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Delhi NCR News: हाईकोर्ट ने यूपीएससी दिव्यांग उम्मीदवार को किया बहाल
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- खंडपीठ ने रेलवे बोर्ड और कैट के आदेशों को रद्द करते हुए उम्मीदवार को बहाल करने का निर्देश दिया
- कहा- आधिकारिक दिव्यांगता प्रमाणपत्र को रद्द नहीं किया जा सकता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में यूपीएससी की इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (ईएसई) 2017 के उम्मीदवार मनीष कुमार को बहाल कर दिया है। अदालत ने कहा कि सरकारी तौर पर जारी आधिकारिक दिव्यांगता प्रमाणपत्र को प्रशासनिक अधिकारियों की चिकित्सा जांच के आधार पर रद्द या खारिज नहीं किया जा सकता। मनीष कुमार ने शारीरिक रूप से दिव्यांग श्रेणी में परीक्षा दी थी और प्रारंभिक, मुख्य तथा साक्षात्कार सभी चरण सफलतापूर्वक पास किए थे। उनके पास भारत सरकार द्वारा जारी यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड सहित कई आधिकारिक प्रमाणपत्र थे, जिनमें उन्हें 45 प्रतिशत लोकोमोटर दिव्यांगता प्रमाणित की गई थी। इसके बावजूद रेलवे बोर्ड की चिकित्सा जांच में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया और उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा।
न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की खंडपीठ ने रेलवे बोर्ड और कैट के आदेशों को रद्द करते हुए उम्मीदवार को बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र को अन्य चिकित्सा बोर्ड की राय से ओवररूल नहीं किया जा सकता।
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- कहा- आधिकारिक दिव्यांगता प्रमाणपत्र को रद्द नहीं किया जा सकता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में यूपीएससी की इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (ईएसई) 2017 के उम्मीदवार मनीष कुमार को बहाल कर दिया है। अदालत ने कहा कि सरकारी तौर पर जारी आधिकारिक दिव्यांगता प्रमाणपत्र को प्रशासनिक अधिकारियों की चिकित्सा जांच के आधार पर रद्द या खारिज नहीं किया जा सकता। मनीष कुमार ने शारीरिक रूप से दिव्यांग श्रेणी में परीक्षा दी थी और प्रारंभिक, मुख्य तथा साक्षात्कार सभी चरण सफलतापूर्वक पास किए थे। उनके पास भारत सरकार द्वारा जारी यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड सहित कई आधिकारिक प्रमाणपत्र थे, जिनमें उन्हें 45 प्रतिशत लोकोमोटर दिव्यांगता प्रमाणित की गई थी। इसके बावजूद रेलवे बोर्ड की चिकित्सा जांच में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया और उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा।
न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की खंडपीठ ने रेलवे बोर्ड और कैट के आदेशों को रद्द करते हुए उम्मीदवार को बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र को अन्य चिकित्सा बोर्ड की राय से ओवररूल नहीं किया जा सकता।
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