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माइनिंग फर्म में सांझेदारी के नाम पर 2.44 करोड़ की धोखाधड़ी
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गुरुग्राम। जयपुर में माइनिंग फर्म में साझेदारी के नाम पर 2.44 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। सेक्टर-14 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सेक्टर-46 स्थित राधे श्याम ठेकेदार व सेक्टर-14 स्थित वीपी यादव ठेकेदार ने बताया कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग में भवन निर्माण का ठेका लिया हुआ है। उनकी पहचान कुछ समय पहले जयपुर निवासी रमेश मोरनी व सारिका मोरनी से हुई थी। उन्होंने एमडीएस प्रमोटर के मालिक डॉ. ओम शिव हरिचंद्र व एक अन्य जाधवीर सिंह से मिलवाया था। इन्होंने राजस्थान से खनन का कारोबार शुरू करने की बात कही थी। इनके द्वारा राजस्थान में माइनिंग फर्म बनाई जा रही थी जिसमें उन्हें 50 फीसदी का साझेदार बनाने की बात कही।
काफी बैठकों के बाद उन्होंने हामी भर दी। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्होंने इस कार्य में निवेश करने के लिए 2.44 करोड़ रुपये की राशि अलग-अलग समय पर बैंक खाते में व नकद दी। इस राशि से कंपनी स्थापित करने समेत माइनिंग के लिए अनुमति लेने का कार्य करने लिए खर्च की जानी थी। आरोप है कि राशि लेने के बाद से आरोपियों ने उन्हें बहकाना शुरू कर दिया। उन्हें न तो फर्म स्थापना के बारे में जानकारी दी जा रही है और न ही माइनिंग अनुमति के बारे में बताया जा रहा है। कुछ भी पूछने पर यह सभी जवाबदेही से बच रहे हैं। इस पर उन्होंने जुलाई 2020 में पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने करीब साढ़े पांच महीने तक जांच करने के उपरांत रविवार देर शाम मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि तीन कंपनियों व चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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सेक्टर-46 स्थित राधे श्याम ठेकेदार व सेक्टर-14 स्थित वीपी यादव ठेकेदार ने बताया कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग में भवन निर्माण का ठेका लिया हुआ है। उनकी पहचान कुछ समय पहले जयपुर निवासी रमेश मोरनी व सारिका मोरनी से हुई थी। उन्होंने एमडीएस प्रमोटर के मालिक डॉ. ओम शिव हरिचंद्र व एक अन्य जाधवीर सिंह से मिलवाया था। इन्होंने राजस्थान से खनन का कारोबार शुरू करने की बात कही थी। इनके द्वारा राजस्थान में माइनिंग फर्म बनाई जा रही थी जिसमें उन्हें 50 फीसदी का साझेदार बनाने की बात कही।
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काफी बैठकों के बाद उन्होंने हामी भर दी। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्होंने इस कार्य में निवेश करने के लिए 2.44 करोड़ रुपये की राशि अलग-अलग समय पर बैंक खाते में व नकद दी। इस राशि से कंपनी स्थापित करने समेत माइनिंग के लिए अनुमति लेने का कार्य करने लिए खर्च की जानी थी। आरोप है कि राशि लेने के बाद से आरोपियों ने उन्हें बहकाना शुरू कर दिया। उन्हें न तो फर्म स्थापना के बारे में जानकारी दी जा रही है और न ही माइनिंग अनुमति के बारे में बताया जा रहा है। कुछ भी पूछने पर यह सभी जवाबदेही से बच रहे हैं। इस पर उन्होंने जुलाई 2020 में पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने करीब साढ़े पांच महीने तक जांच करने के उपरांत रविवार देर शाम मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि तीन कंपनियों व चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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