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Gurugram News: शिकायतकर्ता ही बना जांच अधिकारी, निष्पक्ष जांच पर संदेह

Tue, 06 Oct 2026 11:29 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:29 PM IST
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Complainant himself becomes the investigating officer; doubts raised about an impartial investigation.
अदालत ने टिप्पणी करते हुए शराब की बरामदगी के आरोपी को किया बरी
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60 पव्वे अवैध शराब बरामदगी का आरोप


अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। अवैध शराब की बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि जिस पुलिसकर्मी ने मामले की शिकायत दी, उसने ही जांच की महत्वपूर्ण कार्रवाई भी की। इसके अलावा छापे और कथित बरामदगी के दौरान मौके पर मौजूद आम लोगों में से किसी को स्वतंत्र गवाह नहीं बनाया गया। इन परिस्थितियों में अदालत ने अभियोजन के मामले को संदेह से परे साबित नहीं माना और आरोपी अरुण को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

मामला 24 जून 2021 का है। पुलिस के अनुसार हेड कांस्टेबल परवीन और कांस्टेबल रविंद्र ने सेक्टर-34 स्थित मार्बल मार्केट के पास से अवैध शराब बेचने के आरोप में अरुण को पकड़ा था। इसके बाद सदर थाना पुलिस ने आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। इस दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि हेड कांस्टेबल परवीन इस मामले में शिकायतकर्ता होने के साथ पहले जांच अधिकारी भी थे। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने ही महत्वपूर्ण जांच की, जिससे आरोपी और अभियोजन दोनों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और निष्पक्ष जांच को लेकर संदेह पैदा होता है। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामले में अभियोजन पक्ष को आरोप संदेह से परे साबित करने होते हैं। इस मामले में अभियोजन ऐसा करने में विफल रहा। अदालत ने सोमवार को आरोपी अरुण को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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मौके पर थे लोग, फिर भी नहीं बनाया गवाह
अदालत ने जांच में स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं करने को भी गंभीरता से लिया। दूसरे पुलिसकर्मी ने जिरह के दौरान माना कि कथित छापे और तलाशी के समय कई आम लोग मौके पर मौजूद थे, लेकिन किसी को जांच में शामिल नहीं किया गया। बरामदगी के समय भी कोई स्वतंत्र व्यक्ति गवाह नहीं बनाया गया। अदालत ने माना कि ऐसी स्थिति में केवल पुलिसकर्मियों की गवाही के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
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