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Gurugram News: अब प्रार्थना सभा में होगा संस्कृति एवं ज्ञान मंथन

Mon, 05 Oct 2026 11:02 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 11:02 PM IST
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Now, a churning of culture and knowledge will take place during the prayer assembly.
लोककला, खानपान, वेशभूषा, भाषा और ऐतिहासिक स्थलों से कराया जाएगा परिचित
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नंबर गेम - 10 से 15 मिनट के सत्र में दी जाएगी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अब सरकारी प्राथमिक स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा केवल प्रार्थना और सामान्य गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगी। शिक्षा विभाग की नई पहल के तहत प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को देश की संस्कृति और इतिहास से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए प्रतिदिन 10 से 15 मिनट का विशेष संस्कृति एवं ज्ञान मंथन सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें बच्चों को देश के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संस्कृति, इतिहास और परंपराओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।

सत्र के दौरान विद्यार्थियों को अलग-अलग राज्यों की लोककला, खानपान, पारंपरिक वेशभूषा, भाषा और प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों के बारे में बताया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ देश की संस्कृति को समझने का अवसर देना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि छोटी कक्षाओं से ही विद्यार्थियों को देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति की जानकारी मिलने से उनका सामान्य ज्ञान बढ़ेगा।
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बच्चों को सवाल पूछने का भी मिलेगा मौका
इस पहल में विद्यार्थियों की भागीदारी को भी विशेष महत्व दिया गया है। प्रार्थना सभा के दौरान शिक्षक केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों को अपने विचार रखने और सवाल पूछने का अवसर भी दिया जाएगा। किसी राज्य की भाषा, खानपान, पहनावे या जीवनशैली को लेकर विद्यार्थियों के मन में सवाल होंगे तो शिक्षक उनकी जिज्ञासा दूर करेंगे। इस तरह प्रार्थना सभा को ज्ञान और संवाद का मंच बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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पोस्टर और लघु नाटक से रोचक बनेगा सत्र
शिक्षा विभाग ने प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि इस गतिविधि को केवल औपचारिकता न बनाया जाए। बच्चों की रुचि बनाए रखने के लिए पोस्टर, चित्र, दृश्य-श्रव्य सामग्री और लघु नाटकों का सहारा लेने का सुझाव दिया गया है। अलग-अलग राज्यों की संस्कृति को गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत करने से बच्चे उसे आसानी से समझ और याद कर सकेंगे।


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किताबी ज्ञान विद्यार्थियों के लिए जरूरी है, लेकिन जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए व्यावहारिक ज्ञान और मानसिक मजबूती भी आवश्यक है। - सुमिता रांगी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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