फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Gurugram News ›   A private service contract cannot be converted into forced employment by an order.

Gurugram News: आदेश से निजी सेवा अनुबंध को जबरन नौकरी नहीं बनाया जा सकता

Tue, 06 Oct 2026 11:21 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:21 PM IST
विज्ञापन
A private service contract cannot be converted into forced employment by an order.
भारती फाउंडेशन के पूर्व एचआर एग्जीक्यूटिव की याचिका की खारिज
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिला अदालत ने निजी नौकरी में बहाली करने की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि निजी सेवा अनुबंध को अदालत के आदेश से जबरन लागू कराकर कर्मचारी को नौकरी पर बहाल नहीं कराया जा सकता। यह आदेश सिविल जज (सीनियर डिविजन) मनीष कुमार की अदालत ने दिया है। भारती एयरटेल फाउंडेशन के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी सत्यपाल सिंह की ओर से दायर मुकदमा खारिज कर दिया है।
रेवाड़ी निवासी सत्यपाल सिंह ने अप्रैल 2019 में भारती फाउंडेशन के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर किया था। उन्होंने याचिका में बताया कि मई 2007 में उन्हें एचआर एग्जीक्यूटिव के पद पर नियुक्त किया गया था। करीब 13 साल तक सेवा करने के बाद वे सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत थे और उनका मासिक वेतन करीब 70 हजार रुपये था। आरोप था कि वर्ष 2018 में वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया और उनसे जबरन इस्तीफा लेने का प्रयास किया गया। इसके बाद जनवरी 2019 में उनका तबादला झारखंड कर दिया गया। उनकी 70 वर्षीय बीमार मां की देखभाल की जिम्मेदारी होने के कारण वह देवघर स्थानांतरण पर नहीं जा सके। इसके बाद मार्च 2019 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। उन्होंने दिसंबर 2018 से बकाया वेतन, पीएफ और ग्रेच्युटी समेत नौकरी में बहाली तथा मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी।
विज्ञापन


भारती फाउंडेशन की ओर से वादी के आरोपों का विरोध किया गया। कंपनी ने अदालत में कहा कि नियुक्ति पत्र की शर्त के तहत कर्मचारी को भारत में किसी भी स्थान पर स्थानांतरित करने का अधिकार संस्था के पास था। कर्मचारी का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर का नहीं था और उसे लो परफॉर्मर माना गया था। 28 मार्च 2019 को उन्हें दो महीने के नोटिस प्रावधान के तहत कर्मचारी की सेवा समाप्त की गई थी। अदालत ने कहा कि निजी संस्था या चैरिटेबल ट्रस्ट के कर्मचारी को अदालत के आदेश से जबरन सेवा में बहाल नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed