{"_id":"64a993a1be0e7e0d8b0c4aa4","slug":"amount-of-lakhs-being-grabbed-under-bhavantar-bharpayee-yojana-gurgaon-news-c-1-1-noi1175-700504-2023-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: भावांतर भरपाई योजना के तहत हड़पी जा रही लाखों की राशि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: भावांतर भरपाई योजना के तहत हड़पी जा रही लाखों की राशि
विज्ञापन
कई लोगों ने अपनी जमीन की ऑनलाइन जांच करवाई तो हुआ खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। प्रदेश सरकार ने किसानों को समृद्ध बनाने तथा उनकी खराब फसल के नुकसान के लिए बनाई गई भावांतर भरपाई योजना के जरिए धोखाधड़ी तथा फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। दरअसल फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों ने भावांतर भरपाई योजना का लाभ लेने के लिए पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड कर लाखों रुपये की राशि हड़पी है और मौके पर अपने नाम से पंजीकरण करवाया हुआ है। इस बात का खुलासा तब हुआ, जब जमीन के असल मालिक मेरी फसल मेरा ब्योरा पर अपना पंजीकरण कराने सीएससी पर पहुंचे। इस संबंध में फिरोजपुर झिरका के कई किसानों ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
पंजीकरण कराने के दौरान किए गए फर्जी दस्तावेज अपलोड
नूंह जिले में चल रहा यह एक बड़ा घोटाला है। इस प्रकार की शिकायतें जिले में आम हैं। हमारी टीम ने इस संबंध में कई ऐसे नंबर और नाम जुटाए जो फर्जी दस्तावेज अपलोड कर ले रहे थे। इनसे पूछा गया तो इन्होंने बताया कि हमने सीएससी सेंटर पर ऑनलाइन कराकर ऐसा किया है। उन्होंने बताया कि सीएससी चलाने वाले लोगों द्वारा 50-50 अकाउंट खुलवाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाले सीएससी सेंटर द्वारा ऐसी पंजीकरण की घटनाएं सामने आ रही हैं। वैसे भावांतर भरपाई योजना के तहत सरकार की ओर से बाजरा उत्पादन करने वाले किसानों को 400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से लाभ दिया जाता है। यह राशि किसानों के खाते में सीधे डाली जाती है।
इस बारे में आरिफ राजाका सीएससी मैनेजर नूंह ने बताया कि मेरी फसल मेरा ब्योरा का पोर्टल सीएससी के साथ इंटीग्रेटिड नहीं है। इसके लिए सरकार से पत्राचार के माध्यम से अनुरोध किया गया है कि वो इसको सीएससी के साथ इंटीग्रेटिड करें, ताकि बाहरी लोगों द्वारा किए जा रहे फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
विज्ञापन
ऐसे हुआ खुलासा
क्षेत्रीय किसान विजय कुमार, अशोक कुमार, गुरदयाल, भारतभूषण, तोला राम, निशांत कुमार, महेन्द्र प्रताप, शकुंतला देवी, दिपांशु अरोड़ा की दोहा गांव स्थित लगभग 35 से 40 किला जमीन है। इसके अलावा गुरदयाल, भारत भूषण, ओमप्रकाश, भगवानदास इत्यादि की भी भाकडोजी में 35 से 40 किला जमीन है, एक अन्य किसान अशोक कुमार तोलाराम ने बताया कि उसकी भी 15 किला जमीन है। उन्होंने मेरी फसल मेरा ब्योरा पर भावांतर भरपाई योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया तो उनकी जमीन पर जालसाज फर्जी कागजात अपलोड कर राशि हड़प रहे हैं, ऐसा मालूम हुआ। उन्होंने उन मोबाइल नंबर पर बात की तो ज्यादातर लोगों ने अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिए। लोगों का कहना है कि जल्द ही इस बाबत अधिकारी नागरिक और स्थानीय थाने में शिकायत देकर मुख्यमंत्री के समक्ष घटना रखी जाएगी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। प्रदेश सरकार ने किसानों को समृद्ध बनाने तथा उनकी खराब फसल के नुकसान के लिए बनाई गई भावांतर भरपाई योजना के जरिए धोखाधड़ी तथा फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। दरअसल फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों ने भावांतर भरपाई योजना का लाभ लेने के लिए पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड कर लाखों रुपये की राशि हड़पी है और मौके पर अपने नाम से पंजीकरण करवाया हुआ है। इस बात का खुलासा तब हुआ, जब जमीन के असल मालिक मेरी फसल मेरा ब्योरा पर अपना पंजीकरण कराने सीएससी पर पहुंचे। इस संबंध में फिरोजपुर झिरका के कई किसानों ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।
पंजीकरण कराने के दौरान किए गए फर्जी दस्तावेज अपलोड
नूंह जिले में चल रहा यह एक बड़ा घोटाला है। इस प्रकार की शिकायतें जिले में आम हैं। हमारी टीम ने इस संबंध में कई ऐसे नंबर और नाम जुटाए जो फर्जी दस्तावेज अपलोड कर ले रहे थे। इनसे पूछा गया तो इन्होंने बताया कि हमने सीएससी सेंटर पर ऑनलाइन कराकर ऐसा किया है। उन्होंने बताया कि सीएससी चलाने वाले लोगों द्वारा 50-50 अकाउंट खुलवाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाले सीएससी सेंटर द्वारा ऐसी पंजीकरण की घटनाएं सामने आ रही हैं। वैसे भावांतर भरपाई योजना के तहत सरकार की ओर से बाजरा उत्पादन करने वाले किसानों को 400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से लाभ दिया जाता है। यह राशि किसानों के खाते में सीधे डाली जाती है।
विज्ञापन
इस बारे में आरिफ राजाका सीएससी मैनेजर नूंह ने बताया कि मेरी फसल मेरा ब्योरा का पोर्टल सीएससी के साथ इंटीग्रेटिड नहीं है। इसके लिए सरकार से पत्राचार के माध्यम से अनुरोध किया गया है कि वो इसको सीएससी के साथ इंटीग्रेटिड करें, ताकि बाहरी लोगों द्वारा किए जा रहे फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
विज्ञापन
ऐसे हुआ खुलासा
क्षेत्रीय किसान विजय कुमार, अशोक कुमार, गुरदयाल, भारतभूषण, तोला राम, निशांत कुमार, महेन्द्र प्रताप, शकुंतला देवी, दिपांशु अरोड़ा की दोहा गांव स्थित लगभग 35 से 40 किला जमीन है। इसके अलावा गुरदयाल, भारत भूषण, ओमप्रकाश, भगवानदास इत्यादि की भी भाकडोजी में 35 से 40 किला जमीन है, एक अन्य किसान अशोक कुमार तोलाराम ने बताया कि उसकी भी 15 किला जमीन है। उन्होंने मेरी फसल मेरा ब्योरा पर भावांतर भरपाई योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया तो उनकी जमीन पर जालसाज फर्जी कागजात अपलोड कर राशि हड़प रहे हैं, ऐसा मालूम हुआ। उन्होंने उन मोबाइल नंबर पर बात की तो ज्यादातर लोगों ने अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिए। लोगों का कहना है कि जल्द ही इस बाबत अधिकारी नागरिक और स्थानीय थाने में शिकायत देकर मुख्यमंत्री के समक्ष घटना रखी जाएगी।