त परिस्थितियों में यह सुरक्षित रूप से निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि याचिकाकर्ता अपनी सही आय को नहीं बताया। वहीं अपने मामा के साथ ड्राइवर के रूप में उनका रोजगार भी अत्यधिक अविश्वसनीय है। याचिकाकर्ता जिस जीवनशैली से रहा रहा है उससे स्पष्ट है कि वह न केवल अपनी आजीविका बल्कि अपनी पत्नी की भी आजीविका चलाने के लिए पर्याप्त धन कमाने में सक्षम है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत ने कहा पत्नी ने दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर रखते हुए स्पष्ट रूप से साबित कर दिया है कि याचिकाकर्ता एक अच्छा वेतन अर्जित करने में सक्षम है। याचिकाकर्ता ने यह भी स्वीकार किया कि वह लगभग 30 हजार रुपये प्रति माह कमा रहा था। ऐसे में याचिकाकर्ता का यह तर्क स्वीकार करने योग्य नहीं है कि वह दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के बराबर कमा रहा है, यह अस्वीकार्य है।
अदालत ने कहा याचिकाकर्ता का जीवन स्तर न्यायालय से प्रासंगिक जानकारी को छिपाने में उसका आचरण और यह तथ्य कि वह न केवल योग्य है बल्कि अच्छा पैसा कमाने में सक्षम है। ऐसे में फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।

क्या है मामला
दोनों का विवाह 25 अक्तूबर 2015 को हुआ था, बाद में आपसी विवाद होने पर दोनों अलग रहने लगे। महिला ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर गुजारे भत्ते की मांग की। उसने पति पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके पति गुरुग्राम में एनआईआईटी कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर की नौकरी कर रहे हैं और 40 हजार रुपये प्रति माह कमा रहे हैं।  इसके अलावा होशियारपुर, पंजाब से किराए के रूप में 40 हजार रुपये प्रति माह की आय हो रही है। उसके पति का अपना आवासीय आवास है व उनके पति पर कोई देनदारी नहीं है और उनके पति की मां को भी 25,000 रुपये प्रति माह की पेंशन मिल रही है और वह इकलौता बेटा है।वहीं दूसरी तरफ की कोई आय नहीं है और अपनी विधवा मां के पास रह रही है। उसने अदालत से गुजाराभत्ता के लिए प्रति माह 40 हजार रुपये व 25 हजार रुपये कानूनी खर्च के दिलवाने का आग्रह किया।

पति ने सभी आरोप झूठे बताते हुए कहा कि पत्नी उसे मानसिक क्रूरता और यातना पंहुचा रही है और उसने बिना कारण घर छोड़ दिया। उसकी पत्नी ने सीएडब्ल्यू प्रकोष्ठ के समक्ष झूठी शिकायत की और उसके बाद वह स्वयं सीएडब्ल्यू प्रकोष्ठ द्वारा की जा रही परामर्श कार्यवाही के दौरान अनुपस्थित रही। वर्तमान में उनक नौकरी चली गई व बेरोजगार हो गए। वहीं पत्नी अच्छी तरह से योग्य है और अच्छी कमाई कर रही है, इसलिए वह किसी भी रखरखाव के लिए हकदार नहीं है।

फैमिली कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखने के बाद कहा कि पत्नी भरण-पोषण के लिए प्रति माह 10,000 रुपये की राशि की हकदार है।पति ने इस फेसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए फैसले को गलत बताया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed