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Gurugram News: आधुनिक तकनीक से सुधरेगी पेयजल आपूर्ति
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जल घरों, बूस्टर स्टेशनों और मेन लाइनों में लगेंगे इलेक्ट्राॅनिक उपकरण, 17.5 करोड़ रुपये होंगे खर्च
लाइन टूटने पर कमांड सेंटर को तुरंत मिल जाएगी जानकारी
मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) साइबर सिटी में पेयजल आपूर्ति सुधारने पर आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने जा रहा है। इसके लिए जल शोधन संयंत्रों, बूस्टिंग स्टेशनों के अलावा पेयजल की बड़ी लाइनों में इलेक्ट्रानिक डिवाइस लगाए जाएंगे। केंद्रीकृत एकीकृत जल प्रबंधन प्रणाली से पेयजल आपूर्ति और सप्लाई पर सटीक नजर रखी जा सकेगी। दूसरा इस पूरे सिस्टम से जीएमडीए अपने कमांड सेंटर से निगरानी रख सकेगा। इस पर करीब 17.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है।
जीएमडीए शहर में पेयजल आपूर्ति को बेहतर करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए नए पानी शोधन संयंत्र के साथ लाइनों को दुरूस्त करा रहा है। जीएमडीए का मानना है कि बसई और चंदू वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पर्याप्त पानी की सप्लाई हो रही है। इसके बाद भी कई क्षेत्रों में पेयजल संकट बना रहता है। ऐसे में पानी कई जगहों पर व्यर्थ ही खराब हो रहा है। ऐसे में इसकी निगरानी रखने के लिए तकनीक का प्रयोग करने जा रहा है। इसके लिए जीएमडीए दोनों पानी शोधन संयंत्रों के अलावा शहर के सभी बूस्टिंग स्टेशनों और मेन लाइनों में इलेक्ट्राॅनिक उपकरण लगवाएगा। इससे डीएमडीए शोधित पानी और बूस्टिंग स्टेशनों पर पहुंचने वाले पानी का सही आंकलन कर सकेगा। इसके लिए सोसाइटियों में सप्लाई होने वाले पानी के बिल लेने में सहूलियतें होगी।
जीएमएडी की स्मार्ट सिटी शाखा के सलाहकार पीके अग्रवाल ने बताया कि पेजयल की आपूर्ति, स्थापना, एकीकरण और कमीशनिंग के लिए केंद्रीकृत एकीकृत जल प्रबंधन प्रणाली ( सीआईडब्ल्यूएमएस ) लागू करने की तैयारी है। उनका कहना हैं कि तकनीक की मदद से लोगों को बेहतर पानी की आपूर्ति करने में मदद मिलेगी। जीएमडीए का प्रयास हैं कि पूरी प्रणाली पर कमांड सेंटर से भी निगरानी रखी जाए। प्रभारी ने बताया कि अभी आपूर्ति और सप्लाई में काफी अंतर है। केंद्रीकृत एकीकृत जल प्रबंधन प्रणाली से यह पता चल सकेगा कि कितना पानी पाइपों से व्यर्थ हो रहा है। इसके अलावा एक विशेष क्षेत्र में भी पानी सप्लाई पर भी नजर रखी जा सकेगी। इससे पानी के पूरे सिस्टम पर भी नजर रखी जा सकेगी। लाइन टूटने पर तुरंत जानकारी कमांड सेंटर को मिल जाएगी।
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70 करोड़ से बन रही 100 एमएलडी क्षमता की नई यूनिट
पेजयल की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए चंदू बुढ़ेरा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर 100 एमएलडी क्षमता की नई यूनिट स्थापित करने का काम शुरू हो गया है। इस पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विकास मलिक ने बताया कि तीन माह से प्रोजेक्ट पर पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि अगले साल इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गय है। शहर की लगातार बढ़ रही पानी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए जीएमडीए चंदू बुढे़रा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर 100 एमएलडी क्षमता की नई यूनिट तैयार कर रहा है। मौजूदा समय में चंदू प्लांट पर 100 एमएलडी क्षमता के तीन प्लांट हैं, इनकी कुल क्षमता 300 एमएलडी है। बसई प्लांट पर 90 एमएलडी क्षमता के तीन प्लांट है और कुल क्षमता 270 एमएलडी है। चंदू बुढे़रा जल शोधन संयंत्र पर 65 किलोमीटर के एनसीआर चैनल के माध्यम से पानी पहुंचता है।
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शहर में पेयजल पर नजर रखने के लिए केंद्रीकृत एकीकृत जल प्रबंधन प्रणाली लागू करने की तैयारी है। इससे पानी की लाइनों से लेकर संयंत्रों तक पर कमांड सेंटर से नजर रखी जा सकेगी। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है।
- पीके अग्रवाल, एडवाइजर जीएमडीए
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लाइन टूटने पर कमांड सेंटर को तुरंत मिल जाएगी जानकारी
मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) साइबर सिटी में पेयजल आपूर्ति सुधारने पर आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने जा रहा है। इसके लिए जल शोधन संयंत्रों, बूस्टिंग स्टेशनों के अलावा पेयजल की बड़ी लाइनों में इलेक्ट्रानिक डिवाइस लगाए जाएंगे। केंद्रीकृत एकीकृत जल प्रबंधन प्रणाली से पेयजल आपूर्ति और सप्लाई पर सटीक नजर रखी जा सकेगी। दूसरा इस पूरे सिस्टम से जीएमडीए अपने कमांड सेंटर से निगरानी रख सकेगा। इस पर करीब 17.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है।
जीएमडीए शहर में पेयजल आपूर्ति को बेहतर करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए नए पानी शोधन संयंत्र के साथ लाइनों को दुरूस्त करा रहा है। जीएमडीए का मानना है कि बसई और चंदू वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पर्याप्त पानी की सप्लाई हो रही है। इसके बाद भी कई क्षेत्रों में पेयजल संकट बना रहता है। ऐसे में पानी कई जगहों पर व्यर्थ ही खराब हो रहा है। ऐसे में इसकी निगरानी रखने के लिए तकनीक का प्रयोग करने जा रहा है। इसके लिए जीएमडीए दोनों पानी शोधन संयंत्रों के अलावा शहर के सभी बूस्टिंग स्टेशनों और मेन लाइनों में इलेक्ट्राॅनिक उपकरण लगवाएगा। इससे डीएमडीए शोधित पानी और बूस्टिंग स्टेशनों पर पहुंचने वाले पानी का सही आंकलन कर सकेगा। इसके लिए सोसाइटियों में सप्लाई होने वाले पानी के बिल लेने में सहूलियतें होगी।
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जीएमएडी की स्मार्ट सिटी शाखा के सलाहकार पीके अग्रवाल ने बताया कि पेजयल की आपूर्ति, स्थापना, एकीकरण और कमीशनिंग के लिए केंद्रीकृत एकीकृत जल प्रबंधन प्रणाली ( सीआईडब्ल्यूएमएस ) लागू करने की तैयारी है। उनका कहना हैं कि तकनीक की मदद से लोगों को बेहतर पानी की आपूर्ति करने में मदद मिलेगी। जीएमडीए का प्रयास हैं कि पूरी प्रणाली पर कमांड सेंटर से भी निगरानी रखी जाए। प्रभारी ने बताया कि अभी आपूर्ति और सप्लाई में काफी अंतर है। केंद्रीकृत एकीकृत जल प्रबंधन प्रणाली से यह पता चल सकेगा कि कितना पानी पाइपों से व्यर्थ हो रहा है। इसके अलावा एक विशेष क्षेत्र में भी पानी सप्लाई पर भी नजर रखी जा सकेगी। इससे पानी के पूरे सिस्टम पर भी नजर रखी जा सकेगी। लाइन टूटने पर तुरंत जानकारी कमांड सेंटर को मिल जाएगी।
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70 करोड़ से बन रही 100 एमएलडी क्षमता की नई यूनिट
पेजयल की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए चंदू बुढ़ेरा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर 100 एमएलडी क्षमता की नई यूनिट स्थापित करने का काम शुरू हो गया है। इस पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विकास मलिक ने बताया कि तीन माह से प्रोजेक्ट पर पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि अगले साल इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गय है। शहर की लगातार बढ़ रही पानी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए जीएमडीए चंदू बुढे़रा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर 100 एमएलडी क्षमता की नई यूनिट तैयार कर रहा है। मौजूदा समय में चंदू प्लांट पर 100 एमएलडी क्षमता के तीन प्लांट हैं, इनकी कुल क्षमता 300 एमएलडी है। बसई प्लांट पर 90 एमएलडी क्षमता के तीन प्लांट है और कुल क्षमता 270 एमएलडी है। चंदू बुढे़रा जल शोधन संयंत्र पर 65 किलोमीटर के एनसीआर चैनल के माध्यम से पानी पहुंचता है।
शहर में पेयजल पर नजर रखने के लिए केंद्रीकृत एकीकृत जल प्रबंधन प्रणाली लागू करने की तैयारी है। इससे पानी की लाइनों से लेकर संयंत्रों तक पर कमांड सेंटर से नजर रखी जा सकेगी। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है।
- पीके अग्रवाल, एडवाइजर जीएमडीए