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हाईकोर्ट ने पूछा- किस आधार पर तय होता है एसिड हमले में मुआवजा, मांगा जवाब
Tue, 14 May 2019 06:06 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 14 May 2019 06:06 AM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट
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एसिड हमलों की पीड़ितों को मुआवजा का निर्धारण किस आधार पर तय किया जाता है। हाईकोर्ट ने यह सवाल एक संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण से पूछा है।
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मुख्य न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की खंडपीठ ने एसिड पीड़ितों को मुआवजा किस आधार पर तय किया जाता है और इसका फार्मूला क्या है। खंडपीठ ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्राधिकरण को मुआवजा नीति से संबंधित सारे दस्तावेज पेश करने का आदेश दिया है। महिला ने उसे दिए गए मुआवजे को बढ़ाने के लिए याचिका दायर की है।
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खंडपीठ ने इस मामले में दिल्ली सरकार से भी जवाब मांगते हुए सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख तय की है। महिला ने 25 हजार रुपये मुआवजा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने का आग्रह किया था। इस याचिका को एकल पीठ ने खारिज कर दिया था। एकल पीठ ने 26 फरवरी के अपने फैसले में कहा था कि महिला का दावा है उस पर एसिड फेंका गया और उसे पीने के लिए विवश किया गया, लेकिन उसके जख्म बेहद हल्के व उसके दावे की पुष्टि नहीं करते।
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इसके मद्देनजर उसे कोई मुआवजा देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट के इस निर्णय को चुनौती देते हुए महिला ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक वह एसिड से झुलसी थी, परंतु एकल पीठ ने इस तथ्य पर विचार नहीं किया। उसका कहना है कि एसिड हमले के मामले में मुआवजा केवल शारीरिक चोट के लिए नहीं बल्कि, मानसिक पीड़ा के लिए भी दिया जाता है।