जेएनयू नजीब अहमद केस: सीबीआई पर दबाव की बात नहीं मान सकते: हाईकोर्ट
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सीबीआई जांच की निगरानी की गई है और याची की यह बात नहीं मानी जा सकती कि एजेंसी ने निष्पक्ष जांच नहीं की अथवा क्लोजर रिपोर्ट के नतीजे पर पहुंचने के लिए उस पर कोई प्रभाव या राजनीतिक विवशता थी। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद गुमशुदगी मामले में उसकी मां फातिमा नफीस की याचिका का निबटारा करते हुए की।
जस्टिस एस मुरलीधर व जस्टिस विनोद ने सीबीआई को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने अनुमति देते हुए कहा कि केस की कोर्ट ने निगरानी की और अब सीबीआई इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की स्थिति में है। इसके बाद क्या होना चाहिए, इसका फैसला वह अदालत करेगी जहां क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।
खंडपीठ ने कहा सीबीआई को अलग करते हुए एसआईटी बनाने और उसके कार्य की निगरानी की याची की मांग को खारिज किया जाता है। याची अपनी आपत्ति व अपना पक्ष निचली अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद रख सकती है।
याची के वकील कोलिन गोंस्लविस ने कोर्ट के समक्ष कहा कि यह एक राजनीतिक मामला है और सीबीआई ने राजनीतिक दबाव के चलते इस केस में कुछ नहीं किया। सीबीआई ने उन संदिग्ध नौ छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ नहीं की, जिन्होंने नजीब के साथ मारपीट की थी।
सीबीआई ने करीब 18 महीने तक केस की जांच करने के बाद चार सितंबर 2018 को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की बात हाईकोर्ट में कही थी। सीबीआई का कहना था कि वह हर पहलू से जांच कर चुकी है, लेकिन उसे ऐसा कोई सुराग नहीं मिला है कि नजीब के साथ किसी ने कोई अपराध किया है।
गौरतलब है कि जेएनयू में एमएससी का छात्र 15 अक्तूबर 2016 से लापता है। उसकी मां फातिमा नफीस की मांग पर हाईकोर्ट ने केस की जांच 16 मई 2017 को सीबीआई को सौंपी थी।