गुरुग्राम : 125 करोड़ की ठगी में बीएसएफ कमांडेंट बहन और बीवी के साथ गिरफ्तार

अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 14 Jan 2022 04:47 AM IST

सार

ठेके दिलाने के नाम पर करता था ठगी। खुद को आईपीएस अफसर बताता था आरोपी।
यही है आरोपी...
यही है आरोपी... - फोटो : amar ujala
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विस्तार

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) कैंपस में निर्माण कार्यों के लिए ठेका दिलाने के नाम पर पांच बिल्डरों से 125 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। गुरुग्राम पुलिस ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कमांडेंट प्रवीण यादव, उसकी पत्नी ममता यादव, एक्सिस बैंक की मैनेजर बहन रितुराज यादव और एक बिचौलिये दिनेश कुमार को पंजाब के जीरकपुर से गिरफ्तार किया गया है।
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एसीपी क्राइम प्रीतपाल सांगवान ने बताया कि उनके पास से 13.81 करोड़ रुपये की नकदी और चार लग्जरी कारें बरामद की हैं। मामले में एनएसजी में तैनात सहायक कमांडेंट नवीन यादव अभी फरार है। वह रिश्ते में मास्टरमाइंड प्रवीण यादव का साला है और अभी मानेसर में तैनात है। एसीपी ने बताया कि मास्टरमाइंड प्रवीण यादव गुरुग्राम स्थित खेड़ा खुर्ररमपुर का रहने वाला है। दिनेश हिसार का रहने वाला है। उन्होंने कहा कि 8 जनवरी को बिल्डर नारायण दास इसरानी ने मानेसर में एफआईआर दर्ज कराई थी।


उसके मुताबिक प्रवीण यादव ने खुद को आईपीएस अफसर बताकर एनएसजी कैंपस में ठेके दिलाने के नाम पर उनसे 64.49 करोड़ रुपये की ठगी की। इसमें रितुराज भी शामिल है। वह सेक्टर 81 में सफायर मॉल स्थित एक्सिस बैंक में शाखा प्रबंधक है। उनके साथ एनएसजी में सहायक कमांडेंट नवीन यादव भी शामिल है। 9 जनवरी को दूसरे बिल्डर देवेंद्र यादव ने 37 करोड़ रुपये ठगी की शिकायत की थी। अब तक की छानबीन में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि आरोपी इस रकम को शेयर मार्केट में लगाता था, जिसमें उन्हें घाटा हुआ है। पुलिस ने प्रवीण यादव को 6 दिन और बाकी ओरोपियों को तीन दिन की रिमांड पर लिया है।

मास्टरमाइंड ने फर्जी कंपनी बनाई थी
प्रवीण ने एनएसजी के पते पर यह फर्जी कंपनी बनाई थी। जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी का एनएसजी से कोई लेना-देना नहीं था। उसने पत्नी ममता यादव व बहन रितुराज को निदेशक बना रखा था। वह चार साल पहले बीएसएफ से प्रतिनियुक्ति पर एनएसजी में तैनात हुआ था। बाद में उसकी नियुक्ति बीएसएफ में हो गई। तब उसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया। हालांकि आवेदन अभी तक स्वीकार नहीं हुआ है। एनएसजी में तैनाती के दौरान उसके पास कंस्ट्रक्शन डिवीजन का जिम्मा था। तभी से वह एनएसजी में कंस्ट्रक्शन के काम दिलाने के नाम पर ठगी कर रहा था।

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